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Kaithal News: शिव का अपमान देख सती ने यज्ञ में किया था आत्मदाह
Wed, 16 Jul 2025 01:08 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Wed, 16 Jul 2025 01:08 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। हनुमान वाटिका स्थित शिव मंदिर में सावन माह के उपलक्ष्य में आयोजित शिव महापुराण की कथा मंगलवार को चौथे दिन भी जारी रही। कथा के चौथे दिन भी शहर से काफी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया। मंगलवार को कथा में वाटिका के मुख्य पुजारी पंडित विशाल शर्मा ने शिव विवाह का प्रसंग सुनाया। इस मौके पर पंडित विशाल शर्मा ने बताया कि शिव महापुराण में शिव विवाह का प्रसंग भावनात्मक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
भगवान शिव की पहली पत्नी सती थीं, जो प्रजापति दक्ष की पुत्री थीं। दक्ष ने शिव का अपमान किया और सती ने उसके यज्ञ में जाकर आत्मदाह कर लिया। सती की मृत्यु के बाद शिव अत्यंत शोकग्रस्त हो गए और स्मशानवास करने लगे। सती ने पुनः हिमालय और मैना देवी के घर पार्वती के रूप में जन्म लिया। पार्वती बचपन से ही शिव की भक्ति करने लगीं और उन्हें अपने पति रूप में पाने के लिए घोर तपस्या की।
देवताओं ने शिव को विवाह के लिए प्रेरित करने हेतु कामदेव को भेजा। शिव ध्यान में लीन थे, कामदेव ने शिव को मोहाविष्ट करने की कोशिश की। शिव ने क्रोधित होकर कामदेव को भस्म कर दिया। माता पार्वती ने वर्षों तक कठोर तपस्या की।
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शिव ने माता पार्वती की भक्ति की परीक्षा लेने के लिए वृद्ध ब्राह्मण का रूप धारण किया और स्वयं को ही बुरा-भला कहने लगे। पार्वती ने उनका विरोध किया और निश्चयपूर्वक कहा कि वह शिव से ही विवाह करेंगी। इससे प्रसन्न होकर शिव ने अपना रूप प्रकट किया और विवाह को स्वीकार किया। शिव गणों, भूत-प्रेत, पिशाचों, और देवताओं के साथ बारात लेकर आए। पार्वती का विवाह विधिवत मंत्रों के साथ भगवान शिव से संपन्न हुआ।
इस मौके पर बलवंत, रिंकू, लक्की, बोती, धन्नो देवी, योगेश, कमला, नरेश, प्रवीन, सुरेश, रमेश, अनिल, धर्मेंद्र आदि मौजूद रहे।
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कैथल। हनुमान वाटिका स्थित शिव मंदिर में सावन माह के उपलक्ष्य में आयोजित शिव महापुराण की कथा मंगलवार को चौथे दिन भी जारी रही। कथा के चौथे दिन भी शहर से काफी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया। मंगलवार को कथा में वाटिका के मुख्य पुजारी पंडित विशाल शर्मा ने शिव विवाह का प्रसंग सुनाया। इस मौके पर पंडित विशाल शर्मा ने बताया कि शिव महापुराण में शिव विवाह का प्रसंग भावनात्मक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
भगवान शिव की पहली पत्नी सती थीं, जो प्रजापति दक्ष की पुत्री थीं। दक्ष ने शिव का अपमान किया और सती ने उसके यज्ञ में जाकर आत्मदाह कर लिया। सती की मृत्यु के बाद शिव अत्यंत शोकग्रस्त हो गए और स्मशानवास करने लगे। सती ने पुनः हिमालय और मैना देवी के घर पार्वती के रूप में जन्म लिया। पार्वती बचपन से ही शिव की भक्ति करने लगीं और उन्हें अपने पति रूप में पाने के लिए घोर तपस्या की।
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देवताओं ने शिव को विवाह के लिए प्रेरित करने हेतु कामदेव को भेजा। शिव ध्यान में लीन थे, कामदेव ने शिव को मोहाविष्ट करने की कोशिश की। शिव ने क्रोधित होकर कामदेव को भस्म कर दिया। माता पार्वती ने वर्षों तक कठोर तपस्या की।
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शिव ने माता पार्वती की भक्ति की परीक्षा लेने के लिए वृद्ध ब्राह्मण का रूप धारण किया और स्वयं को ही बुरा-भला कहने लगे। पार्वती ने उनका विरोध किया और निश्चयपूर्वक कहा कि वह शिव से ही विवाह करेंगी। इससे प्रसन्न होकर शिव ने अपना रूप प्रकट किया और विवाह को स्वीकार किया। शिव गणों, भूत-प्रेत, पिशाचों, और देवताओं के साथ बारात लेकर आए। पार्वती का विवाह विधिवत मंत्रों के साथ भगवान शिव से संपन्न हुआ।
इस मौके पर बलवंत, रिंकू, लक्की, बोती, धन्नो देवी, योगेश, कमला, नरेश, प्रवीन, सुरेश, रमेश, अनिल, धर्मेंद्र आदि मौजूद रहे।