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Kaithal News: जन स्वास्थ्य विभाग का पानी पीने लायक नहीं, मोल के पानी पर 51.30 लाख खर्च
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। शहर के कई इलाकों में नलों से आ रहा पानी पीने योग्य नहीं है। कहीं पानी रेतीला है तो कहीं बदबूदार, जिससे लोगों को मजबूरी में पीने का पानी बाजार से खरीदना पड़ रहा है। इस स्थिति का सीधा फायदा निजी आरओ प्लांट, कैंपर सप्लाई और बोतलबंद पानी बेचने वाली एजेंसियों को मिल रहा है। आंकड़ों पर नजर डालें तो जन स्वास्थ्य विभाग की गंदे पानी की सप्लाई के चलते शहरवासी हर महीने करीब 51 लाख 30 हजार रुपये सिर्फ पीने के पानी पर खर्च करने को मजबूर हैं।
शहर में वर्तमान में 22 निजी आरओ प्लांट संचालित हैं। एक आरओ प्लांट से रोजाना औसतन 300 कैंपर सप्लाई किए जा रहे हैं। इस तरह शहर में प्रतिदिन करीब 6000 कैंपर विभिन्न सरकारी-निजी कार्यालयों, दुकानों और घरों तक पहुंच रहे हैं। एक कैंपर की कीमत लगभग 15 रुपये है। इस हिसाब से केवल कैंपर सप्लाई से रोजाना करीब 99 हजार रुपये और महीने में लगभग 29.70 लाख रुपये का कारोबार हो रहा है।
शहर में बंद बोतल पानी की चार अलग-अलग एजेंसियां सक्रिय हैं। एक एजेंसी से रोजाना करीब 1200 लीटर पानी सप्लाई होता है। चारों एजेंसियों से मिलाकर प्रतिदिन 4800 लीटर पानी बोतलों में बेचा जा रहा है। एक लीटर बोतल की कीमत औसतन 15 रुपये है। इस तरह बोतलबंद पानी से रोजाना करीब 72 हजार रुपये और महीने में 21.60 लाख रुपये का कारोबार हो रहा है। इन दोनों को जोड़कर देखें तो शहरवासी हर महीने करीब 51.30 लाख रुपये सिर्फ इसलिए खर्च कर रहे हैं, क्योंकि जन स्वास्थ्य विभाग की ओर से सप्लाई किया जाने वाला पानी पीने योग्य नहीं है। हैरानी यह है कि निजी आरओ प्लांट और बोतलबंद पानी की गुणवत्ता मानकों पर खरी उतरती है या नहीं, इसकी नियमित जांच भी नहीं की जा रही।
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जलघरों में सफाई व्यवस्था लचर
शहर में दो जल घर हैं, जहां से नहरी पानी की सप्लाई की जाती है। विभाग का दावा है कि साफ-सफाई और देखरेख के लिए आठ कर्मचारी तैनात हैं, लेकिन हकीकत यह है कि जल घरों में सफाई व्यवस्था न के बराबर है। अर्जुन नगर, माता गेट, प्रताप गेट सहित कई इलाकों में सप्लाई होने वाला पानी रेतीला और गंदा आ रहा है। लोग आरओ प्लांट से पानी खरीदकर ला रहे हैं।
एक नजर ः शहर में कुछ निजी आरओ प्लांट 170 रुपये प्रतिमाह के हिसाब से रोजाना 10 लीटर पानी सप्लाई कर रहे हैं। शहर में रोजाना करीब 53 मिलियन लीटर पानी की सप्लाई दो समय में 47 ट्यूबवेल से की जाती है। पयोदा रोड पर बने पांच वॉटर स्टोरेज टैंक में लगभग एक माह तक पानी स्टोर रहता है। इसके बावजूद गंदे पानी की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा।
शहर के कई इलाकों में सप्लाई होने वाला पानी पीने योग्य नहीं है। लोगों का मानना है कि यदि यह पानी पी लिया जाए तो बीमारियों का खतरा बना रहता है। लोग मजबूरी में पानी खरीदकर पी रहे हैं। -रामकुमार
शहर के कई इलाकों में सप्लाई होने वाला पानी पीने योग्य नहीं है। लोगों का मानना है कि यदि यह पानी पी लिया जाए तो बीमारियों का खतरा बना रहता है। लोग मजबूरी में पानी खरीदकर पी रहे हैं। -रामकुमार
शहर में जहां भी पानी की समस्या सामने आती है, वहां तुरंत समाधान कराया जाता है। कुछ इलाकों में नए ट्यूबवेल लगाए जाने हैं, जिसके लिए जगह चिह्िनत की जा रही है। कई कॉलोनियों में नई पाइपलाइन डालने की योजना भी तैयार की गई हैै। -गोपाल वैद, एसडीओ-जनस्वास्थ्य विभाग
स्रोत
रोजाना सप्लाई
कीमत
रोजाना खर्च
मासिक खर्च (30 दिन)
निजी आरओ प्लांट
6,600 कैंपर 15 प्रति कैंपर 99,000
29,70,000
बोतलबंद पानी
4,800 लीटर
15 प्रति लीटर
72,000
21,60,000
कुल
—
—
1,71,000
51,30,000
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कैथल। शहर के कई इलाकों में नलों से आ रहा पानी पीने योग्य नहीं है। कहीं पानी रेतीला है तो कहीं बदबूदार, जिससे लोगों को मजबूरी में पीने का पानी बाजार से खरीदना पड़ रहा है। इस स्थिति का सीधा फायदा निजी आरओ प्लांट, कैंपर सप्लाई और बोतलबंद पानी बेचने वाली एजेंसियों को मिल रहा है। आंकड़ों पर नजर डालें तो जन स्वास्थ्य विभाग की गंदे पानी की सप्लाई के चलते शहरवासी हर महीने करीब 51 लाख 30 हजार रुपये सिर्फ पीने के पानी पर खर्च करने को मजबूर हैं।
शहर में वर्तमान में 22 निजी आरओ प्लांट संचालित हैं। एक आरओ प्लांट से रोजाना औसतन 300 कैंपर सप्लाई किए जा रहे हैं। इस तरह शहर में प्रतिदिन करीब 6000 कैंपर विभिन्न सरकारी-निजी कार्यालयों, दुकानों और घरों तक पहुंच रहे हैं। एक कैंपर की कीमत लगभग 15 रुपये है। इस हिसाब से केवल कैंपर सप्लाई से रोजाना करीब 99 हजार रुपये और महीने में लगभग 29.70 लाख रुपये का कारोबार हो रहा है।
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शहर में बंद बोतल पानी की चार अलग-अलग एजेंसियां सक्रिय हैं। एक एजेंसी से रोजाना करीब 1200 लीटर पानी सप्लाई होता है। चारों एजेंसियों से मिलाकर प्रतिदिन 4800 लीटर पानी बोतलों में बेचा जा रहा है। एक लीटर बोतल की कीमत औसतन 15 रुपये है। इस तरह बोतलबंद पानी से रोजाना करीब 72 हजार रुपये और महीने में 21.60 लाख रुपये का कारोबार हो रहा है। इन दोनों को जोड़कर देखें तो शहरवासी हर महीने करीब 51.30 लाख रुपये सिर्फ इसलिए खर्च कर रहे हैं, क्योंकि जन स्वास्थ्य विभाग की ओर से सप्लाई किया जाने वाला पानी पीने योग्य नहीं है। हैरानी यह है कि निजी आरओ प्लांट और बोतलबंद पानी की गुणवत्ता मानकों पर खरी उतरती है या नहीं, इसकी नियमित जांच भी नहीं की जा रही।
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जलघरों में सफाई व्यवस्था लचर
शहर में दो जल घर हैं, जहां से नहरी पानी की सप्लाई की जाती है। विभाग का दावा है कि साफ-सफाई और देखरेख के लिए आठ कर्मचारी तैनात हैं, लेकिन हकीकत यह है कि जल घरों में सफाई व्यवस्था न के बराबर है। अर्जुन नगर, माता गेट, प्रताप गेट सहित कई इलाकों में सप्लाई होने वाला पानी रेतीला और गंदा आ रहा है। लोग आरओ प्लांट से पानी खरीदकर ला रहे हैं।
एक नजर ः शहर में कुछ निजी आरओ प्लांट 170 रुपये प्रतिमाह के हिसाब से रोजाना 10 लीटर पानी सप्लाई कर रहे हैं। शहर में रोजाना करीब 53 मिलियन लीटर पानी की सप्लाई दो समय में 47 ट्यूबवेल से की जाती है। पयोदा रोड पर बने पांच वॉटर स्टोरेज टैंक में लगभग एक माह तक पानी स्टोर रहता है। इसके बावजूद गंदे पानी की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा।
शहर के कई इलाकों में सप्लाई होने वाला पानी पीने योग्य नहीं है। लोगों का मानना है कि यदि यह पानी पी लिया जाए तो बीमारियों का खतरा बना रहता है। लोग मजबूरी में पानी खरीदकर पी रहे हैं। -रामकुमार
शहर के कई इलाकों में सप्लाई होने वाला पानी पीने योग्य नहीं है। लोगों का मानना है कि यदि यह पानी पी लिया जाए तो बीमारियों का खतरा बना रहता है। लोग मजबूरी में पानी खरीदकर पी रहे हैं। -रामकुमार
शहर में जहां भी पानी की समस्या सामने आती है, वहां तुरंत समाधान कराया जाता है। कुछ इलाकों में नए ट्यूबवेल लगाए जाने हैं, जिसके लिए जगह चिह्िनत की जा रही है। कई कॉलोनियों में नई पाइपलाइन डालने की योजना भी तैयार की गई हैै। -गोपाल वैद, एसडीओ-जनस्वास्थ्य विभाग
स्रोत
रोजाना सप्लाई
कीमत
रोजाना खर्च
मासिक खर्च (30 दिन)
निजी आरओ प्लांट
6,600 कैंपर 15 प्रति कैंपर 99,000
29,70,000
बोतलबंद पानी
4,800 लीटर
15 प्रति लीटर
72,000
21,60,000
कुल
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1,71,000
51,30,000