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Kaithal News: गुहला-चीका में अरमानों पर बारिश ने फेरा पानी
Thu, 09 Oct 2025 01:33 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Thu, 09 Oct 2025 01:33 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुहला चीका। पिछले तीन दिनों से जारी मूसलाधार बारिश ने किसानों के अरमानों पर पानी फेर दिया है। लगातार बारिश से न केवल अनाज मंडियों में रखा धान भीग गया है, बल्कि कटाई के लिए तैयार खेतों में खड़ी धान की फसल भी भारी नुकसान के खतरे में है।
किसानों के अनुसार, बारिश में धान के भीगने से उसमें नमी की मात्रा बढ़ गई है, जिससे अब कोई एजेंसी इस धान को खरीदने को तैयार नहीं है। किसान गुरजंट सिंह, अवतार सिंह, मखन सिंह, गुरप्रीत सिंह और अमनप्रीत सिंह ने बताया कि इस बार अगेती धान की फसल में पहले बौने पौधे और इसके बाद बाढ़ व हल्दी रोग के कारण पैदावार लगभग 50 प्रतिशत तक घट गई है।
किसानों ने बताया कि पछेती धान में बीमारी का प्रभाव कम था, जिससे कुछ राहत मिली थी। लेकिन पिछले तीन दिनों से हो रही बारिश ने मंडियों में पड़े धान को नुकसान पहुँचाया और खेतों में पानी भर जाने से अब धान की कटाई करना मुश्किल हो गया है। किसानों का कहना है कि इस बार पैदावार में 50 प्रतिशत तक गिरावट से वे कर्ज के बोझ में दब गए हैं। उन्होंने सरकार से मांग की है कि बीमारी और बारिश से प्रभावित फसलों की विशेष गिरदावरी करवाई जाए और फसलों का मुआवजा दिया जाए।
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गुहला चीका। पिछले तीन दिनों से जारी मूसलाधार बारिश ने किसानों के अरमानों पर पानी फेर दिया है। लगातार बारिश से न केवल अनाज मंडियों में रखा धान भीग गया है, बल्कि कटाई के लिए तैयार खेतों में खड़ी धान की फसल भी भारी नुकसान के खतरे में है।
किसानों के अनुसार, बारिश में धान के भीगने से उसमें नमी की मात्रा बढ़ गई है, जिससे अब कोई एजेंसी इस धान को खरीदने को तैयार नहीं है। किसान गुरजंट सिंह, अवतार सिंह, मखन सिंह, गुरप्रीत सिंह और अमनप्रीत सिंह ने बताया कि इस बार अगेती धान की फसल में पहले बौने पौधे और इसके बाद बाढ़ व हल्दी रोग के कारण पैदावार लगभग 50 प्रतिशत तक घट गई है।
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किसानों ने बताया कि पछेती धान में बीमारी का प्रभाव कम था, जिससे कुछ राहत मिली थी। लेकिन पिछले तीन दिनों से हो रही बारिश ने मंडियों में पड़े धान को नुकसान पहुँचाया और खेतों में पानी भर जाने से अब धान की कटाई करना मुश्किल हो गया है। किसानों का कहना है कि इस बार पैदावार में 50 प्रतिशत तक गिरावट से वे कर्ज के बोझ में दब गए हैं। उन्होंने सरकार से मांग की है कि बीमारी और बारिश से प्रभावित फसलों की विशेष गिरदावरी करवाई जाए और फसलों का मुआवजा दिया जाए।
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