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सूखे ने फीकी की फिरनी की मिठास
ब्यूरो/अमर उजाला, कैथ्ाल
Updated Wed, 23 Jul 2014 11:48 PM IST
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कैथल। सूखे की चपेट में न केवल किसान, बल्कि देश-प्रदेश में मशहूर कैथल के फिरनी व्यवसाय को भी भारी नुकसान हो रहा है। फिरनी बनाने वाले हलवाई एवं इस कारोबार से जुड़े दूसरे लोगों को आशंका है कि यदि कुछ दिन ओर बरसात नहीं हुई तो वे नुकसान से उबर नहीं पाएंगे।
उन्हें इस समय दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। एक ओर जहां बरसात न होने के कारण फिरनी की बिक्री कम है, वहीं ग्राहकों को बनाए रखने एवं बरसात की उम्मीद में स्टॉक रखने के लिए फिरनी तैयार करने पर भारी भरकम खर्च करना पड़ रहा है।
सावन माह में कैथल में बनाई जानी वाली फिरनी को दूर-दराज तक पसंद किया जाता है। हरियाणा ही नहीं, यहां से पंजाब सहित अन्य प्रदेशों में फिरनी जाती है। तीज के उपलक्ष्य में बहनों के यहां दिए जाने वाले उपहारों में भी फिरनी सबसे प्रमुख रुप से शामिल रहती है।
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बरसात होने पर फिरनी का स्वाद बढ़ जाता है और इसकी बिक्री पर काफी असर पड़ता है। लेकिन इस बार लगातार सूखे के कारण फिरनी की बिक्री पर काफी असर पड़ा है। दुकानदार राजेश कुमार, शमशेर, मियां सिंह, बलबीर सिंह ने बताया कि पिछले साल के मुकाबले इस वर्ष 25 प्रतिशत ही ग्राहक हैं। पूरा दिन दुकान पर ग्राहकों को इंतजार करके लौट रहे हैं। दुकानदार सुनील कुमार, बलवान सिंह, सुकंद राम, राधेश्याम ने बताया कि फिरनी के कीमत 100 से लेकर 120 रुपये प्रति किलो तक है। वहीं घेवर 150 से लेकर 250 रुपये तक है।
सीजन को देखते हुए दुकानदारों ने लाखाें रुपयों का समान स्टॉक के रूप में लगाकर रखा है। लेकिन बरसात न होने के कारण सीजन पिटने की कगार पर है। आज तीज के केवल पांच दिन ही शेष हैं। अगर अच्छी बरसात नहीं हुई तो उनके लिए काफी परेशानियां खड़ी हो जाएंगी। इसके अलावा सूखे के कारण किसानों सहित लोगों को अपनी फसल बचानी मुश्किल हो रही है। ऐसे में वे इस ओर ध्यान नहीं दे रहे।
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उन्हें इस समय दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। एक ओर जहां बरसात न होने के कारण फिरनी की बिक्री कम है, वहीं ग्राहकों को बनाए रखने एवं बरसात की उम्मीद में स्टॉक रखने के लिए फिरनी तैयार करने पर भारी भरकम खर्च करना पड़ रहा है।
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सावन माह में कैथल में बनाई जानी वाली फिरनी को दूर-दराज तक पसंद किया जाता है। हरियाणा ही नहीं, यहां से पंजाब सहित अन्य प्रदेशों में फिरनी जाती है। तीज के उपलक्ष्य में बहनों के यहां दिए जाने वाले उपहारों में भी फिरनी सबसे प्रमुख रुप से शामिल रहती है।
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बरसात होने पर फिरनी का स्वाद बढ़ जाता है और इसकी बिक्री पर काफी असर पड़ता है। लेकिन इस बार लगातार सूखे के कारण फिरनी की बिक्री पर काफी असर पड़ा है। दुकानदार राजेश कुमार, शमशेर, मियां सिंह, बलबीर सिंह ने बताया कि पिछले साल के मुकाबले इस वर्ष 25 प्रतिशत ही ग्राहक हैं। पूरा दिन दुकान पर ग्राहकों को इंतजार करके लौट रहे हैं। दुकानदार सुनील कुमार, बलवान सिंह, सुकंद राम, राधेश्याम ने बताया कि फिरनी के कीमत 100 से लेकर 120 रुपये प्रति किलो तक है। वहीं घेवर 150 से लेकर 250 रुपये तक है।
सीजन को देखते हुए दुकानदारों ने लाखाें रुपयों का समान स्टॉक के रूप में लगाकर रखा है। लेकिन बरसात न होने के कारण सीजन पिटने की कगार पर है। आज तीज के केवल पांच दिन ही शेष हैं। अगर अच्छी बरसात नहीं हुई तो उनके लिए काफी परेशानियां खड़ी हो जाएंगी। इसके अलावा सूखे के कारण किसानों सहित लोगों को अपनी फसल बचानी मुश्किल हो रही है। ऐसे में वे इस ओर ध्यान नहीं दे रहे।