फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Kaithal News ›   The ancestral business of quilt making is now limited to machines

Kaithal News: रजाई बनाने का पुश्तैनी कारोबार मशीनों तक सिमटा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 10 Nov 2024 02:49 AM IST
विज्ञापन
The ancestral business of quilt making is now limited to machines
राजौंद। सर्दियां आते ही रजाइयों को भरवाने का कार्य जोर पकड़ने लगा है। नगर के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश से आए गद्दे व रजाई भरने के कार्य में माहिर कारीगरों के अड्डों पर ग्राहकों की भीड़ देखने को मिल रही है। यहां अपनी आवश्यकता अनुसार लोगों को सर्दी से निजात पाने के लिए रजाइयां भरवाते देखा जा सकता है। समय के साथ-साथ रजाई भरने के पुश्तैनी कारोबार में भी बदलाव आ गया है।
विज्ञापन

प्राचीन काल में यह कार्य तेली व जुलाहा समुदाय के लोग लकड़ी से बने उपकरणों की मदद से अपने हाथों से रुई, पिनाई व लुढ़ाई का कार्य करते थे। परंतु समय के साथ हो रहे तकनीकी सुधार के चलते इन लोगों का पुश्तैनी धंधा भी आजकल मशीनों तक ही सिमटकर रह गया है।
विज्ञापन

नगर में रजाई भरने के कारीगर भूरा ने बताया कि वह पिछले कई वर्षों से रजाई भरने का कार्य कर रहा है। उसने बताया कि तकनीकी विकास की कमी के चलते प्राचीन काल में इस कार्य से जुड़े लोग हर गांव व हर क्षेत्र में मिल जाते थे। जो हर समय इसी पैतृक धंधे में लगे रहते थे लेकिन मशीनी युग के चलते यह काम केवल दो महीने का ही रह गया है तथा इसे करने वाले कारीगर भी गिने-चुने ही रह गए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed