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Hindi News ›   Haryana ›   Kaithal News ›   School's Office, classes held in just one room

एक ही कमरे में क्लास, ऑफिस और किचन

Fri, 03 Jul 2015 12:11 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/कैथल
अमर उजाला ब्यूरो/कैथल Updated Fri, 03 Jul 2015 12:11 AM IST
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कैथल। शहर में स्थित सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति की ओर सरकार ध्यान नहीं दे रही है। आजादी के बाद से इन स्कूलों को एक या दो कमरों में चलाया जा रहा है।
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 बच्चों के पास न बैठने को कमरे, ना पीने को पानी और ना ही शौचालय की सुविधा। शहर के लोगों सहित अध्यापक संगठनों द्वारा की जा रही मांग के बावजूद इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। शहर में प्रताप गेट स्थित स्कूल नंबर 3 व 5 तथा सीवन गेट स्थित राजकीय प्राथमिक पाठशाला में बदहाल स्थिति के चलते बच्चे मजबूरी में कक्षाएं लगा रहे हैं।
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प्रताप गेट में राजकीय प्राथमिक पाठशाला-3 व 5 में छोटे बच्चों को गर्मी में बाहर बैठकर ही पढ़ाई करनी पड़ती है। कमरों में इतना सामान भरा हुआ है कि बच्चो के पास बैठने तक की जगह नहीं है। विभाग ने फर्नीचर भेजा है, लेकिन स्कूल में उसे रखने के लिए जगह नहीं है।
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 बच्चों के पीने के लिए 500 लीटर की दो बड़ी टंकी हैं, जो खाली रहती हैं। इस वजह पानी की किल्लत रहती है। अध्यापकों द्वारा कैंपर का प्रबंध करके बच्चों को पानी पिलाया जा रहा है। शौचालय के लेंटर के टुकड़े गिरते रहते हैं। यह स्कूल भवन 55 साल से किराये पर चल रहा है।

यही हालत सीवन गेट राजकीय प्राथमिक पाठशाला की है। बैठने के लिए ही जगह नहीं है। अधिकतर कमरों में सामान रखा गया है। पीने के पानी के लिए टंकी रखी गई। उसका पानी दोपहर तक गर्म हो जाता है। स्कूल की इमारत जर्जर है। शौचालय खस्ता हालत में है। बार-बार मांग के बावजूद ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

अध्यापक संघ कर चुका है नए भवनों की मांग
अध्यापक संघ के जिला अध्यक्ष सतबीर गोयत का कहना है कि अध्यापक संघ द्वारा शहर की नई बस्तियों में नए स्कूल खुलवाने एवं इन स्कूलों के लिए भवन की व्यवस्था की मांग की जा चुकी है। पूर्व मंत्री रणदीप सुरजेवाला से भी मिले थे, वहीं अधिकारियों को कई बार शिकायत की जा चुकी है। लेकिन न तो शिक्षा विभाग और ही सरकार ने इस ओर ध्यान दिया है।


प्रस्ताव बनाकर भेजा है, जैसे ही मंजूरी मिलेगी, इनके लिए भवन की व्यवस्था की जाएगी। यह सही है कि इन स्कूलों में बच्चों के बैठने की परेशानी है। एक स्कूल 55 साल से किराये पर चल रहा है। इस बारे में अधिकारियों को रिमाइंडर भेजा जाएगा। इसके अलावा इन स्कूलों के लिए किराये की ऐसा भवन ढूंढने का भी प्रयास किया जा रहा है। जहां बच्चों को कम से कम बैठने के लिए उचित जगह मिल जाए।
-शमशेर सिरोही, उप-जिला शिक्षा अधिकारी।
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