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स्कूलों में दस प्रतिशत पहुंचे बच्चे, कोरोना टेस्ट की फीस से अध्यापकों में रोष
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school open
- फोटो : Kaithal
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कोरोना संकट के बीच सोमवार से खुले स्कूलों में अध्यापकों के साथ पढ़ाई को लेकर विचार-विमर्श करने के लिए दस प्रतिशत बच्चे ही पहुंचे। जहां पर हैंड सैनिटाइजर और मास्क के बाद स्कूल में अनुमित मिली। वहीं अध्यापकों में कोरोना टेस्ट के लिए 650 रुपये की फीस निर्धारित किए जाने के कारण रोष है और कई अध्यापकों ने कोरोना टेस्ट ही नहीं करवाया। कई स्कूलों में स्वास्थ्य विभाग की टीम कोरोना टेस्ट के लिए भी पहुंची।
शहर के गीता भवन स्थित कन्या स्कूल में 5-6 बच्चे अपने अभिभावकों के साथ पहुंचे। यहां हैंड सेनिटाइजर की व्यवस्था भी की हुई थी। करीब 20 स्टाफ सदस्यों ने कोरोना टेस्ट करवाया है। प्रिंसिपल सतपाल ने बताया कि स्कूल में नॉन टीचिंग व टीचिंग का कुल 60 सदस्यों का स्टाफ है। जिनमें दो दिन पहले 13 सदस्यों ने कोरोना टेस्ट करवाया जो कि निशुल्क हुआ। इसके बाद पांच सदस्यों ने टेस्ट सदस्यों ने टेस्ट करवाया तो उनसे 650 रुपये की राशि ली गई।
गांव शेरगढ़ में स्थित राजकीय स्कूल के प्रिंसिपल जगदीश ढुल ने बताया कि स्कूल के बाहर की स्टाफ सदस्यों की ड्यूटी लगाई गई। बच्चों के हैंड सैनिटाइजर करवाए जा रहे है। जो भी बच्चा स्कूल आ रहा है उनका रजिस्टर में रिकॉर्ड दर्ज किया जा रहा। उन्होंने कहा कि अभी तक किसी भी स्टाफ सदस्यों का कोरोना टेस्ट नहीं हुआ है।
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जाखौली अड्डा कन्या स्कूल के प्रिंसिपल पवन गर्ग ने बताया कि करीब 40 सदस्यों ने कोरोना टेस्ट करवाया। जिनकी रिपोर्ट नेगेटिव आई। इसके साथ जिले के ग्रामीण क्षेत्र में स्थिति बदतर रही। बच्चे बिना मास्क के स्कूलों में पहुंचे। स्टाफ सदस्यों ने भी कोरोना टेस्ट नहीं करवाया। अब ऐेसे में सवाल ये कि आखिर किस तरह से कोरोनो पर काबू पा सकेंगे।
60 फीसदी हामी के बाद भी स्कूल नहीं पहुंचे बच्चे-कोरोना काल में छह महीने से बंद स्कूलों में बच्चों के प्रवेश पर विभाग ने अनुमति दे दी है। लेकिन पहले ही दिन जिलेभर से दस प्रतिशत ही बच्चे स्कूलों में पहुंचे।
चार्ज के बाद अध्यापक नहीं करवा रहे कोरोना टेस्ट- जैसे ही स्कूल खुलने को लेकर आदेश जारी हुए तो कोरोना जांच के लिए 650 रुपये शुल्क निर्धारित किए गए। इसके बाद अब स्कूल प्रबंधन स्वास्थ्य की जांच की कोरोना जांच नहीं करवा रहे।
सभी खंड शिक्षा अधिकारी की लगाई ड्यूटी-डीईओ शमशेर सिंह सिरोही ने बताया कि स्कूल खुलने के बाद से ही जिले के सभी बीईओ, बीआरसी की ड्यूटी लगाई गई है। संबंधित स्कूल में विजिट कर प्रतिदिन विभाग को रिपोर्ट सौंपे। किस स्कूल में कितने बच्चे पहुंचे ओर वहां की क्या व्यवस्था है।
जब तक वेक्सीन नहीं आ जाती बंद रहें स्कूल- हरियाणा अध्यापक संघ के राज्य सचिव मास्टर सतबीर गोयत का कहना है कोविड-19 के अंदर फिलहाल स्कूल में बच्चे बुलाना सही नहीं है। जिस तरह से सरकार कोविड-19 में चालान का बहाना बनाकर कमाई का जरिया बनाया रही है। उसी प्रकार देश व प्रदेश में लाखों की संख्या में अध्यापक हैं, उनसे कोरोना टेस्ट के नाम पर फीस वसूली जा रही है। उन्होंने बताया कि जब तक सही तरीके से इस बीमारी की वेक्सीन नहीं आ जाती तब तक खुल बंद रहे तो अच्छा है।
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शहर के गीता भवन स्थित कन्या स्कूल में 5-6 बच्चे अपने अभिभावकों के साथ पहुंचे। यहां हैंड सेनिटाइजर की व्यवस्था भी की हुई थी। करीब 20 स्टाफ सदस्यों ने कोरोना टेस्ट करवाया है। प्रिंसिपल सतपाल ने बताया कि स्कूल में नॉन टीचिंग व टीचिंग का कुल 60 सदस्यों का स्टाफ है। जिनमें दो दिन पहले 13 सदस्यों ने कोरोना टेस्ट करवाया जो कि निशुल्क हुआ। इसके बाद पांच सदस्यों ने टेस्ट सदस्यों ने टेस्ट करवाया तो उनसे 650 रुपये की राशि ली गई।
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गांव शेरगढ़ में स्थित राजकीय स्कूल के प्रिंसिपल जगदीश ढुल ने बताया कि स्कूल के बाहर की स्टाफ सदस्यों की ड्यूटी लगाई गई। बच्चों के हैंड सैनिटाइजर करवाए जा रहे है। जो भी बच्चा स्कूल आ रहा है उनका रजिस्टर में रिकॉर्ड दर्ज किया जा रहा। उन्होंने कहा कि अभी तक किसी भी स्टाफ सदस्यों का कोरोना टेस्ट नहीं हुआ है।
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जाखौली अड्डा कन्या स्कूल के प्रिंसिपल पवन गर्ग ने बताया कि करीब 40 सदस्यों ने कोरोना टेस्ट करवाया। जिनकी रिपोर्ट नेगेटिव आई। इसके साथ जिले के ग्रामीण क्षेत्र में स्थिति बदतर रही। बच्चे बिना मास्क के स्कूलों में पहुंचे। स्टाफ सदस्यों ने भी कोरोना टेस्ट नहीं करवाया। अब ऐेसे में सवाल ये कि आखिर किस तरह से कोरोनो पर काबू पा सकेंगे।
60 फीसदी हामी के बाद भी स्कूल नहीं पहुंचे बच्चे-कोरोना काल में छह महीने से बंद स्कूलों में बच्चों के प्रवेश पर विभाग ने अनुमति दे दी है। लेकिन पहले ही दिन जिलेभर से दस प्रतिशत ही बच्चे स्कूलों में पहुंचे।
चार्ज के बाद अध्यापक नहीं करवा रहे कोरोना टेस्ट- जैसे ही स्कूल खुलने को लेकर आदेश जारी हुए तो कोरोना जांच के लिए 650 रुपये शुल्क निर्धारित किए गए। इसके बाद अब स्कूल प्रबंधन स्वास्थ्य की जांच की कोरोना जांच नहीं करवा रहे।
सभी खंड शिक्षा अधिकारी की लगाई ड्यूटी-डीईओ शमशेर सिंह सिरोही ने बताया कि स्कूल खुलने के बाद से ही जिले के सभी बीईओ, बीआरसी की ड्यूटी लगाई गई है। संबंधित स्कूल में विजिट कर प्रतिदिन विभाग को रिपोर्ट सौंपे। किस स्कूल में कितने बच्चे पहुंचे ओर वहां की क्या व्यवस्था है।
जब तक वेक्सीन नहीं आ जाती बंद रहें स्कूल- हरियाणा अध्यापक संघ के राज्य सचिव मास्टर सतबीर गोयत का कहना है कोविड-19 के अंदर फिलहाल स्कूल में बच्चे बुलाना सही नहीं है। जिस तरह से सरकार कोविड-19 में चालान का बहाना बनाकर कमाई का जरिया बनाया रही है। उसी प्रकार देश व प्रदेश में लाखों की संख्या में अध्यापक हैं, उनसे कोरोना टेस्ट के नाम पर फीस वसूली जा रही है। उन्होंने बताया कि जब तक सही तरीके से इस बीमारी की वेक्सीन नहीं आ जाती तब तक खुल बंद रहे तो अच्छा है।