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Kaithal News: पराली जलाना हुआ कम पर प्रदूषण स्तर अभी ‘गंभीर’
Fri, 10 Nov 2023 12:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Fri, 10 Nov 2023 12:15 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिले में वीरवार को हवा की गुणवत्ता फिर से ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंच गई। एक्यूआई 436 दर्ज किया गया। यह बीते रविवार के मुकाबले कम रहा। रविवार को एक्यूआई 470 दर्ज किया गया था। पराली जलाने के मामलों में कमी दर्ज करने के बावजूद प्रदूषण के चलते दिनभर आसमान में बादल छाए रहे और धूप भी मंदम रही। ऐसे हालात में बारिश होने की स्थिति लग रही थी लेकिन वह हुई नहीं।
जिले में वायु प्रदूषण में दिन प्रतिदिन उतार चढ़ाव चल रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, करीब 20 दिनों से वायु प्रदूषण का स्तर 350 से ऊपर चल रहा है। यह बेहद खराब श्रेणी में आता है। बुधवार को एक्यूआई 375, और सोमवार को 369 दर्ज किया गया था। शनिवार को एक्यूआई 405 दर्ज किया गया था। प्रदूषण के गंभीर स्तर को देखते हुए प्रशासन ने पांचवीं तक के स्कूल 10 नवंबर तक बंद करने के आदेश दिए हैं लेकिन कई स्कूलों ने निर्देशों को धता बताते हुए संस्थान खोले।
दूसरी ओर हालात देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने बचाव के लिए हिदायतें जारी कर दी हैं। मास्क लगाने के साथ सुबह की सैर के लिए बाहर निकलने से मना किया गया है। वायु प्रदूषण के बढ़ने से अस्पतालों में सांस, आंख और एलर्जी के मरीज भी बढ़े हैं। कई लोगों ने बताया कि रास्तों में सुबह-शाम दोपहिया वाहनों और पैदल चलने वालों को आंखों में जलन का सामना करना पड़ रहा है।
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उधर, प्रदूषण को कम करने के लिए पेड़-पौधों पर भी पानी का छिड़काव कराया जा रहा है लेकिन इसके बावजूद प्रदूषण में उतार-चढ़ाव लगातार जारी है लेकिन इसका स्तर ‘गंभीर’ बना हुआ है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, शून्य और 50 के बीच एक्यूआई को ‘अच्छा’ माना जाता है, 51 और 100 के बीच ‘संतोषजनक’, 101 और 200 के बीच ‘मध्यम’; 201 और 300 के बीच ‘खराब’, 301 और 400 के बीच ‘बहुत खराब’ और 401 और 500 के बीच ‘गंभीर’ माना जाता है।
उधर, मौसम वैज्ञानिकों ने दो दिन की बारिश होने की संभावना जताई हैं। हालांकि वीरवार को शाम छह बजे तक बारिश नहीं हुई, लेकिन बारिश की स्थिति बनी हुई है। सहायक कृषि अभियंता जगदीश मलिक ने बताया कि फसल अवशेष जलाने के मामले में किसान काफी जागरूक हो चुके है, क्योंकि अब तक फानों में आगजनी को घटनाएं, पिछले साल के मुकाबले में लगभग 65 प्रतिशत कम हुई है, यानि की फसल अवशेष की घटनाओं को कम करने में कैथल जिला पहले नंबर पर है। धान का जिले में कुल रकबा तीन लाख 78 हजार 500 एकड़ है। अब तक धान की कटाई तीन लाख 65 हजार एकड़ की हो चुकी है।
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कैथल। जिले में वीरवार को हवा की गुणवत्ता फिर से ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंच गई। एक्यूआई 436 दर्ज किया गया। यह बीते रविवार के मुकाबले कम रहा। रविवार को एक्यूआई 470 दर्ज किया गया था। पराली जलाने के मामलों में कमी दर्ज करने के बावजूद प्रदूषण के चलते दिनभर आसमान में बादल छाए रहे और धूप भी मंदम रही। ऐसे हालात में बारिश होने की स्थिति लग रही थी लेकिन वह हुई नहीं।
जिले में वायु प्रदूषण में दिन प्रतिदिन उतार चढ़ाव चल रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, करीब 20 दिनों से वायु प्रदूषण का स्तर 350 से ऊपर चल रहा है। यह बेहद खराब श्रेणी में आता है। बुधवार को एक्यूआई 375, और सोमवार को 369 दर्ज किया गया था। शनिवार को एक्यूआई 405 दर्ज किया गया था। प्रदूषण के गंभीर स्तर को देखते हुए प्रशासन ने पांचवीं तक के स्कूल 10 नवंबर तक बंद करने के आदेश दिए हैं लेकिन कई स्कूलों ने निर्देशों को धता बताते हुए संस्थान खोले।
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दूसरी ओर हालात देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने बचाव के लिए हिदायतें जारी कर दी हैं। मास्क लगाने के साथ सुबह की सैर के लिए बाहर निकलने से मना किया गया है। वायु प्रदूषण के बढ़ने से अस्पतालों में सांस, आंख और एलर्जी के मरीज भी बढ़े हैं। कई लोगों ने बताया कि रास्तों में सुबह-शाम दोपहिया वाहनों और पैदल चलने वालों को आंखों में जलन का सामना करना पड़ रहा है।
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उधर, प्रदूषण को कम करने के लिए पेड़-पौधों पर भी पानी का छिड़काव कराया जा रहा है लेकिन इसके बावजूद प्रदूषण में उतार-चढ़ाव लगातार जारी है लेकिन इसका स्तर ‘गंभीर’ बना हुआ है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, शून्य और 50 के बीच एक्यूआई को ‘अच्छा’ माना जाता है, 51 और 100 के बीच ‘संतोषजनक’, 101 और 200 के बीच ‘मध्यम’
उधर, मौसम वैज्ञानिकों ने दो दिन की बारिश होने की संभावना जताई हैं। हालांकि वीरवार को शाम छह बजे तक बारिश नहीं हुई, लेकिन बारिश की स्थिति बनी हुई है। सहायक कृषि अभियंता जगदीश मलिक ने बताया कि फसल अवशेष जलाने के मामले में किसान काफी जागरूक हो चुके है, क्योंकि अब तक फानों में आगजनी को घटनाएं, पिछले साल के मुकाबले में लगभग 65 प्रतिशत कम हुई है, यानि की फसल अवशेष की घटनाओं को कम करने में कैथल जिला पहले नंबर पर है। धान का जिले में कुल रकबा तीन लाख 78 हजार 500 एकड़ है। अब तक धान की कटाई तीन लाख 65 हजार एकड़ की हो चुकी है।