{"_id":"653fff5bc7d6661de2091c89","slug":"respiratory-patients-are-increasing-due-to-increase-in-air-pollution-kaithal-news-c-18-1-knl1004-253709-2023-10-31","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kaithal News: वायु प्रदूषण में बढ़ोतरी से बढ़ रहे सांस के मरीज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kaithal News: वायु प्रदूषण में बढ़ोतरी से बढ़ रहे सांस के मरीज
Tue, 31 Oct 2023 12:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Tue, 31 Oct 2023 12:39 AM IST
विज्ञापन
कमल बहल
कैथल। जिले में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ने के बाद अस्पताल में अब सांस संबंधित बीमारी के मरीज भी बढ़ने लगे हैं। पहले जिला नागरिक अस्पताल की ओपीडी में केवल 20 से 25 मरीज ही सांस से संबंधित आ रहे थे। पिछले तीन दिन से रोजाना 30 से अधिक मरीजों की ओपीडी हो रही है। वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ने के बाद चिकित्सकों ने भी सांस के मरीजों को बाहर न घूमने की सलाह दी है।
चिकित्सकों का कहना है कि यदि सांस की बीमारी संबंधित मरीज बचाव हिदायतों का पालन नहीं करेंगे तो उन्हें अधिक परेशानी उठानी पड़ सकती है। सोमवार को भी एक्यूआई 332 दर्ज किया गया। इस कारण सुबह करीब 11 बजे तक आसमान में धुएं का गुब्बार छाया रहा और शाम के समय साढ़े पांच बजे के बाद ही फिर से आसमान में धुएं का गुब्बार छाना शुरू हो गया था।
यदि वायु प्रदूषण का स्तर कम नहीं हुआ तो यह जिले के लिए लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बन सकता है। वहीं वायु धुएं के कारण आंखों में जलन की समस्या भी उत्पन्न होती है। जिला नागरिक अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. राजीव मित्तल ने बताया कि इस बार अस्पताल में सर्दी के मौसम में पहुंचने वाले सांस के मरीज अभी से पहुंचने लगे हैं।
विज्ञापन
ऐसा केवल वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ने के कारण है। इस समय बच्चों व बुजुर्गों सहित उन लोगों को वायु प्रदूषण से बचने की जरूरत हैं, जिन्हें सांस से संबंधित बीमारियां हैं। डॉ. मित्तल ने बताया कि घर में किसी भी प्रकार से लकड़ी न जलाएं, घर के दरवाजे व खिड़कियां बंद रखें।
जिला नागरिक अस्पताल के प्रधान चिकित्सा अधिकारी डॉ. सचिन मांडले ने बताया कि वायु प्रदूषण व मौसम में बदलाव के बाद मरीजों के खराब स्वास्थ्य के मरीजों के इलाज को लेकर चिकित्सकों को विशेष हिदायतें दी गई हैं। लोगों से भी अपील है कि वे वायु प्रदूषण से बचाव के लिए मुंह पर मास्क लगाएं और आंखों में जलन से बचाव के लिए चश्मे का प्रयोग करें। संवाद
पराली जलाने के अब तक 283 मामले, 53 किसानों पर केस
वायु गुणवत्ता सूचकांक बढ़ने के चलते फसल अवशेष जलाने पर अब तक विभाग की ओर से 53 किसानों पर एफआईआर दर्ज की गई है।जिले में इस बार फसल अवशेष जलाने के 283 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें से 158 मामले हर्षक एप से और 125 मामले नॉन हर्षक एप से मिले हैं। फसल अवशेष जलाने पर कृषि विभाग की ओर से अब तक 53 किसानों पर एफआईआर दर्ज की गई है। फसल अवशेष जलाने पर विभाग ने अब तक किसानों से चार लाख 90 हजार रुपये जुर्माना वसूला है।
एयर क्वालिटी इंडेक्स
स्वास्थ्य पर प्रभाव अच्छा (0-50)
संतोषजनक (51-100)
संवेदनशील लोगों को सांस लेने में तकलीफ हो सकती है।
थोड़ा प्रदूषित(101-200)
अस्थमा, हृदय रोग वालों सांस लेने में तकलीफ हो सकती है।
खराब (201-300)
सांस लेने में होती है ज्यादा परेशानी।
बहुत खराब (301-400)
सांस की बीमारी हो सकती है। फेफड़े रोगी होते हैं परेशान
विज्ञापन
कैथल। जिले में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ने के बाद अस्पताल में अब सांस संबंधित बीमारी के मरीज भी बढ़ने लगे हैं। पहले जिला नागरिक अस्पताल की ओपीडी में केवल 20 से 25 मरीज ही सांस से संबंधित आ रहे थे। पिछले तीन दिन से रोजाना 30 से अधिक मरीजों की ओपीडी हो रही है। वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ने के बाद चिकित्सकों ने भी सांस के मरीजों को बाहर न घूमने की सलाह दी है।
चिकित्सकों का कहना है कि यदि सांस की बीमारी संबंधित मरीज बचाव हिदायतों का पालन नहीं करेंगे तो उन्हें अधिक परेशानी उठानी पड़ सकती है। सोमवार को भी एक्यूआई 332 दर्ज किया गया। इस कारण सुबह करीब 11 बजे तक आसमान में धुएं का गुब्बार छाया रहा और शाम के समय साढ़े पांच बजे के बाद ही फिर से आसमान में धुएं का गुब्बार छाना शुरू हो गया था।
विज्ञापन
यदि वायु प्रदूषण का स्तर कम नहीं हुआ तो यह जिले के लिए लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बन सकता है। वहीं वायु धुएं के कारण आंखों में जलन की समस्या भी उत्पन्न होती है। जिला नागरिक अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. राजीव मित्तल ने बताया कि इस बार अस्पताल में सर्दी के मौसम में पहुंचने वाले सांस के मरीज अभी से पहुंचने लगे हैं।
विज्ञापन
ऐसा केवल वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ने के कारण है। इस समय बच्चों व बुजुर्गों सहित उन लोगों को वायु प्रदूषण से बचने की जरूरत हैं, जिन्हें सांस से संबंधित बीमारियां हैं। डॉ. मित्तल ने बताया कि घर में किसी भी प्रकार से लकड़ी न जलाएं, घर के दरवाजे व खिड़कियां बंद रखें।
जिला नागरिक अस्पताल के प्रधान चिकित्सा अधिकारी डॉ. सचिन मांडले ने बताया कि वायु प्रदूषण व मौसम में बदलाव के बाद मरीजों के खराब स्वास्थ्य के मरीजों के इलाज को लेकर चिकित्सकों को विशेष हिदायतें दी गई हैं। लोगों से भी अपील है कि वे वायु प्रदूषण से बचाव के लिए मुंह पर मास्क लगाएं और आंखों में जलन से बचाव के लिए चश्मे का प्रयोग करें। संवाद
पराली जलाने के अब तक 283 मामले, 53 किसानों पर केस
वायु गुणवत्ता सूचकांक बढ़ने के चलते फसल अवशेष जलाने पर अब तक विभाग की ओर से 53 किसानों पर एफआईआर दर्ज की गई है।जिले में इस बार फसल अवशेष जलाने के 283 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें से 158 मामले हर्षक एप से और 125 मामले नॉन हर्षक एप से मिले हैं। फसल अवशेष जलाने पर कृषि विभाग की ओर से अब तक 53 किसानों पर एफआईआर दर्ज की गई है। फसल अवशेष जलाने पर विभाग ने अब तक किसानों से चार लाख 90 हजार रुपये जुर्माना वसूला है।
एयर क्वालिटी इंडेक्स
स्वास्थ्य पर प्रभाव अच्छा (0-50)
संतोषजनक (51-100)
संवेदनशील लोगों को सांस लेने में तकलीफ हो सकती है।
थोड़ा प्रदूषित(101-200)
अस्थमा, हृदय रोग वालों सांस लेने में तकलीफ हो सकती है।
खराब (201-300)
सांस लेने में होती है ज्यादा परेशानी।
बहुत खराब (301-400)
सांस की बीमारी हो सकती है। फेफड़े रोगी होते हैं परेशान