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Kaithal News: परिचित हैं एजेंट... तभी शिकायत करने में हिचकिचाहट

Thu, 13 Nov 2025 01:44 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Thu, 13 Nov 2025 01:44 AM IST
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The agent is familiar... that's why there is hesitation in complaining
नरेंद्र पंडित
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कैथल। जिले के 33 युवा अमेरिका से डिपोर्ट होकर लौट चुके हैं। हर कोई 50 से 60 लाख रुपये तक खर्च कर वहां गया था... यानी करीब 17 करोड़ रुपये एजेंटों की जेब में चले गए। किसी ने पुश्तैनी जमीन बेची, किसी ने मकान गिरवी रखा, लेकिन नतीजा शून्य रहा। अमेरिका से लौटने के बाद अब ये युवा एजेंटों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने से भी कतरा रहे हैं।

इसकी एक बड़ी वजह यह है कि अधिकांश एजेंट या तो रिश्तेदार हैं या पारिवारिक जानकार। वहीं कुछ परिवार यह तर्क दे रहे हैं कि एजेंट की डील तो अमेरिका पहुंचाने की थी, उन्होंने पहुंचा दिया... डिपोर्ट होने में उनकी क्या गलती।
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पुलिस का कहना है कि यही सोच इन एजेंटों को कानूनी कार्रवाई से बचा रही है, जबकि उन्होंने दर्जनों युवाओं की जिंदगी को खतरे में डाल दिया।

हरियाणा और पंजाब के कई परिवार अपनी जमीन-जायदाद, दुकानें और गहने बेचकर या गिरवी रखकर विदेश जाने की कोशिश में हैं। अब डिपोर्ट हुए युवाओं के परिवार इस डर में हैं कि कहीं उनके बच्चे भी उसी राह पर न चल पड़ें।
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”अमेरिका में नियम हुए और सख्त

अमेरिका में रह रहे कैथल के राम सिंह, सुखदेव और करनाल के विनोद शर्मा ने बताया कि अब इमिग्रेशन के नियम पहले से कहीं ज्यादा कड़े कर दिए गए हैं। पहले डंकी रूट से आने वालों को अस्थायी जेल में रखने के बाद लोकेशन टैग लगाकर छोड़ा जाता था, और कुछ समय बाद वर्क परमिट तक मिल जाता था। लेकिन अब अदालत में सीधे मामला दर्ज कर डिपोर्ट करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। संवाद

डिपोर्ट होकर लौटे युवाओं की दर्दनाक दास्तां



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नाम न छापने की शर्त पर डिपोर्ट होकर लौटे कुछ युवाओं ने बताया कि वे मार्च महीने में अमेरिका की सीमा दीवार पार करने की कोशिश में एक ग्रुप के साथ गए थे। उन्हें पांच महीने जंगलों में छिपकर रहना पड़ा। डोंकरों को लाखों रुपये देकर रास्ता तय किया, कई दिनों तक भूखे-प्यासे पैदल चले।जानकारी के अनुसार, करीब 50 हजार भारतीय डंकी रूट से अमेरिका पहुंचे हुए हैं। इनमें कैथल जिले के 33 लोग डिपोर्ट हो

डंकी रूट से गए 50 हजार भारतीय

nचुके हैं। अमेरिका में अधिकतर भारतीय ड्राइविंग, माली, शोरूम हेल्पर, लकड़ी और बिजली के काम में लगे हैं। इन दिनों वहां खासकर ड्राइवरों के लिए सख्ती बढ़ गई है, उनसे अंग्रेजी में बातचीत की शर्त रखी जा रही है, जिससे रोज़गार और मुश्किल हो गया है।



हमें मांसाहारी भोजन दिया गया

n हमने नहीं खाया। कई दिन केवल कच्ची सब्जियां और पानी पीकर गुजारे। दस दिन बाद मुश्किल से एक आध रोटी मिलनी शुरू हुई,” उन्होंने बताया। उन्होंने अपील की कि “लोग डंकी रूट से जाने का विचार त्याग दें, यह जान हथेली पर रखकर जाने वाला सफर है।


किसी के बहकावे में न आएं : एसपी

विदेश भेजने के नाम पर किसी भी एजेंट या व्यक्ति को पैसे देने से पहले उसकी वैधता अवश्य जांच लें। अगर कोई संदिग्ध मामला सामने आए तो तुरंत पुलिस को सूचित करें। किसी के बहकावे में न आएं, क्योंकि ऐसे रास्ते न केवल अवैध हैं बल्कि जानलेवा भी साबित हो सकते हैं। -उपासना यादव, एसपी
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