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तीसरे दिन भी नहीं हुई धान की खरीद, कलायत में महज 365 क्विंटल धान खरीदा गया
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rice sell
- फोटो : Kaithal
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जिले में सरकारी खरीद की घोषणा के तीन दिन बाद भी मंडियों में खरीद शुरू हीं हो पाई। कलायत मंडी में महज 365 क्विंटल धान खरीदा गया। कैथल, पूंडरी, ढांड, राजौंद व गुहला-चीका में किसान मंडियों में बैठकर सरकार को कोसने पर मजबूर हैं। कैथल अनाज मंडी में आढ़तियों की हड़ताल के कारण खरीद नहीं हो पा रही है। नई अनाज मंडी में किसानों ने कहा कि सरकार का कहना है कि 17 प्रतिशत नमी वाली धान खरीदी जाएगी। लेकिन यहां तो 15 प्रतिशत नमी के बावजूद धान की खरीद नहीं हो पा रही। डीएफएससी से आए इंस्पेक्टर ने पहले नमी अधिक होने की बात कही। इसके बाद जब किसानों ने नमी की जांच करवाई तो नमी 15 प्रतिशत निकली। इसके बाद इंस्पेक्टर ने बड़े पंखे से सफाई करवाने की शर्त रख दी। जिस पर मजदूरों ने कहा कि कैथल मंडी में बड़े पंखे से सफाई नहीं होती। यहां छोटे पंखों से सफाई होती है। उपमुख्यमंत्री से मांगा इस्तीफा: जब नमी की मात्रा 15 प्रतिशत सामने आई तो किसान ने कहा कि उप-मुख्यमंत्री ने कहा था कि यदि किसान की एमएसपी पर खरीद नहीं हुई तो वे इस्तीफा दे देंगे। अब यह नमी की मात्रा भी 15 प्रतिशत है। अब भी खरीद नहीं हो पा रही है तो इस्तीफा क्यों नहीं देते उप-मुख्यमंत्री। इसी प्रकार से गांव रोहेड़ियां निवासी किसान मांगे राम ने कहा कि चार दिन से मंडी में धान की खरीद के इंतजार में बैठे हैं। लेकिन खरीद नहीं हो पा रही है। खेत के बाकी काम भी प्रभावित हो रहे हैं। डीएफएससी प्रमोद कुमार ने कहा कि पूरे जिले में कलायत मंडी में 365 क्विंटल सरकारी खरीद हो पाई है। पूंडरी व ढांड में नमी की मात्रा ज्यादा थी। कैथल में आढ़तियों द्वारा खरीद नहीं करवाई जा रही। जिस कारण खरीद नहीं हो पाई।
राइस मिलर्स ने किए हाथ खड़े, नहीं कर सकते मौजूदा स्थिति में काम आढ़तियों के साथ-साथ राइस मिलर्स ने भी सरकारी खरीद में भाग लेने से हाथ खड़े कर दिए हैं। आढ़ती एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष अमरजीत छाबड़ा ने कहा कि मिलर्स मौजूदा स्थिति में काम नहीं कर सकते। उन्हें मिल बंद रखने में कम नुकसान है। सरकारी धान के लिए चालू रखने में ज्यादा नुकसान है। इसलिए फैसला लिया गया है कि जब तक सरकार एक क्विंटल धान के बदले 62 किलो चावल लेने, पिछले ट्रांसपोर्ट चार्ज सहित अन्य भुगतान क्लियर ना करने व उनकी अन्य मांगें पूरी नहीं करती, तब तक वे मिल बंद रखेंगे। चंडीगढ़ में अधिकारियों के साथ बात हुई थी, लेकिन जब वित्त संबंधी मामला आता है तो सीएम की मंजूरी चाहिए। इसलिए अब सरकार जब उनकी सुनवाई करेगी, तभी वे सरकारी धान लेंगे।
अनाज मंडी में पीआर धान की सरकारी खरीद ना होने से आढ़तियों व किसानों में प्रशासन के खिलाफ काफी रोष है। आढ़ती मंडी में सरकारी बोली करवाने को लेकर मार्केट कमेटी के सचिव से मिले और उन्हें बोली करवाने की अपील की। मंडी में इस समय लगभग 25 हजार क्विंटल धान की आवक है। पूरी मंडी पीआर धान की ढेरियों से अटी पड़ी है। सरकार के निर्देश 26 सितंबर से सरकारी खरीद शुरू होने के निर्देश के बाद भी पूंडरी मंडी में खरीद शुरू नहीं हो पाई है। आढ़तियों का एक शिष्टमंडल बोली शुरू करवाने को लेकर मार्केट कमेटी सचिव अभिनव वालिया से उनके कार्यालय में मिला और शीघ्र बोली शुरू करवाने की मांग की। उधर मंडी में 1509 धान की आवक भी जोरों पर है। अनाज मंडी फूड ग्रेन डीलर एसोसिएशन के प्रधान ध्यानचंद ने रोष प्रकट करते हुए कहा कि सरकार ने धान खरीद करने की घोषणा तो कर दी, लेकिन अधिकारी एक धाना भी खरीद नहीं कर रहे है। वहीं हैफेड के मैनेजर संदीप कल्याण ने कहा कि मंडी में धान खरीद करने के लिए उनकी पुरी तैयारियां है, लेकिन अभी तक मार्केट कमेटी की तरफ से किसानों की ढेरियों के आनलाइन गेट पास नहीं काटे गये है और न ही उन्हें अभी तक मिलिंग करने के लिए शैलर अलाट किए गए हैं।
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अनाज मंडी में खरीद के तीसरे दिन भी किसानों की एमएसपी वाली धान की सरकारी बोली नहीं हो सकी। जिसके कारण किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मंडी प्रधान राजेश ढुल, पूर्व प्रधान रणधीर सिंह ढुल ने बताया कि पाई अनाज मंडी में इस समय किसानों की लगभग 7-8 हजार बोरी धान की पड़ी हुई है, जिसको खरीद करने के लिये खरीद एजेंसी के अधिकारी नही आ रहे।
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राइस मिलर्स ने किए हाथ खड़े, नहीं कर सकते मौजूदा स्थिति में काम आढ़तियों के साथ-साथ राइस मिलर्स ने भी सरकारी खरीद में भाग लेने से हाथ खड़े कर दिए हैं। आढ़ती एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष अमरजीत छाबड़ा ने कहा कि मिलर्स मौजूदा स्थिति में काम नहीं कर सकते। उन्हें मिल बंद रखने में कम नुकसान है। सरकारी धान के लिए चालू रखने में ज्यादा नुकसान है। इसलिए फैसला लिया गया है कि जब तक सरकार एक क्विंटल धान के बदले 62 किलो चावल लेने, पिछले ट्रांसपोर्ट चार्ज सहित अन्य भुगतान क्लियर ना करने व उनकी अन्य मांगें पूरी नहीं करती, तब तक वे मिल बंद रखेंगे। चंडीगढ़ में अधिकारियों के साथ बात हुई थी, लेकिन जब वित्त संबंधी मामला आता है तो सीएम की मंजूरी चाहिए। इसलिए अब सरकार जब उनकी सुनवाई करेगी, तभी वे सरकारी धान लेंगे।
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अनाज मंडी में पीआर धान की सरकारी खरीद ना होने से आढ़तियों व किसानों में प्रशासन के खिलाफ काफी रोष है। आढ़ती मंडी में सरकारी बोली करवाने को लेकर मार्केट कमेटी के सचिव से मिले और उन्हें बोली करवाने की अपील की। मंडी में इस समय लगभग 25 हजार क्विंटल धान की आवक है। पूरी मंडी पीआर धान की ढेरियों से अटी पड़ी है। सरकार के निर्देश 26 सितंबर से सरकारी खरीद शुरू होने के निर्देश के बाद भी पूंडरी मंडी में खरीद शुरू नहीं हो पाई है। आढ़तियों का एक शिष्टमंडल बोली शुरू करवाने को लेकर मार्केट कमेटी सचिव अभिनव वालिया से उनके कार्यालय में मिला और शीघ्र बोली शुरू करवाने की मांग की। उधर मंडी में 1509 धान की आवक भी जोरों पर है। अनाज मंडी फूड ग्रेन डीलर एसोसिएशन के प्रधान ध्यानचंद ने रोष प्रकट करते हुए कहा कि सरकार ने धान खरीद करने की घोषणा तो कर दी, लेकिन अधिकारी एक धाना भी खरीद नहीं कर रहे है। वहीं हैफेड के मैनेजर संदीप कल्याण ने कहा कि मंडी में धान खरीद करने के लिए उनकी पुरी तैयारियां है, लेकिन अभी तक मार्केट कमेटी की तरफ से किसानों की ढेरियों के आनलाइन गेट पास नहीं काटे गये है और न ही उन्हें अभी तक मिलिंग करने के लिए शैलर अलाट किए गए हैं।
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अनाज मंडी में खरीद के तीसरे दिन भी किसानों की एमएसपी वाली धान की सरकारी बोली नहीं हो सकी। जिसके कारण किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मंडी प्रधान राजेश ढुल, पूर्व प्रधान रणधीर सिंह ढुल ने बताया कि पाई अनाज मंडी में इस समय किसानों की लगभग 7-8 हजार बोरी धान की पड़ी हुई है, जिसको खरीद करने के लिये खरीद एजेंसी के अधिकारी नही आ रहे।