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Kaithal News: जेल की यातनाएं झेली पर अंग्रेजों के आगे झुके नहीं

Tue, 15 Aug 2023 01:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Tue, 15 Aug 2023 01:04 AM IST
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Suffered the tortures of the jail but did not bow down before the British
कुलदीप प्रजापति
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कैथल। गांव कुतुबपुर के एक ही परिवार के दो स्वतंत्रता सेनानी सख्ता सिंह व बख्तावर सिंह ने देश को स्वतंत्र करवाने के लिए पांच से सात साल तक जेलों की सजा काटी है। कई दिन तक खाना भी नसीब नहीं होता था। स्वतंत्रता सेनानी सख्ता सिंह के बेटे शमशेर सिंह ने बताया कि उनके पिता जी आर्य समाजी थे।

उन्होंने हैदराबाद सत्याग्रह आंदोलन में भाग लिया था। यह आंदोलन हैदराबाद में निजाम के खिलाफ चलाया था। इस आंदोलन के दौरान उन्होंने छह माह की नांदेड़ में जेल की सजा भी काटनी पड़ी थी। उन्होंने बताया कि सख्ता सिंह देश की व समाज की लड़ाई लड़ने के लिए सबसे आगे रहते थे। देश आजाद होने के बाद सन 1957 में उन्होंने एक आंदोलन में भाग लिया था। उसमें भी उन्होंने तीन माह की सजा अंबाला में काटनी पड़ी। इस दौरान उन्होंने कई सम्मान भी मिले हैं। सन 1979 में बीमारी के चलते उनकी मौत हो गई थी। संवाद
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ब्रिटिश रॉयल में फूल डाली थी



शमशेर सिंह ने बताया कि उनके चाचा बख्तावर सिंह आजाद हिंद फौज के सैनिक थे। उनका जन्म 1917 में गांव कुतुबपुर में ही हुआ था। उसके बाद वह मात्र 24 साल की उम्र में सन 1941 में ब्रिटिश सेना में भर्ती होकर सिंगापुर में ट्रेनिंग के लिए चले गए थे। वहां पर सुभाष चंद्र बोस के चाचा राज बिहारी बोस मिले। उनके जोशीले भाषण सुनकर उनमें भी देशभक्ति का जज्बा पैदा हो गया। उन्होंने ब्रिटिश रॉयल में फूट डलवाकर उनके हथियार डलवा दिए थे। वहां पर नेताजी के नेतृत्व में आजाद हिंद फौज का गठन हुआ था। उन्होंने कहा कि सिंगापुर से यह लड़ाई शुरू होकर थाईलैंड, बर्मा, हांगकांग होते हुए इम्फाल फ्रंट पर आ गए थे। उसके बाद भी देश को स्वतंत्र करवाने की लड़ाई जारी रही। भर्ती होने के पांच साल बाद घर आए थे। घर आने के बाद वे कुछ दिन बाद ही उनको ब्रिटिश सैनिकों द्वारा बंदी बनाया गया था। वहां से वह 12 साल बाद घर आए। वर्ष 2011 में उनका ज्यूण जग किया गया था। इसके बाद वर्ष 2013 में उनका निधन हो गया।
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