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चंद घंटों की बारिश से गलियां व सड़कें हुई जलमग्न
ब्यूरो कैथल
Updated Tue, 09 Aug 2016 12:40 AM IST
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लोगों ने किया प्रदर्शन
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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रविवार को बिना किसी पूर्वानुमान के हुई बरसात ने सभी को परेशान कर दिया। रात के समय ना तो आसमान में बरसाती बादल थे, ना कोई भविष्यवाणी थी और ना ही मौसम विभाग को चेतावनी देती खबर। बावजूद इसके रात बादल इतना खुल के बरसे कि कई दिनों से बारिश-बारिश कर रहे लोगों की बस करवा दी। बरसात रात तकरीबन बारह बजे शुरू हुई और तकरीबन दो घंटे तक जमकर झमाझम होती रही। इसके बाद सुबह दिन चढ़ने तक कभी तेज तो कभी हल्की बूंदाबांदी होती रही।
सुबह हुई तो लोगों ने गलियों में, बाजारों में पानी ही पानी देखा। हाऊसिंग बोर्ड कालोनी के पुराने घरों, हुडा आर-1 व आर-2, चीका गांव की नीची बस्तियां, गुहला की पीर वाली गली सहित अनेक इलाकों में घरों के अंदर भी पानी घुस गया। कई स्थानों पर लोग घरों की देहरी पर मिट्टी की आंट बनाकर अंदर से पानी की बाल्टियां व जग भर भरकर बाहर उड़ेलते देखे गए।
दुकानों का करोड़ों का नुकसान
बरसात का पानी यहां छोटी मंडी की कई सारी दुकानों में भी घुस आया जिस कारण दुकानदारों का लाखों रुपये का नुकसान हो गया। सबसे ज्यादा किराना की दुकानें प्रभावित हुई जिसमें फर्श पर रखे रहने वाले गुड़ चीनी आदि पानी में ही पिघल गए। चीका में जूते व मनियारी के कई दुकानदारों ने दुकानों के नीचे तहखाने बना रखे हैं वहां भी पानी घुस आया जिसे निकालने के लिए दुकानदारों को भारी मशक्कत करनी पड़ी। इसके अलावा लोकसंपर्क विभाग का दफ्तर, तहसील कार्यालय, एसडीएम दफ्तर, सीआईडी कार्यालय, बिजली घर सहित तमाम छोटे बड़े सरकारी दफ्तर तालाबों का सा रूप धार गए। पिहोवा रोड पर स्थित एसडीएम आवास व तहसीलदार आवास को जाने वाले संपर्क मार्ग पर भी पानी खड़ा हो गया।
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पानी नहीं निकला तो दुकानदारों ने लाग दिया जाम
गुहला-चीका में रविवार रात को हुई बारिश के कारण हुए जलभराव से परेशान छोटी मंडी के दुकानदारों ने 11 बजे चीका पिहोवा मार्ग पर जाम लगा दिया और प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। दुकानदारों की अगुवाई पोल खोल अभियान के नेता नोदी चीका और श्याम मार्केट के एडवोकेट जय प्रकाश फौजी कर रहे थे। दुकानदार आरोप लगा रहे थे कि रात से उनकी दुकानों में पानी घुसा हुआ है। लाखों रुपये का नुकसान हो चुका है। यदि जल्दी पानी नहीं निकला गया तो यह नुकसान कई गुणा तक बढ़ जाएगा। उन्होंने कहा कि रात से ही बिजली बंद है जिस कारण सीवरेज पानी खींचने की बजाय ओवर फलो हो रहे हैं।
दुकानदारों ने कहा कि छोटी मंडी से बारिश के पानी निकासी का कोई भी प्रबंध नहीं है। जिस नाले के माध्यम से पानी निकलकर छोटी घग्गर की तरफ जाता था उसके और छोटी मंडी के बीच में एक मॉल बन गया है एवं पिहोवा रोड वाली सड़क भी ऊंची उठ जाने के कारण एक आंट बन गई है जिस कारण बारिश पानी आगे नहीं जाता।
जाम की सूचना पाकर एसएचओ चीका सतबीर सिंह मौके पर पहुंच गए और उन्होंने लोगों को जाम खोलने की अपील की। लोगों का कहना था कि उनका लाखों रुपये का माल पानी पानी हुआ जा रहा है और प्रशासन सुबह से उनकी कोई सुध तक लेने नहीं आया। एसएचओ ने मौके पर ही एसडीएम गुहला से फोन पर बात की और पानी की निकासी के लिए जेसीबी व नगर पालिका से जेनरेटर व पंप भिजवाने की मांग की। थोड़ी ही देर में जेसीबी मशीन व पालिका का जेनरेटर वाला पंप लेकर एक ट्रैक्टर पिहोवा रोड पर पहुंच गया। साथ ही नगर पालिका के सफाई दरोगा नाहर सिंह अपने सहयोगियों के साथ मौके पर पहुंच गए। पालिका अमले द्वारा पंप चलाकर पाइप द्वारा पानी सड़क पार नाले में डाले जाने पर लोगों ने जाम खोल दिया।
वहीं नगर पालिका की चेयरपर्सन अमनदीप कौर छोटी मंडी भी पहुंची और दुकानदारों को आश्वस्त किया कि इस बार तो जो हो गया हो गया आगे से पानी के निकास की दिक्कत नहीं आने दी जाएगी। अमनदीप ने कहा कि नगर पालिका पानी की निकासी के लिए एक मास्टर प्लान तैयार कर रही है जिस पर अमल होते ही शहर से पानी के निकास की समस्या पक्के तौर पर हल हो जाएगी।
गिरी मकान की छत, बाल-बाल बचा परिवार
गांव थेह नेवल में एक मकान की छत गिर गई। मगर खुशकिस्मती से नीचे सोया परिवार बाल-बाल बच गया। परिवार को चीका के एक अस्पताल में उपचार दिया जा रहा है। रात तकरीबन 2 बजे वाल्मीकि बस्ती निवासी राजकुमार के मकान की छत गिर गई। उस वक्त राजकुमार उसकी पत्नी अंजू व उसके तीन बच्चे उसी कमरे में सोए हुए थे। गांव वासियों को छत गिरने की खबर मिली तो उन्होंने आकर परिवार के पांचों लोगों को मलबे के नीचे से निकाला और चीका अस्पताल में भर्ती कराया। राजकुमार के मकान पर गार्डर व लकड़ी के बल्लों वाली छत थी। छत का गार्डर दीवार के एक तरफ से नीचे गिरा और कमरे के नीचे जमीन पर दीवार के साथ एक तरफ जा टिका। गार्डर गिरते ही ऊपर से लकड़ी के बल्ले, टाइलें व मिट्टी भरभराकर नीचे गिरने लगे। गनीमत ये रही कि ऊपर गार्डर अड़ा होने के कारण नीचे सोए परिवार के ऊपर कोई भी चीज सीधी नहीं गिरी गार्डर से टकराकर इधर-उधर छिटक गई। गांव वासी राज सिंह सीड़ा ने बताया कि जिस वक्त सूचना पाकर वह अन्य गांव वालों के साथ राजकुमार के घर पहुंचे तो उस वक्त सारा परिवार मलबे में दबा हुआ कराह रहा था। गांव वालों ने राजकुमार उसकी पत्नी अंजू, बेटी मनप्रीत, बेटे शंकर व बादल को मलबे से बाहर निकाला। पांचों लोग खतरे से बाहर बताए गए हैं।
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सुबह हुई तो लोगों ने गलियों में, बाजारों में पानी ही पानी देखा। हाऊसिंग बोर्ड कालोनी के पुराने घरों, हुडा आर-1 व आर-2, चीका गांव की नीची बस्तियां, गुहला की पीर वाली गली सहित अनेक इलाकों में घरों के अंदर भी पानी घुस गया। कई स्थानों पर लोग घरों की देहरी पर मिट्टी की आंट बनाकर अंदर से पानी की बाल्टियां व जग भर भरकर बाहर उड़ेलते देखे गए।
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दुकानों का करोड़ों का नुकसान
बरसात का पानी यहां छोटी मंडी की कई सारी दुकानों में भी घुस आया जिस कारण दुकानदारों का लाखों रुपये का नुकसान हो गया। सबसे ज्यादा किराना की दुकानें प्रभावित हुई जिसमें फर्श पर रखे रहने वाले गुड़ चीनी आदि पानी में ही पिघल गए। चीका में जूते व मनियारी के कई दुकानदारों ने दुकानों के नीचे तहखाने बना रखे हैं वहां भी पानी घुस आया जिसे निकालने के लिए दुकानदारों को भारी मशक्कत करनी पड़ी। इसके अलावा लोकसंपर्क विभाग का दफ्तर, तहसील कार्यालय, एसडीएम दफ्तर, सीआईडी कार्यालय, बिजली घर सहित तमाम छोटे बड़े सरकारी दफ्तर तालाबों का सा रूप धार गए। पिहोवा रोड पर स्थित एसडीएम आवास व तहसीलदार आवास को जाने वाले संपर्क मार्ग पर भी पानी खड़ा हो गया।
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पानी नहीं निकला तो दुकानदारों ने लाग दिया जाम
गुहला-चीका में रविवार रात को हुई बारिश के कारण हुए जलभराव से परेशान छोटी मंडी के दुकानदारों ने 11 बजे चीका पिहोवा मार्ग पर जाम लगा दिया और प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। दुकानदारों की अगुवाई पोल खोल अभियान के नेता नोदी चीका और श्याम मार्केट के एडवोकेट जय प्रकाश फौजी कर रहे थे। दुकानदार आरोप लगा रहे थे कि रात से उनकी दुकानों में पानी घुसा हुआ है। लाखों रुपये का नुकसान हो चुका है। यदि जल्दी पानी नहीं निकला गया तो यह नुकसान कई गुणा तक बढ़ जाएगा। उन्होंने कहा कि रात से ही बिजली बंद है जिस कारण सीवरेज पानी खींचने की बजाय ओवर फलो हो रहे हैं।
दुकानदारों ने कहा कि छोटी मंडी से बारिश के पानी निकासी का कोई भी प्रबंध नहीं है। जिस नाले के माध्यम से पानी निकलकर छोटी घग्गर की तरफ जाता था उसके और छोटी मंडी के बीच में एक मॉल बन गया है एवं पिहोवा रोड वाली सड़क भी ऊंची उठ जाने के कारण एक आंट बन गई है जिस कारण बारिश पानी आगे नहीं जाता।
जाम की सूचना पाकर एसएचओ चीका सतबीर सिंह मौके पर पहुंच गए और उन्होंने लोगों को जाम खोलने की अपील की। लोगों का कहना था कि उनका लाखों रुपये का माल पानी पानी हुआ जा रहा है और प्रशासन सुबह से उनकी कोई सुध तक लेने नहीं आया। एसएचओ ने मौके पर ही एसडीएम गुहला से फोन पर बात की और पानी की निकासी के लिए जेसीबी व नगर पालिका से जेनरेटर व पंप भिजवाने की मांग की। थोड़ी ही देर में जेसीबी मशीन व पालिका का जेनरेटर वाला पंप लेकर एक ट्रैक्टर पिहोवा रोड पर पहुंच गया। साथ ही नगर पालिका के सफाई दरोगा नाहर सिंह अपने सहयोगियों के साथ मौके पर पहुंच गए। पालिका अमले द्वारा पंप चलाकर पाइप द्वारा पानी सड़क पार नाले में डाले जाने पर लोगों ने जाम खोल दिया।
वहीं नगर पालिका की चेयरपर्सन अमनदीप कौर छोटी मंडी भी पहुंची और दुकानदारों को आश्वस्त किया कि इस बार तो जो हो गया हो गया आगे से पानी के निकास की दिक्कत नहीं आने दी जाएगी। अमनदीप ने कहा कि नगर पालिका पानी की निकासी के लिए एक मास्टर प्लान तैयार कर रही है जिस पर अमल होते ही शहर से पानी के निकास की समस्या पक्के तौर पर हल हो जाएगी।
गिरी मकान की छत, बाल-बाल बचा परिवार
गांव थेह नेवल में एक मकान की छत गिर गई। मगर खुशकिस्मती से नीचे सोया परिवार बाल-बाल बच गया। परिवार को चीका के एक अस्पताल में उपचार दिया जा रहा है। रात तकरीबन 2 बजे वाल्मीकि बस्ती निवासी राजकुमार के मकान की छत गिर गई। उस वक्त राजकुमार उसकी पत्नी अंजू व उसके तीन बच्चे उसी कमरे में सोए हुए थे। गांव वासियों को छत गिरने की खबर मिली तो उन्होंने आकर परिवार के पांचों लोगों को मलबे के नीचे से निकाला और चीका अस्पताल में भर्ती कराया। राजकुमार के मकान पर गार्डर व लकड़ी के बल्लों वाली छत थी। छत का गार्डर दीवार के एक तरफ से नीचे गिरा और कमरे के नीचे जमीन पर दीवार के साथ एक तरफ जा टिका। गार्डर गिरते ही ऊपर से लकड़ी के बल्ले, टाइलें व मिट्टी भरभराकर नीचे गिरने लगे। गनीमत ये रही कि ऊपर गार्डर अड़ा होने के कारण नीचे सोए परिवार के ऊपर कोई भी चीज सीधी नहीं गिरी गार्डर से टकराकर इधर-उधर छिटक गई। गांव वासी राज सिंह सीड़ा ने बताया कि जिस वक्त सूचना पाकर वह अन्य गांव वालों के साथ राजकुमार के घर पहुंचे तो उस वक्त सारा परिवार मलबे में दबा हुआ कराह रहा था। गांव वालों ने राजकुमार उसकी पत्नी अंजू, बेटी मनप्रीत, बेटे शंकर व बादल को मलबे से बाहर निकाला। पांचों लोग खतरे से बाहर बताए गए हैं।