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Kaithal News: किमी के हिसाब से तैनात होंगे सफाई कर्मी, जीपीएस से होगा शहर का सर्वे
Sun, 11 Jan 2026 12:41 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sun, 11 Jan 2026 12:41 AM IST
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शहर के हर एरिया का सर्वे होगा। करनाल रोड से गुजरते वाहन। संवाद
नरेंद्र पंडित
कैथल। शहर की सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए नगर परिषद ने नई पहल की है। अब शहर में सफाई कर्मचारियों की तैनाती किलोमीटर एरिया के आधार पर की जाएगी। इसके लिए नगर परिषद की ओर से जीपीएस (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) के माध्यम से शहर का सर्वे कराया जाएगा।
सर्वे एजेंसी शहर के विभिन्न क्षेत्रों की किमी लंबाई, क्षेत्रफल और अन्य तकनीकी मापदंडों का आकलन कर रिपोर्ट नगर परिषद को सौंपेगी। इसके बाद परिषद की ओर से जनसंख्या और क्षेत्रफल में सामंजस्य बैठाते हुए सफाई कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी। यदि सर्वे रिपोर्ट में यह सामने आता है कि शहर का क्षेत्र वर्तमान कर्मचारियों की संख्या के मुकाबले अधिक है, तो सफाई कर्मचारियों का नया एस्टीमेट बनाकर अतिरिक्त कर्मचारियों की भर्ती की जाएगी।
नगर परिषद की ओर से एजेंसी का टेंडर प्रक्रिया पूरी कर वर्क ऑर्डर जारी कर दिया गया है। जल्द ही शहर में सर्वे का कार्य शुरू किया जाएगा। एजेंसी को सर्वे कार्य का भुगतान स्क्वायर फीट के आधार पर किया जाएगा। इस नई व्यवस्था में जनसंख्या के साथ-साथ शहरी क्षेत्रफल को भी ध्यान में रखा जाएगा, ताकि शहर के प्रत्येक हिस्से में पर्याप्त सफाई सुनिश्चित हो सके। इसका उद्देश्य सफाई व्यवस्था को पारदर्शी बनाना और कर्मचारियों पर काम का असमान बोझ कम करना है।
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करोड़ों खर्च के बाद भी व्यवस्था लचर
नगर परिषद के अधीन शहर में कुल 31 वार्ड हैं। शहर की सफाई व्यवस्था पर प्रतिवर्ष करीब 21 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसमें नगर परिषद के कच्चे-पक्के सफाई कर्मचारियों पर लगभग 11.5 करोड़ रुपये, डोर-टू-डोर कूड़ा उठान पर करीब 9 करोड़ रुपये, रोड स्वीपिंग पर 56 लाख रुपये समेत अन्य मद शामिल हैं।
इसके बावजूद शहर की सफाई व्यवस्था संतोषजनक नहीं है। शिक्षण संस्थानों के बाहर, वार्डों, बाजारों और सड़कों पर जगह-जगह कूड़े के ढेर देखे जा सकते हैं। स्वच्छता रैंकिंग में भी कैथल नगर परिषद लगातार पिछड़ रहा है। हालांकि इस नई योजना से शहर की सफाई व्यवस्था में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
ये होंगे बदलाव के मुख्य बिंदु
सफाई कर्मचारियों की तैनाती अब जनसंख्या के साथ-साथ शहरी क्षेत्र (वर्ग किलोमीटर) के आधार पर होगी।
प्रत्येक कर्मचारी को एक निश्चित क्षेत्र और आबादी आवंटित की जाएगी।
स्वच्छ भारत अभियान के तहत व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जाएगा।
हर वार्ड में सफाई कर्मचारियों की सूची चस्पा की जाएगी, जिससे जवाबदेही तय होगी।
इसलिए किया जा रहा है बदलाव
शहर की आबादी और क्षेत्रफल बढ़ने से पुराने मानकों के अनुसार कर्मचारियों की संख्या अपर्याप्त हो गई है।
निश्चित क्षेत्र के हिसाब से तैनाती से कार्य का संतुलित वितरण होगा।
किसी एक कर्मचारी पर अत्यधिक कार्यभार नहीं पड़ेगा।
शहर को और स्वच्छ बनाना है : डीएमसी
जिला नगर आयुक्त कपिल शर्मा ने बताया कि शहर में अब किमी और आबादी के आधार पर सफाई कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी। इसके लिए सर्वे एजेंसी को वर्क ऑर्डर जारी किया जा चुका है। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य शहर को और अधिक स्वच्छ बनाना और सफाई व्यवस्था को बेहतर करना है।
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कैथल। शहर की सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए नगर परिषद ने नई पहल की है। अब शहर में सफाई कर्मचारियों की तैनाती किलोमीटर एरिया के आधार पर की जाएगी। इसके लिए नगर परिषद की ओर से जीपीएस (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) के माध्यम से शहर का सर्वे कराया जाएगा।
सर्वे एजेंसी शहर के विभिन्न क्षेत्रों की किमी लंबाई, क्षेत्रफल और अन्य तकनीकी मापदंडों का आकलन कर रिपोर्ट नगर परिषद को सौंपेगी। इसके बाद परिषद की ओर से जनसंख्या और क्षेत्रफल में सामंजस्य बैठाते हुए सफाई कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी। यदि सर्वे रिपोर्ट में यह सामने आता है कि शहर का क्षेत्र वर्तमान कर्मचारियों की संख्या के मुकाबले अधिक है, तो सफाई कर्मचारियों का नया एस्टीमेट बनाकर अतिरिक्त कर्मचारियों की भर्ती की जाएगी।
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नगर परिषद की ओर से एजेंसी का टेंडर प्रक्रिया पूरी कर वर्क ऑर्डर जारी कर दिया गया है। जल्द ही शहर में सर्वे का कार्य शुरू किया जाएगा। एजेंसी को सर्वे कार्य का भुगतान स्क्वायर फीट के आधार पर किया जाएगा। इस नई व्यवस्था में जनसंख्या के साथ-साथ शहरी क्षेत्रफल को भी ध्यान में रखा जाएगा, ताकि शहर के प्रत्येक हिस्से में पर्याप्त सफाई सुनिश्चित हो सके। इसका उद्देश्य सफाई व्यवस्था को पारदर्शी बनाना और कर्मचारियों पर काम का असमान बोझ कम करना है।
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करोड़ों खर्च के बाद भी व्यवस्था लचर
नगर परिषद के अधीन शहर में कुल 31 वार्ड हैं। शहर की सफाई व्यवस्था पर प्रतिवर्ष करीब 21 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसमें नगर परिषद के कच्चे-पक्के सफाई कर्मचारियों पर लगभग 11.5 करोड़ रुपये, डोर-टू-डोर कूड़ा उठान पर करीब 9 करोड़ रुपये, रोड स्वीपिंग पर 56 लाख रुपये समेत अन्य मद शामिल हैं।
इसके बावजूद शहर की सफाई व्यवस्था संतोषजनक नहीं है। शिक्षण संस्थानों के बाहर, वार्डों, बाजारों और सड़कों पर जगह-जगह कूड़े के ढेर देखे जा सकते हैं। स्वच्छता रैंकिंग में भी कैथल नगर परिषद लगातार पिछड़ रहा है। हालांकि इस नई योजना से शहर की सफाई व्यवस्था में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
ये होंगे बदलाव के मुख्य बिंदु
सफाई कर्मचारियों की तैनाती अब जनसंख्या के साथ-साथ शहरी क्षेत्र (वर्ग किलोमीटर) के आधार पर होगी।
प्रत्येक कर्मचारी को एक निश्चित क्षेत्र और आबादी आवंटित की जाएगी।
स्वच्छ भारत अभियान के तहत व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जाएगा।
हर वार्ड में सफाई कर्मचारियों की सूची चस्पा की जाएगी, जिससे जवाबदेही तय होगी।
इसलिए किया जा रहा है बदलाव
शहर की आबादी और क्षेत्रफल बढ़ने से पुराने मानकों के अनुसार कर्मचारियों की संख्या अपर्याप्त हो गई है।
निश्चित क्षेत्र के हिसाब से तैनाती से कार्य का संतुलित वितरण होगा।
किसी एक कर्मचारी पर अत्यधिक कार्यभार नहीं पड़ेगा।
शहर को और स्वच्छ बनाना है : डीएमसी
जिला नगर आयुक्त कपिल शर्मा ने बताया कि शहर में अब किमी और आबादी के आधार पर सफाई कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी। इसके लिए सर्वे एजेंसी को वर्क ऑर्डर जारी किया जा चुका है। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य शहर को और अधिक स्वच्छ बनाना और सफाई व्यवस्था को बेहतर करना है।