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चाहे हमें अस्थाई परमिट दे दो..या फिर हमारी लागत देकर बसें ले लो सरकार.
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roadways bus
- फोटो : Kaithal
किलोमीटर स्कीम के तहत सरकार ने जिन 400 बस मालिकों के साथ एग्रीमेंट किया था। उन बसों के मालिकों को एक साल में करोड़ों रुपये का नुकसान हो चुका है। अब सरकार ने उनके एग्रीमेंट को भी रद्द करके उनके 34.30 रुपये प्रति किलोमीटर की दर की बजाए 26 रुपये 92 पैसे की दर से बसें चलाने का ऑफर दे रही है। जबकि इस कीमत पर उन्हें प्रति किलोमीटर तीन रुपये का नुकसान हो रहा है। जिस कारण उनका कहना है कि वे दस साल के इस एग्रीमेंट में यदि तीन रुपये प्रति किलोमीटर नुकसान उठाएंगे तो वे कैसे अपनी रोजी-रोटी चलाएंगे।
द हरियाणा को-आपरेटिव सोसाइटी वेल्फेयर संघ के पूर्व अध्यक्ष एवं कैथल में इन बसों में से 15 बसों का एग्रीमेंट करने वाले वीरेंद्र सिंह सांगवान, जसमेर ढांडा, वीरेंद्र गोयत, अनिल ढुल ने कहा कि सरकार ने वर्ष 2018 में किलोमीटर स्कीम के तहत 700 बसें चलाने का टेंडर जारी किया था। जिसमें से 510 बसों के लिए लोगों ने अपने-अपने रेटों पर आवेदन किए थे। इसके बाद 19 सितंबर को सरकार के साथ उनके एग्रीमेंट हो गए थे। जिस कारण उन्होंने कैथल में 15 और पूरे प्रदेश में 400 बसें तैयार करवा लीं। लेकिन रोडवेज कर्मियों की हड़ताल के बाद यह योजना ठंडे बस्ते में चली गई। हालात ये हैं कि आज तक उनकी 400 बसों का रजिस्ट्रेशन तक नहीं होने दिया गया है। यानी कि यह कहा जाए कि आरसी भी नहीं बनने दी गई और अब कहा जा रहा है कि चाहे तो उनके साथ हुए एग्रीमेंट में 34.30 रुपये प्रति किलोमीटर की बजाए 26.92 रुपये प्रति किलोमीटर की दर से बसें चला लें। अन्यथा 31 मार्च के बाद बीएस-4 बसों का रजिस्ट्रेशन नहीं हो पाएगा। अकेले कैथल में 25 लाख रुपये प्रति बस की लागत से अलग उनका 15 बसों पर करीब 40 लाख रुपये से अधिक का नुकसान हो चुका है।
सरकार से मांग है कि उन्हें 34.30 पैसे की दर पर बसों के संचालन की अनुमति दी जाए। या फिर उन्हें टेक्स लेकर अस्थाई परमिट जारी किए जाएं। यदि यह भी नहीं करना है तो उनकी खाली खड़ी बसों को सरकार रोडवेज के बेड़े में शामिल कर ले और उन्हें अब तक इन बसों पर आई लागत राशि दे दे। जिसमें बीमा, ब्याज व अन्य खर्च शामिल हैं। कैथल में उनकी 15 बसें खेतों में खड़ी कबाड़ा हो रहीं हैं। जीएम रोडवेज रामकुमार का कहना है कि उनके पास किमी स्कीम के तहत बसें संचालन के लिए कोई आदेश नहीं हैं।
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हरियाणा रोडवेज कर्मचारी तालमेल कमेटी कैथल डिपो द्वारा वीरवार को बस स्टैंड पर गेट मिटिंग करके जोरदार प्रदर्शन किया। जिसकी अध्यक्षता डिपो प्रधान महावीर सिंह व रणबीर बालू ने की। मंच का संचालन डिपो सचिव प्रवीण कुमार व राजपाल ने किया। रोडवेज कर्मचारी यूनियन के प्रांतीय महासचिव पहल सिंह तंवर, पूर्व जिला प्रधान जसवीर सिंह व संगठनकर्ता शमशेर सिंह सिसमौर ने कहा कि रोडवेज कर्मचारी किलोमीटर प्राइवेेट परमिटों का रद करवाने के लिए संघर्ष कर रहा है। सरकार फिर से 190 बसों को चलाने की तैयारी कर रही है। जिसको लेकर रोडवेज तालमेल कमेटी हरियाणा में रोष है। उन्होंने कहा कि किसी भी किमत पर प्राइवेट बसों को लागू नहीं करने देंगे। जिला सचिव बलवान कुंडू, प्रांतीय उपमहासचिव कृष्ण किच्छाना, सर्व कर्मचारी संघ के जिला प्रधान जरनैल सिंह ,रामपाल शर्मा ने कहा कि रोडवेज के अंदर किसी भी प्रकार की प्राइवेट बसों का घुसने नहीं दिया जाएगा। सरकार बार बार वायदाखिलाफी कर रही है। यदि सरकार द्वारा कर्मचारियों की मांग को लागू नहीं किया गया तो केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आहवान पर 8 जनवरी को सभी विभागों के कर्मचारी पूर्ण रूप से हड़ताल पर रहेंगे।
इस अवसर पर रामफल सिरटा, बलकार सिंह, राजकुमार नेपेवाला, शिशपाल, सुशील गुर्जर, सतीश कुमार, सुरजीत सिंह, ओमपाल भाल, शिवदत शर्मा,मंगत बरोट आदि सैंकड़ों कर्मचारी मौजूद थे।
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द हरियाणा को-आपरेटिव सोसाइटी वेल्फेयर संघ के पूर्व अध्यक्ष एवं कैथल में इन बसों में से 15 बसों का एग्रीमेंट करने वाले वीरेंद्र सिंह सांगवान, जसमेर ढांडा, वीरेंद्र गोयत, अनिल ढुल ने कहा कि सरकार ने वर्ष 2018 में किलोमीटर स्कीम के तहत 700 बसें चलाने का टेंडर जारी किया था। जिसमें से 510 बसों के लिए लोगों ने अपने-अपने रेटों पर आवेदन किए थे। इसके बाद 19 सितंबर को सरकार के साथ उनके एग्रीमेंट हो गए थे। जिस कारण उन्होंने कैथल में 15 और पूरे प्रदेश में 400 बसें तैयार करवा लीं। लेकिन रोडवेज कर्मियों की हड़ताल के बाद यह योजना ठंडे बस्ते में चली गई। हालात ये हैं कि आज तक उनकी 400 बसों का रजिस्ट्रेशन तक नहीं होने दिया गया है। यानी कि यह कहा जाए कि आरसी भी नहीं बनने दी गई और अब कहा जा रहा है कि चाहे तो उनके साथ हुए एग्रीमेंट में 34.30 रुपये प्रति किलोमीटर की बजाए 26.92 रुपये प्रति किलोमीटर की दर से बसें चला लें। अन्यथा 31 मार्च के बाद बीएस-4 बसों का रजिस्ट्रेशन नहीं हो पाएगा। अकेले कैथल में 25 लाख रुपये प्रति बस की लागत से अलग उनका 15 बसों पर करीब 40 लाख रुपये से अधिक का नुकसान हो चुका है।
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सरकार से मांग है कि उन्हें 34.30 पैसे की दर पर बसों के संचालन की अनुमति दी जाए। या फिर उन्हें टेक्स लेकर अस्थाई परमिट जारी किए जाएं। यदि यह भी नहीं करना है तो उनकी खाली खड़ी बसों को सरकार रोडवेज के बेड़े में शामिल कर ले और उन्हें अब तक इन बसों पर आई लागत राशि दे दे। जिसमें बीमा, ब्याज व अन्य खर्च शामिल हैं। कैथल में उनकी 15 बसें खेतों में खड़ी कबाड़ा हो रहीं हैं। जीएम रोडवेज रामकुमार का कहना है कि उनके पास किमी स्कीम के तहत बसें संचालन के लिए कोई आदेश नहीं हैं।
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हरियाणा रोडवेज कर्मचारी तालमेल कमेटी कैथल डिपो द्वारा वीरवार को बस स्टैंड पर गेट मिटिंग करके जोरदार प्रदर्शन किया। जिसकी अध्यक्षता डिपो प्रधान महावीर सिंह व रणबीर बालू ने की। मंच का संचालन डिपो सचिव प्रवीण कुमार व राजपाल ने किया। रोडवेज कर्मचारी यूनियन के प्रांतीय महासचिव पहल सिंह तंवर, पूर्व जिला प्रधान जसवीर सिंह व संगठनकर्ता शमशेर सिंह सिसमौर ने कहा कि रोडवेज कर्मचारी किलोमीटर प्राइवेेट परमिटों का रद करवाने के लिए संघर्ष कर रहा है। सरकार फिर से 190 बसों को चलाने की तैयारी कर रही है। जिसको लेकर रोडवेज तालमेल कमेटी हरियाणा में रोष है। उन्होंने कहा कि किसी भी किमत पर प्राइवेट बसों को लागू नहीं करने देंगे। जिला सचिव बलवान कुंडू, प्रांतीय उपमहासचिव कृष्ण किच्छाना, सर्व कर्मचारी संघ के जिला प्रधान जरनैल सिंह ,रामपाल शर्मा ने कहा कि रोडवेज के अंदर किसी भी प्रकार की प्राइवेट बसों का घुसने नहीं दिया जाएगा। सरकार बार बार वायदाखिलाफी कर रही है। यदि सरकार द्वारा कर्मचारियों की मांग को लागू नहीं किया गया तो केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आहवान पर 8 जनवरी को सभी विभागों के कर्मचारी पूर्ण रूप से हड़ताल पर रहेंगे।
इस अवसर पर रामफल सिरटा, बलकार सिंह, राजकुमार नेपेवाला, शिशपाल, सुशील गुर्जर, सतीश कुमार, सुरजीत सिंह, ओमपाल भाल, शिवदत शर्मा,मंगत बरोट आदि सैंकड़ों कर्मचारी मौजूद थे।