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कुछ कदम चले, काफी दूर चलना है बाकी
ब्यूरो कैथल
Updated Thu, 21 Jul 2016 12:51 AM IST
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शहर में ठोस कचरा प्रबंधन पर नहीं हुआ काम शुरू
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए स्वच्छता अभियान को दो साल पूरे होने को हैं। लेकिन अभी यह अभियान जिले में पूरी तरह से रफ्तार नहीं पकड़ पाया है। शहर में ठोस कचरा प्रबंधन योजना जहां अधूरी पड़ी है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्वच्छता अभियान के पूरी तरह से सफल होने में अभी काफी लंबा सफर तय किया जाना है। वर्ष 2017 तक सरकार द्वारा सभी गांवों को खुले में शौच मुक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। लेकिन अभी तक 270 गांवों में से 36 गांव इस श्रेणी में आ पाए हैं। जिस कारण अगले साल तक इस लक्ष्य को हासिल करना दूर की कौड़ी नजर आ रहा है।
जिले में धीमी है स्वच्छता अभियान की रफ्तार
जिले में करीब दो साल पहले संपूर्ण स्वच्छता अभियान का नाम बदलकर भारत स्वच्छता मिशन कर दिया गया था। जिसके तहत फिलहाल ग्रामीण क्षेत्रों में काम किया जा रहा है। इसमें जिले में 36 गांवों को खुले में शौच मुक्त किया जा चुका है। जिसमें से 24 गांवों को इंटर स्टेट टीम द्वारा जांचा गया है। इसके अलावा वर्ष 2017 तक सभी 270 गांवों को खुले में शौच मुक्त किया जाना है।
120 गांवों में स्वीकृत हो चुके हैं फाइव पाैंड सिस्टम, कइयों पर काम चालू नहीं
जिले में गांवों को स्वच्छ बनाने के लिए तालाबों को स्वच्छ बनाने की दिशा में काम चल रहा है। 270 गांवों में से 120 गांवों में फाइव पौंड सिस्टम स्वीकृत हो चुके हैं। लेकिन इनमें से अभी तक 54 पर काम शुरू हुआ है। शेष के लिए अभी प्रारंभिक प्रक्रिया ही चल रही है।
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शहर में अधूरी पड़ी है ठोस कचरा प्रबंधन योजना
कैथल शहर में ही ठोस कचरा प्रबंधन योजना अभी सिरे नहीं चढ़ पाई है। खुराना रोड पर कचरा डंपिंग के लिए जगह तो बना दी गई। लेकिन अभी तक यह प्लांट पूरी तरह से तैयार नहीं हुआ है। हालांकि पिछले करीब दो माह से शहर में घर-घर जाकर कचरा एकत्रित करने के लिए वैन जरूर लगा दी गई हैं। जिससे कचरा निवारण में लोगों को काफी सहायता मिल रही है। लेकिन ठोस कचरा प्रबंधन प्लांट शुरू हो जाए तो इस दिशा में ओर अच्छा काम हो सकता है।
इस साल अब तक 2500 शौचालय बने
पिछले दो साल में जिले में करीब 20000 शौचालय बनाए गए हैं। इस साल का लक्ष्य 18 हजार 500 शौचालय बनाए जाने का है। जिसमें से अभी तक 2500 शौचालय बने हैं। विभाग द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालय बनाए जाने पर करीब 12000 रुपये की राशि दी जा रही है।
विद्यार्थियों में आई है जागरूकता
क्लीन कैथल, ग्रीन कैथल अभियान के संयोजक पुनीत चौधरी एडवोकेट ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छता अभियान चलाकर एक तरह से देश को इस बारे में सोचने पर मजबूर कर दिया। विद्यार्थी स्तर पर काफी जागरूकता आई है। लेकिन सफाई को लेकर ग्राउंड स्तर पर काम किए जाने की आवश्यकता है। सरकार के अलावा खुद लोगों को सफाई को अपनी दिनचर्या का अंग बनाना होगा। साथ ही जो बजट बेवजह लोगों की जेब में जा रहा है, उसे सही ढंग से खर्च किया जाए तो शत-प्रतिशत स्वच्छता पाई जा सकती है।
जिले में 120 तालाबों में से 54 को स्वच्छ बनाने की दिशा में काम शुरू कर दिया गया है। शेष पर भी शीघ्र ही काम शुरू हो जाएगा। सरकार द्वारा जारी निर्देशानुसार इन कामों को पूरा कर लिया जाएगा।
राकेश गोयल, एक्सईएन पंचायती राज, कैथल।
जिले में 36 गांव खुले में शौचमुक्त किए जा चुके हैं। वर्ष 2017 तक सभी गांवों को खुले में शौचमुक्त किए जाने हैं। इस दिशा में काम चल रहा है। निर्धारित लक्ष्य के अनुसार शौचालयों का निर्माण किया जा रहा है।
जितेंद्र कंसल, इंचार्ज, भारत स्वच्छता मिशन, कैथल।
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जिले में धीमी है स्वच्छता अभियान की रफ्तार
जिले में करीब दो साल पहले संपूर्ण स्वच्छता अभियान का नाम बदलकर भारत स्वच्छता मिशन कर दिया गया था। जिसके तहत फिलहाल ग्रामीण क्षेत्रों में काम किया जा रहा है। इसमें जिले में 36 गांवों को खुले में शौच मुक्त किया जा चुका है। जिसमें से 24 गांवों को इंटर स्टेट टीम द्वारा जांचा गया है। इसके अलावा वर्ष 2017 तक सभी 270 गांवों को खुले में शौच मुक्त किया जाना है।
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120 गांवों में स्वीकृत हो चुके हैं फाइव पाैंड सिस्टम, कइयों पर काम चालू नहीं
जिले में गांवों को स्वच्छ बनाने के लिए तालाबों को स्वच्छ बनाने की दिशा में काम चल रहा है। 270 गांवों में से 120 गांवों में फाइव पौंड सिस्टम स्वीकृत हो चुके हैं। लेकिन इनमें से अभी तक 54 पर काम शुरू हुआ है। शेष के लिए अभी प्रारंभिक प्रक्रिया ही चल रही है।
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शहर में अधूरी पड़ी है ठोस कचरा प्रबंधन योजना
कैथल शहर में ही ठोस कचरा प्रबंधन योजना अभी सिरे नहीं चढ़ पाई है। खुराना रोड पर कचरा डंपिंग के लिए जगह तो बना दी गई। लेकिन अभी तक यह प्लांट पूरी तरह से तैयार नहीं हुआ है। हालांकि पिछले करीब दो माह से शहर में घर-घर जाकर कचरा एकत्रित करने के लिए वैन जरूर लगा दी गई हैं। जिससे कचरा निवारण में लोगों को काफी सहायता मिल रही है। लेकिन ठोस कचरा प्रबंधन प्लांट शुरू हो जाए तो इस दिशा में ओर अच्छा काम हो सकता है।
इस साल अब तक 2500 शौचालय बने
पिछले दो साल में जिले में करीब 20000 शौचालय बनाए गए हैं। इस साल का लक्ष्य 18 हजार 500 शौचालय बनाए जाने का है। जिसमें से अभी तक 2500 शौचालय बने हैं। विभाग द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालय बनाए जाने पर करीब 12000 रुपये की राशि दी जा रही है।
विद्यार्थियों में आई है जागरूकता
क्लीन कैथल, ग्रीन कैथल अभियान के संयोजक पुनीत चौधरी एडवोकेट ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छता अभियान चलाकर एक तरह से देश को इस बारे में सोचने पर मजबूर कर दिया। विद्यार्थी स्तर पर काफी जागरूकता आई है। लेकिन सफाई को लेकर ग्राउंड स्तर पर काम किए जाने की आवश्यकता है। सरकार के अलावा खुद लोगों को सफाई को अपनी दिनचर्या का अंग बनाना होगा। साथ ही जो बजट बेवजह लोगों की जेब में जा रहा है, उसे सही ढंग से खर्च किया जाए तो शत-प्रतिशत स्वच्छता पाई जा सकती है।
जिले में 120 तालाबों में से 54 को स्वच्छ बनाने की दिशा में काम शुरू कर दिया गया है। शेष पर भी शीघ्र ही काम शुरू हो जाएगा। सरकार द्वारा जारी निर्देशानुसार इन कामों को पूरा कर लिया जाएगा।
राकेश गोयल, एक्सईएन पंचायती राज, कैथल।
जिले में 36 गांव खुले में शौचमुक्त किए जा चुके हैं। वर्ष 2017 तक सभी गांवों को खुले में शौचमुक्त किए जाने हैं। इस दिशा में काम चल रहा है। निर्धारित लक्ष्य के अनुसार शौचालयों का निर्माण किया जा रहा है।
जितेंद्र कंसल, इंचार्ज, भारत स्वच्छता मिशन, कैथल।