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सरस्वती यात्रा का किया गया भव्य स्वागत
ब्यूरो कैथल
Updated Tue, 31 Jan 2017 11:55 PM IST
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एसडीएम के नेतृत्व में अधिकारियों ने किया स्वागत
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड द्वारा आदिबद्री से सिरसा तक चली सरस्वती यात्रा का कैथल पहुंचने पर सूरजकुंड सूर्य मंदिर पर भव्य स्वागत किया गया। जिला प्रशासन की ओर से एसडीएम मनदीप कौर, कार्यकारी अभियंता धर्मपाल सहित भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता अरूण सर्राफ, रामपाल राणा, शकुंतला वजीरखेड़ा, राज रमन दीक्षित ने गर्म जोशी के साथ इस यात्रा के सदस्यों को फूलों की माला पहनाकर स्वागत किया।
एसडीएम के साथ हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के सदस्य एमआर राव, पदमावती ने सूर्य मंदिर में मां सरस्वती के चित्र के सामने दीप प्रज्ज्वलित कर वंदना की। एसडीएम ने कहा कि भौगोलिक, वैज्ञानिक व ऐतिहासिक दृष्टि से यह प्रमाणित हो चुका है कि सरस्वती नदी की धारा वर्तमान में भी धरातल के नीचे बह रही है। इस धारा का प्रदेश के लिए महत्व है, इसलिए इसे दोबारा पुनर्जीवित करने का प्रयास किया जा रहा है। यात्रा का उद्देश्य सरस्वती को धरातल पर लाकर लोगों में जन चेतना का संचार करना है। सरस्वती दुनिया की सबसे प्राचीन सभ्यताओं में से एक है। इसके किनारे पर ही वेदों की रचना की गई। भारतीय सभ्यता और संस्कृति में वेदों का अतीत काल से ही विशेष महत्व रहा है। सरस्वती को विश्व ज्ञान के हब के रूप में जाना जाता है। इस मौके पर आदिबद्री से विशेष रूप से लाया गया सरस्वती जल का आचमन भी करवाया गया।
हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के सदस्य प्रसिद्ध वैज्ञानिक व शोधकर्ता एमआर राव ने कहा कि सरस्वती ज्ञान की देवी है। इस सरस्वती की भारत के साथ-साथ विदेशों में भी अलग पहचान है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने अपने प्रयासों से इस पवित्र नदी को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया जा रहा है। यह सभ्यता 7 हजार वर्ष पुरानी है। इसके उपरांत यह सरस्वती विकास यात्रा कलायत के लिए रवाना हुई। इस अवसर पर अभियंता एके पाहवा, अरविंद कौशिक, सुरेश गुलशन, अमर राविश, सतपाल गुप्ता, प्रवीण शर्मा, ओपी गर्ग, सूबे सिंह राविश, प्रशिक्षु एचसीएस मंदीप कुमार व संयम गर्ग मौजूद रहे।
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एसडीएम के साथ हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के सदस्य एमआर राव, पदमावती ने सूर्य मंदिर में मां सरस्वती के चित्र के सामने दीप प्रज्ज्वलित कर वंदना की। एसडीएम ने कहा कि भौगोलिक, वैज्ञानिक व ऐतिहासिक दृष्टि से यह प्रमाणित हो चुका है कि सरस्वती नदी की धारा वर्तमान में भी धरातल के नीचे बह रही है। इस धारा का प्रदेश के लिए महत्व है, इसलिए इसे दोबारा पुनर्जीवित करने का प्रयास किया जा रहा है। यात्रा का उद्देश्य सरस्वती को धरातल पर लाकर लोगों में जन चेतना का संचार करना है। सरस्वती दुनिया की सबसे प्राचीन सभ्यताओं में से एक है। इसके किनारे पर ही वेदों की रचना की गई। भारतीय सभ्यता और संस्कृति में वेदों का अतीत काल से ही विशेष महत्व रहा है। सरस्वती को विश्व ज्ञान के हब के रूप में जाना जाता है। इस मौके पर आदिबद्री से विशेष रूप से लाया गया सरस्वती जल का आचमन भी करवाया गया।
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हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के सदस्य प्रसिद्ध वैज्ञानिक व शोधकर्ता एमआर राव ने कहा कि सरस्वती ज्ञान की देवी है। इस सरस्वती की भारत के साथ-साथ विदेशों में भी अलग पहचान है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने अपने प्रयासों से इस पवित्र नदी को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया जा रहा है। यह सभ्यता 7 हजार वर्ष पुरानी है। इसके उपरांत यह सरस्वती विकास यात्रा कलायत के लिए रवाना हुई। इस अवसर पर अभियंता एके पाहवा, अरविंद कौशिक, सुरेश गुलशन, अमर राविश, सतपाल गुप्ता, प्रवीण शर्मा, ओपी गर्ग, सूबे सिंह राविश, प्रशिक्षु एचसीएस मंदीप कुमार व संयम गर्ग मौजूद रहे।
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