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Kaithal News: रिश्ते भी अब तो कमाल हो गए... सब चाइना माल हो गए

Mon, 14 Jul 2025 12:14 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Mon, 14 Jul 2025 12:14 AM IST
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Relationships have also become amazing now... everything has become China stuff
संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। साहित्य सभा कैथल की जुलाई मास की मासिक काव्य गोष्ठी रविवार को आरकेएसडी कॉलेज के स्टाफ रूम में आयोजित हुई। गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. अमृत लाल मदान ने की, जबकि संचालन की बागडोर डॉ. प्रद्युम्न भल्ला के हाथों में रही।

इस अवसर पर वरिष्ठ हरियाणवी कवि डॉ. चतुर्भुज बंसल के कविता संग्रह ‘ज्ञान-माला’ का विमोचन भी किया गया। गोष्ठी का आरंभ कवि अनिल गर्ग की चुभती पंक्तियों से हुआ- रिश्ते भी अब तो कमाल हो गए, क्या पता कब टूट जाएं... सब चाइना माल हो गए।
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डॉ. प्रद्युम्न भल्ला ने अपनी संवेदनशील रचना ‘छोटे शहरों के लोग और बेटियां’ प्रस्तुत की और कहा –हम छोटे शहरों के लोग, जिंदा रखते हैं अपनी संस्कृति को, पनपने नहीं देते पाशविक वृत्ति को।
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चेतन चौहान की पंक्तियां बाज़ार की सच्चाई पर टिप्पणी थीं- अगर बाजार में बिकता बहुत है, सच मानो, वो सस्ता बहुत है। सोहनलाल सोनी ने हरियाणवी लोक की मिठास घोलते हुए कहा- सामण का महीना आग्या, पींग घली फैर बण में। रामफल गौड़ की पंक्तियां थीं:- कर लै कितने आड़े-टेढ़े, सब कर्मा के हौवे निबेड़े।

दिलबाग अकेला ने सावन की आमद को यूं सजाया : बादल आए, बादल आए, शीतल जल भर कर लाए। रजनीश शर्मा की प्रेम-भावनाओं से भरी रचना थी- चहुं ओर फैलाने प्यार, देखो सावन आया है द्वार। रिसाल जांगड़ा ने तपती धरती का चित्रण किया -सूरज ने धरती के तन को तपाया, हर वस्तु पर पड़ा तपन का साया।

मधु गोयल की भावुक स्मृतियों से भीगी रचना थी- बचपन की वे यादें याद आती हैं, फिर मेरे नैनों को भिगा जाती हैं। राजेश भारती की व्यंग्यात्मक पंक्तियां रहीं- खबरें ऐसे आती हैं, जैसे मक्खियां भिनभिनाती हैं।


डॉ. हरीश झंडई, सुरेश कल्याण, गंगाराम, अशोक कुमार और श्याम सुंदर गौड़ ने भी कविताएं प्रस्तुत की। गोष्ठी का समापन अध्यक्ष प्रो. अमृत लाल मदान की कविता और अध्यक्षीय टिप्पणी के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने रचनाकारों के भावबोध और भाषा की विविधता की प्रशंसा की।
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