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Kaithal News: रोडवेज बसों की सवारी बहनों पर पड़ी भारी
Tue, 20 Aug 2024 05:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Tue, 20 Aug 2024 05:05 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। रक्षा बंधन पर्व पर महिलाओं के लिए निशुल्क यात्रा दूसरे दिन सोमवार को भी जारी रही। मुफ्त की सवारी से वे पसीना-पसीना हो गईं। निजी बस संचालकों ने फिर मनमानी की। जिस रूटों पर अधिक भीड़ रही, उन्हीं रूटों पर बसों की संख्या कम की। नए बस स्टैंड पर 40 अतिरिक्त बसों को लगाया गया था। इसके साथ ही करीब 50 रोडवेज कर्मियों की भी अतिरिक्त ड्यूटी लगाई।
पहले दिन करीब 20 हजार महिलाओं ने निशुल्क यात्रा की थी। दो दिन में 50 हजार से अधिक महिलाओं 15 वर्ष तक की आयु वाले बच्चों ने कैथल डिपो की रोडवेज बसों के माध्यम से निशुल्क यात्रा की। रक्षा बंधन पर्व पर सोमवार को रोडवेज बसों का सफर मुफ्त तो रहा, लेकिन भीड़ ने बहनों के पसीने छुड़ा दिए।
सुबह पहले तो भीड़ कम दिखी, लेकिन दोपहर होने के बाद महिलाओं की संख्या बढ़ती गई। सीटों के लिए कई महिलाएं बसों की ओर दौड़ती भी नजर आईं। कई को तो खड़े होकर बस में सफर करना पड़ा। भीड़ अधिक होने के कारण कई रूटों पर बसों की समस्या भी हुई। वहीं, दूसरे दिन भी अधिक भीड़ वाले रूटों पर निजी बसों की संख्या कम रही।
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दूसरी ओर विभाग को कई गांवों में बस स्टॉप पर बसें न मिलने की शिकायत मिली। इसके बाद संस्थान प्रबंधक ने स्वयं निरीक्षण कर शिकायतों का समाधान किया। बता दें कि इस बार रोडवेज के कैथल डिपो में 192 बसें हैं। इन सभी बसों को रूटों पर चलाया गया था। हालांकि विभाग के दावे रहे कि उन्होंने सभी रूटों पर बसों का चलाया।
संस्थान प्रबंधक सुनील कुमार ने बस के काउंटरों का भी निरीक्षण किया। निजी बसें रूट पर चलाई तो जा रही थी, लेकिन इसमें अधिक भीड़ होने का हवाला देकर महिलाओं को बसों में नहीं चढ़ाया गया। बस स्टैंड पर महिलाओं की सुरक्षा के लिए पुलिस भी तैनात रही। रोडवेज के अधिकारियों के अनुसार भीड़ को देखते हुए करीब 50 अतिरिक्त कर्मियों की ड्यूटियां रात तक लगाई गई थी।
उधर, ग्रामीण रूटों पर बसें न होने की अधिक समस्या रही थी। उनके अनुसार कलायत, राजौंद और पूंडरी के गांवों में जाने के लिए बसें नहीं मिल पाई। जबकि लंबे रूटों पर भी काफी अंतराल के बीच बसों का संचालन हो पाया।
महिला रीतू रानी ने बताया कि उसे कलायत के गांव कालेखां में जाना था, करीब एक घंटे के बाद बस मिली। इसके साथ ही कुरुक्षेत्र जाने वाली महिला रीना ने बताया कि उसे भी करीब डेढ़ घंटे के बाद बस मिली।
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कैथल। रक्षा बंधन पर्व पर महिलाओं के लिए निशुल्क यात्रा दूसरे दिन सोमवार को भी जारी रही। मुफ्त की सवारी से वे पसीना-पसीना हो गईं। निजी बस संचालकों ने फिर मनमानी की। जिस रूटों पर अधिक भीड़ रही, उन्हीं रूटों पर बसों की संख्या कम की। नए बस स्टैंड पर 40 अतिरिक्त बसों को लगाया गया था। इसके साथ ही करीब 50 रोडवेज कर्मियों की भी अतिरिक्त ड्यूटी लगाई।
पहले दिन करीब 20 हजार महिलाओं ने निशुल्क यात्रा की थी। दो दिन में 50 हजार से अधिक महिलाओं 15 वर्ष तक की आयु वाले बच्चों ने कैथल डिपो की रोडवेज बसों के माध्यम से निशुल्क यात्रा की। रक्षा बंधन पर्व पर सोमवार को रोडवेज बसों का सफर मुफ्त तो रहा, लेकिन भीड़ ने बहनों के पसीने छुड़ा दिए।
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सुबह पहले तो भीड़ कम दिखी, लेकिन दोपहर होने के बाद महिलाओं की संख्या बढ़ती गई। सीटों के लिए कई महिलाएं बसों की ओर दौड़ती भी नजर आईं। कई को तो खड़े होकर बस में सफर करना पड़ा। भीड़ अधिक होने के कारण कई रूटों पर बसों की समस्या भी हुई। वहीं, दूसरे दिन भी अधिक भीड़ वाले रूटों पर निजी बसों की संख्या कम रही।
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दूसरी ओर विभाग को कई गांवों में बस स्टॉप पर बसें न मिलने की शिकायत मिली। इसके बाद संस्थान प्रबंधक ने स्वयं निरीक्षण कर शिकायतों का समाधान किया। बता दें कि इस बार रोडवेज के कैथल डिपो में 192 बसें हैं। इन सभी बसों को रूटों पर चलाया गया था। हालांकि विभाग के दावे रहे कि उन्होंने सभी रूटों पर बसों का चलाया।
संस्थान प्रबंधक सुनील कुमार ने बस के काउंटरों का भी निरीक्षण किया। निजी बसें रूट पर चलाई तो जा रही थी, लेकिन इसमें अधिक भीड़ होने का हवाला देकर महिलाओं को बसों में नहीं चढ़ाया गया। बस स्टैंड पर महिलाओं की सुरक्षा के लिए पुलिस भी तैनात रही। रोडवेज के अधिकारियों के अनुसार भीड़ को देखते हुए करीब 50 अतिरिक्त कर्मियों की ड्यूटियां रात तक लगाई गई थी।
उधर, ग्रामीण रूटों पर बसें न होने की अधिक समस्या रही थी। उनके अनुसार कलायत, राजौंद और पूंडरी के गांवों में जाने के लिए बसें नहीं मिल पाई। जबकि लंबे रूटों पर भी काफी अंतराल के बीच बसों का संचालन हो पाया।
महिला रीतू रानी ने बताया कि उसे कलायत के गांव कालेखां में जाना था, करीब एक घंटे के बाद बस मिली। इसके साथ ही कुरुक्षेत्र जाने वाली महिला रीना ने बताया कि उसे भी करीब डेढ़ घंटे के बाद बस मिली।