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Kaithal News: मां महागौरी की आराधना से गूंजे मंदिर, भक्तों ने लिया आशीर्वाद
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कलायत में शक्ति पूजा करते विहिप सदस्य। संवाद
- फोटो : samvad
संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। नवरात्र के आठवें दिन मंदिरों में श्रद्धालुओं ने मां महागौरी की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां महागौरी को देवी पार्वती का 16 वर्षीय अविवाहित स्वरूप माना जाता है। मां की आराधना से भक्तों को सुख-शांति और मनोकामना पूर्ति का आशीर्वाद मिलता है।
मंदिर के पुजारी संजय गौतम ने बताया कि चैत्र और आश्विन मास के नवरात्र में श्रद्धालु अखंड ज्योत प्रज्ज्वलित कर विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। मान्यता है कि जहां-जहां माता के अंग गिरे, वहां शक्तिपीठों की स्थापना हुई। देश में 51 शक्तिपीठों में श्रद्धालु समय-समय पर मां की आराधना करते हैं। नवरात्र के आठवें दिन मां महागौरी और नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है।
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तपस्या से पड़ा महागौरी नाम
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, देवी पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। तप के कारण उनका रंग काला पड़ गया। बाद में भगवान शिव ने उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर गंगा के पवित्र जल से उन्हें स्नान कराया, जिससे उनका रंग गौर हो गया। तभी से उन्हें महागौरी कहा जाने लगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, मां महागौरी की पूजा से राहु ग्रह के अशुभ प्रभावों को कम करने की भी मान्यता है।
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कलायत। नवरात्र के आठवें दिन मंदिरों में श्रद्धालुओं ने मां महागौरी की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां महागौरी को देवी पार्वती का 16 वर्षीय अविवाहित स्वरूप माना जाता है। मां की आराधना से भक्तों को सुख-शांति और मनोकामना पूर्ति का आशीर्वाद मिलता है।
मंदिर के पुजारी संजय गौतम ने बताया कि चैत्र और आश्विन मास के नवरात्र में श्रद्धालु अखंड ज्योत प्रज्ज्वलित कर विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। मान्यता है कि जहां-जहां माता के अंग गिरे, वहां शक्तिपीठों की स्थापना हुई। देश में 51 शक्तिपीठों में श्रद्धालु समय-समय पर मां की आराधना करते हैं। नवरात्र के आठवें दिन मां महागौरी और नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है।
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तपस्या से पड़ा महागौरी नाम
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, देवी पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। तप के कारण उनका रंग काला पड़ गया। बाद में भगवान शिव ने उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर गंगा के पवित्र जल से उन्हें स्नान कराया, जिससे उनका रंग गौर हो गया। तभी से उन्हें महागौरी कहा जाने लगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, मां महागौरी की पूजा से राहु ग्रह के अशुभ प्रभावों को कम करने की भी मान्यता है।
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