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एसजीपीसी की शक्तियां कम करने की साजिश - मक्कड़

Fri, 04 Jul 2014 12:21 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कैथ्ाल
ब्यूरो/अमर उजाला, कैथ्ाल Updated Fri, 04 Jul 2014 12:21 AM IST
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Sikhs ask for Seprate SGPC
कैथल। हरियाणा में अलग एसजीपीसी बनाने के मुद्दे पर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के अध्यक्ष अवतार सिंह मक्कड़ ने कहा कि हरियाणा के लिए अलग एसजीपीसी का गठन सिखों की संसद शिरोमणि कमेटी की शक्तियां कम करने का षड्यंत्र है। इसे रोकने के लिए कानूनी विशेषज्ञों से राय ली जा रही है।
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इसके साथ जनता से भी सहयोग की अपील है। मक्कड़ ने आरोप लगाया कि हरियाणा सरकार के इशारे पर एसजीपीसी को तोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। यह निंदनीय है। मक्कड़ वीरवार को कैथल के नीम साहिब गुरुद्वारे में छह जुलाई को प्रस्तावित सिख सम्मेलन के विरोध में अकाली दल के प्रदर्शन करने से पहले पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने हरियाणा के सिखों से अपील की कि वे पंथ की एकता बनाए रखने में सहयोग दें।
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इस मौके पर एसजीपीसी के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट रघुजीत सिंह, अकाली दल के प्रदेश अध्यक्ष शरणजीत सिंह सौथा, सुखबीर मांडी, बलदेव सिंह, मनप्रीत कौर, यमुनानगर, अमरजीत कौर, सुखवंत सिंह व अन्य सिख नेता मौजूद थे।
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‘हरियाणा के गुरुद्वारों का पैसा पंजाब नहीं जाता’
मक्कड़ ने कहा कि एसजीपीसी का गठन 1920 में श्री अकाल तख्त साहिब की अरदास के बाद किया गया था। सरकारों से पंथ नहीं चलता, पंथ के लिए कुर्बानियां दी गई हैं। उन्होंने कहा कि झूठा प्रचार किया जा रहा है कि हरियाणा के गुरुद्वारों का पैसा पंजाब जाता है। एसजीपीसी का पूरा बजट एक हजार करोड़ रुपये का है। बजट के ऑडिट से पता चला है कि हरियाणा के गुरुद्वारों से 30 करोड़ आय होती है, जिसमें से 27 करोड़ इनके संचालन पर खर्च हो रहा है। हरियाणा में करोड़ों रुपये की राशि खर्च हो रही है, जिसके लिए एसजीपीसी पैसा दे रहा है।

सरकार ने कई प्रोजेक्टों की एनओसी नहीं दी
मक्कड़ ने आरोप लगाया कि हरियाणा सरकार कई प्रोजेक्टों को पूरा करने के लिए एनओसी जारी नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि जितने भी सिख संबंधी नोटिफिकेशन जारी हुए हैं, सभी केंद्र सरकार ने जारी किए हैं। ऐसे में केवल प्रदेश सरकार एचएसजीपीसी के गठन का फैसला नहीं ले सकती।

हरियाणा में भी सिखों के लिए काम कर रही एसजीपीसी
दिल्ली और हिमाचल में अलग कमेटी होने और हरियाणा की कमेटी का विरोध करने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि पुराने पंजाब के क्षेत्र में गुरुद्वारों की देखरेख के लिए एसजीपीसी का गठन हुआ है। दिल्ली में 1974 में हजारों सिखों द्वारा गिरफ्तारी के बाद अलग कमेटी का गठन हुआ था, जबकि हिमाचल की कमेटी में एक सदस्य एसजीपीसी से है। पूरे विश्व में सिखों के साथ कहीं भी ज्यादती होती है, तो वह एसजीपीसी की ओर देखता है।


 एसजीपीसी ही सिखों के कल्याण के लिए काम कर रही है। पिहोवा के गांव कराह साहिब में सरकार द्वारा पट्टे के विवाद के कारण बिजली, पानी सब बंद कर दिया गया है। यहां 117 परिवारों के लिए चार जनरेटर, पानी के टैंकर, घर चलाने के लिए राशन एसजीपीसी द्वारा दिया जा रहा है, जबकि हरियाणा के वित्तमंत्री इसी हलके से हैं।

‘झींडा कह रहे हैं उन्हें फुर्सत नहीं’
मक्कड़ ने झींडा के अकाल तख्त के सामने पेश न होने पर कहा, ‘झींडा साहब अकाल तख्त के बुलावे पर कह रहे हैं कि उन्हें अभी वहां जाने की फुर्सत नहीं है।’
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