{"_id":"5eb592e38ebc3e90322f2ab3","slug":"sceme-is-very-good-but-first-give-right-rate-kaithal-news-knl303722175","type":"story","status":"publish","title_hn":"ेरा पानी मेरी विरासत पर बोले किसान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ेरा पानी मेरी विरासत पर बोले किसान
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कैथल। मेरा पानी मेरी विरासत मुहीम के तहत किसानों ने सरकार के पानी बचाने व फसल चक्र तोड़ने के प्रयास को बेहतर बताया। लेकिन धान की फसल के बराबर अन्य फसलों के रेट न मिलने व क्षेत्र में अन्य फसलों को न होना बताया। इससे जो किसान ठेके पर खेत लेकर फसल उगाता है, उसके लिए समस्या है।
किसान रामदिया पूनिया देवीगढ़ ने कहा कि धान के बगैर किसान का ठेका भी पूरा नहीं होगा। आज के समय में 50 हजार रुपये प्रति किल्ला ठेके पर मिल रहा है। सरकार द्वारा धान की बुआई न करने पर केवल सात हजार का प्रोत्साहन से कुछ नहीं होगा। क्योंकि किसान आज के समय में कर्जबंद होता जा रहा है।
किसान जगरूप धौंस ने कहा कि मेरा पानी मेरी विरासत के तहत सरकार द्वारा पानी बचाने का तरीका तो ठीक है। लेकिन किसान का कर्ज केवल 7 हजार में नहीं उतरता। ठेके पर जमीन लेकर फसल की बुआई करके कर्जा भी पूरा नहीं हो पाता। धान की फसल के अलाव क्षेत्र में दूसरी फसल होती भी नहीं।
विज्ञापन
पट्टी खोत गामड़ी के किसान रोशन लाल ने कहा कि किसानों को सात हजार नहीं बल्कि उसकी फसल समय में जितनी भी दवाई, स्प्रे, खाद्य का खर्च होता है, उसके हिसाब से पैसे देने चाहिए। खाद्य व बीज के रेट प्रतिदिन बढ़ते जा रहें हैं। यह राशि बहुत कम है।
केशा राम प्यौदा ने कहा कि आज किसानों का विश्वास सरकार से उठ गया है। क्योंकि सरकार ने गेंहू की पहली परचेज के पैसे किसान का अभी तक नहीं दिए। जबकि सरकार द्वारा 72 घंटे के अंदर फसल के पैसे डालने की बात कही गई थी।
विज्ञापन
किसान रामदिया पूनिया देवीगढ़ ने कहा कि धान के बगैर किसान का ठेका भी पूरा नहीं होगा। आज के समय में 50 हजार रुपये प्रति किल्ला ठेके पर मिल रहा है। सरकार द्वारा धान की बुआई न करने पर केवल सात हजार का प्रोत्साहन से कुछ नहीं होगा। क्योंकि किसान आज के समय में कर्जबंद होता जा रहा है।
विज्ञापन
किसान जगरूप धौंस ने कहा कि मेरा पानी मेरी विरासत के तहत सरकार द्वारा पानी बचाने का तरीका तो ठीक है। लेकिन किसान का कर्ज केवल 7 हजार में नहीं उतरता। ठेके पर जमीन लेकर फसल की बुआई करके कर्जा भी पूरा नहीं हो पाता। धान की फसल के अलाव क्षेत्र में दूसरी फसल होती भी नहीं।
विज्ञापन
पट्टी खोत गामड़ी के किसान रोशन लाल ने कहा कि किसानों को सात हजार नहीं बल्कि उसकी फसल समय में जितनी भी दवाई, स्प्रे, खाद्य का खर्च होता है, उसके हिसाब से पैसे देने चाहिए। खाद्य व बीज के रेट प्रतिदिन बढ़ते जा रहें हैं। यह राशि बहुत कम है।
केशा राम प्यौदा ने कहा कि आज किसानों का विश्वास सरकार से उठ गया है। क्योंकि सरकार ने गेंहू की पहली परचेज के पैसे किसान का अभी तक नहीं दिए। जबकि सरकार द्वारा 72 घंटे के अंदर फसल के पैसे डालने की बात कही गई थी।