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Kaithal News: श्रमिकों के बच्चों को शिक्षक खुद लाते-ले जाते हैं स्कूल
Wed, 06 May 2026 01:44 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Wed, 06 May 2026 01:44 AM IST
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गांव रोहेड़ा के सरकारी स्कूल में ईंट भट्ठा मजदूरों के बच्चों को पढ़ाते शिक्षक ।
संवाद न्यूज एजेंसी
राजौंद। राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, रोहेड़ा में शिक्षा के प्रति एक प्रेरणादायक पहल सामने आई है, जहां ईंट भट्ठा श्रमिकों के बच्चों को प्रतिदिन स्कूल लाकर पढ़ाया जा रहा है। अब तक 23 लड़के-लड़कियों ने विद्यालय में दाखिला लिया है और नियमित रूप से शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
इन बच्चों की पढ़ाई में सबसे बड़ी बाधा दूरी और संसाधनों की कमी थी, लेकिन विद्यालय के प्रधानाचार्य वीरेंद्र देओल और डीपीई कृष्ण सिंगरोह ने इसे अपनी जिम्मेदारी मानते हुए समाधान निकाला। वे रोजाना अपनी निजी गाड़ी से बच्चों को भट्ठे से स्कूल लेकर आते हैं और छुट्टी के बाद वापस छोड़ते हैं।
विद्यालय में बच्चों को नियमित रूप से पढ़ाई करवाई जा रही है। कला अध्यापक राजेश कुमार विशेष रुचि लेकर उन्हें पढ़ाते हैं, जिससे बच्चों में सीखने के प्रति उत्साह बढ़ा है। स्कूल की ओर से कॉपी, पेंसिल सहित अन्य आवश्यक शैक्षणिक सामग्री भी उपलब्ध करवाई जा रही है। साथ ही मिड-डे मील योजना के तहत दोपहर का भोजन भी दिया जा रहा है।
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चॉकलेट और बिस्कुट भी उपलब्ध
विद्यालय स्टाफ बच्चों के प्रति स्नेह दिखाते हुए उन्हें चॉकलेट और बिस्कुट भी उपलब्ध करवा रहा है। पिछले एक महीने में बच्चों में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है और वे पढ़ना-लिखना सीखने लगे हैं। इसके अलावा उन्हें पैंट-शर्ट और जूते भी उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि वे सम्मानपूर्वक स्कूल आ सकें। इस काम में विद्यालय के स्टाफ सिकंदर सिंह, बलजीत सिंह, राजबीर सिंह और रामबिलास शास्त्री का भी विशेष योगदान रहा है। यह पहल न केवल बच्चों के भविष्य को संवार रही है, बल्कि समाज में शिक्षा के प्रति जागरूकता का सकारात्मक संदेश भी दे रही है।
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राजौंद। राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, रोहेड़ा में शिक्षा के प्रति एक प्रेरणादायक पहल सामने आई है, जहां ईंट भट्ठा श्रमिकों के बच्चों को प्रतिदिन स्कूल लाकर पढ़ाया जा रहा है। अब तक 23 लड़के-लड़कियों ने विद्यालय में दाखिला लिया है और नियमित रूप से शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
इन बच्चों की पढ़ाई में सबसे बड़ी बाधा दूरी और संसाधनों की कमी थी, लेकिन विद्यालय के प्रधानाचार्य वीरेंद्र देओल और डीपीई कृष्ण सिंगरोह ने इसे अपनी जिम्मेदारी मानते हुए समाधान निकाला। वे रोजाना अपनी निजी गाड़ी से बच्चों को भट्ठे से स्कूल लेकर आते हैं और छुट्टी के बाद वापस छोड़ते हैं।
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विद्यालय में बच्चों को नियमित रूप से पढ़ाई करवाई जा रही है। कला अध्यापक राजेश कुमार विशेष रुचि लेकर उन्हें पढ़ाते हैं, जिससे बच्चों में सीखने के प्रति उत्साह बढ़ा है। स्कूल की ओर से कॉपी, पेंसिल सहित अन्य आवश्यक शैक्षणिक सामग्री भी उपलब्ध करवाई जा रही है। साथ ही मिड-डे मील योजना के तहत दोपहर का भोजन भी दिया जा रहा है।
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चॉकलेट और बिस्कुट भी उपलब्ध
विद्यालय स्टाफ बच्चों के प्रति स्नेह दिखाते हुए उन्हें चॉकलेट और बिस्कुट भी उपलब्ध करवा रहा है। पिछले एक महीने में बच्चों में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है और वे पढ़ना-लिखना सीखने लगे हैं। इसके अलावा उन्हें पैंट-शर्ट और जूते भी उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि वे सम्मानपूर्वक स्कूल आ सकें। इस काम में विद्यालय के स्टाफ सिकंदर सिंह, बलजीत सिंह, राजबीर सिंह और रामबिलास शास्त्री का भी विशेष योगदान रहा है। यह पहल न केवल बच्चों के भविष्य को संवार रही है, बल्कि समाज में शिक्षा के प्रति जागरूकता का सकारात्मक संदेश भी दे रही है।