{"_id":"5f9b07578ebc3ec5ef03105c","slug":"rice-sell-kaithal-news-knl491968180","type":"story","status":"publish","title_hn":"किसानों को नहीं हो रहा करोड़ों रुपये का भुगतान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
किसानों को नहीं हो रहा करोड़ों रुपये का भुगतान
विज्ञापन
rice sell
- फोटो : Kaithal
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिले में धान की सरकारी खरीद का काम अंतिम चरण में है। लेकिन सीजन के दौरान खरीदी गई करोड़ों रुपये की धान का किसानों को भुगतान नहीं हो पाया है। किसान और आढ़ती विभागीय चक्कर काटने पर मजबूर हैं। अधिकारियों का कहना है कि 60 प्रतिशत किसानों के खाते में धान का भुगतान हो चुका है।
धान खरीद में इस बार किसानों के खाते में भुगतान किया जा रहा है। जिस किसान ने लिखित में आढ़ती के खाते में भुगतान देने पर सहमति जता दी थी, उसे किसान के लिए आढ़ती को भुगतान किया जा रहा है। लेकिन जिस किसान ने लिखकर नहीं दिया, ऐसे किसान के खाते में सीधा भुगतान किया जा रहा है। भुगतान के लिए आढ़ती, मार्केटिंग बोर्ड, खरीद एजेंसी व डीएफएससी विभाग की अलग-अलग भूमिकाओं में पूरा चेन सिस्टम बना हुआ है। जिसमें जे फार्म जनरेट करने से लेकर गेटपास के मिलान सहित एक पूरी की पूरी प्रक्रिया बनी हुई है। इसी प्रक्रिया के चलते इस बार भुगतान में देरी हो रही है।
जल्द से जल्द भुगतान की मांग
अनाज मंडी में धान बिक्री कर जा चुके गज्जनसिंह हिम्मतपुरा, बलविंद्र उमेदपुर, कृष्ण सिरटा सहित अन्य किसानों ने कहा कि मंडी में उन्हें धान बेचे कई दिन हो गए, लेकिन भुगतान नहीं हो पा रहा है। आढ़ती अरुण कुमार ने कहा कि किसान उनसे भुगतान की मांग करते हैं। हम यही कह रहे हैं कि सीधे खाते में आएगी। अधिकारियों से मांग है कि जल्द से जल्द भुगतान किया जाए।
विज्ञापन
नई अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान कृष्ण मित्तल ने कहा कि आढ़ती को यही पता नहीं है कि उनके माध्यम से खरीदी गई धान का भुगतान हो भी रहा है या नहीं? किसान उनसे भुगतान की मांग कर रहे हैं। खरीद एजेंसियों से यही मांग है कि जल्द से जल्द किसानों का भुगतान करवाया जाए। डीएफएससी प्रमोद शर्मा ने कहा कि करीब 60 प्रतिशत भुगतान किसानों के खाते में किया जा चुका है। यह लगभग 260 करोड़ रुपये बनता है। लगभग 40 प्रतिशत भुगतान रहता है। इसके लिए भी आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
आज उठान के लिए बंद रहेगी अनाज मंडी
प्रधान कृष्ण मित्तल ने कहा कि अनाज मंडी में उठान न होने के कारण मंडी में नई ढेरी डालने की जगह नहीं बची है। जिस कारण फैसला लिया गया है कि शुक्रवार को अनाज मंडी से केवल उठान का काम होगा खरीद कार्य नहीं किया जाएगा। ताकि पहले खरीदे गए धान का उठान हो सके।
विज्ञापन
धान खरीद में इस बार किसानों के खाते में भुगतान किया जा रहा है। जिस किसान ने लिखित में आढ़ती के खाते में भुगतान देने पर सहमति जता दी थी, उसे किसान के लिए आढ़ती को भुगतान किया जा रहा है। लेकिन जिस किसान ने लिखकर नहीं दिया, ऐसे किसान के खाते में सीधा भुगतान किया जा रहा है। भुगतान के लिए आढ़ती, मार्केटिंग बोर्ड, खरीद एजेंसी व डीएफएससी विभाग की अलग-अलग भूमिकाओं में पूरा चेन सिस्टम बना हुआ है। जिसमें जे फार्म जनरेट करने से लेकर गेटपास के मिलान सहित एक पूरी की पूरी प्रक्रिया बनी हुई है। इसी प्रक्रिया के चलते इस बार भुगतान में देरी हो रही है।
विज्ञापन
जल्द से जल्द भुगतान की मांग
अनाज मंडी में धान बिक्री कर जा चुके गज्जनसिंह हिम्मतपुरा, बलविंद्र उमेदपुर, कृष्ण सिरटा सहित अन्य किसानों ने कहा कि मंडी में उन्हें धान बेचे कई दिन हो गए, लेकिन भुगतान नहीं हो पा रहा है। आढ़ती अरुण कुमार ने कहा कि किसान उनसे भुगतान की मांग करते हैं। हम यही कह रहे हैं कि सीधे खाते में आएगी। अधिकारियों से मांग है कि जल्द से जल्द भुगतान किया जाए।
विज्ञापन
नई अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान कृष्ण मित्तल ने कहा कि आढ़ती को यही पता नहीं है कि उनके माध्यम से खरीदी गई धान का भुगतान हो भी रहा है या नहीं? किसान उनसे भुगतान की मांग कर रहे हैं। खरीद एजेंसियों से यही मांग है कि जल्द से जल्द किसानों का भुगतान करवाया जाए। डीएफएससी प्रमोद शर्मा ने कहा कि करीब 60 प्रतिशत भुगतान किसानों के खाते में किया जा चुका है। यह लगभग 260 करोड़ रुपये बनता है। लगभग 40 प्रतिशत भुगतान रहता है। इसके लिए भी आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
आज उठान के लिए बंद रहेगी अनाज मंडी
प्रधान कृष्ण मित्तल ने कहा कि अनाज मंडी में उठान न होने के कारण मंडी में नई ढेरी डालने की जगह नहीं बची है। जिस कारण फैसला लिया गया है कि शुक्रवार को अनाज मंडी से केवल उठान का काम होगा खरीद कार्य नहीं किया जाएगा। ताकि पहले खरीदे गए धान का उठान हो सके।