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Kaithal News: भिक्षावृत्ति के लिए दोषी मिलने पर सजा, जुर्माने का प्रावधान
Thu, 30 Jan 2025 01:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Thu, 30 Jan 2025 01:13 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी कलायत के कार्यालय में बुधवार को प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें जानकारी दी गई कि यदि कोई भी व्यक्ति या माता-पिता आदि बच्चों से बाल भिक्षावृत्ति करवाते है, करने के लिए उकसाते है या बाल भिक्षावृत्ति के लिए कारण बनते है और बाल भिक्षावृत्ति के लिए दोषी पाए जाते है तो ऐसे व्यक्तियों के लिए पांच साल की सजा व एक लाख रुपये जुर्माना का प्रावधान है।
कार्यक्रम में जिला बाल संरक्षण इकाई से मौजूद सुरेश कुमार एवं सोनू आउटरीच वर्कर की ओर से बाल श्रम, पॉक्सो एक्ट,जेजे एक्ट, स्पोंसरशिप स्कीम, चाइल्ड लाइन 1098 इत्यादि के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बाल श्रम के बारे में जानकारी दी। साथ ही सभी से अपील की कि यदि कोई बच्चा बाल भिक्षावृत्ति में संलिप्त मिलता है तो उसकी जानकारी तुंरत चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर दें।
उन्होंने पॉक्सो एक्ट 2012 एवं जेजे एक्ट पर भी विस्तार से जानकारी दी। उनके द्वारा बताया गया कि बच्चों के साथ होने वाले शोषण को रोकने के लिए समिति व पुलिस प्रशासन को भी जानकारी देने में आगे आए। जब भी किसी बच्चे के साथ शोषण होता देखें या उन्हें कोई लावारिस बच्चा मिले तो तुरंत पुलिस में या समिति के कार्यालय में सूचना दें, ताकि मामले में पूरी कार्रवाई की जा सके।
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उन्होंने आर्थिक सहायता (स्पॉन्सरशिप) योजना के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। इसके तहत 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को चार हजार रुपये प्रतिमाह दिए जा रहे हैं। उन्होंनेे बताया कि योजना का लाभ उसी परिवार को दिया जा रहा है, जहां मां विधवा, तलाकशुदा है। इसके अलावा जहां बच्चे अनाथ है और विस्तारित परिवार के साथ रह रहे हैं। माता-पिता जीवन को खतरे में डालने वाली या टर्मिनल बीमारी के शिकार है। माता-पिता आर्थिक और शारीरिक रूप से बच्चों की देखभाल करने में अक्षम या असमर्थ हो।
उन्होंनेे बताया कि ग्रामीण क्षेत्र में परिवार की आय 72 हजार रुपये व शहरी क्षेत्र में 96 हजार रुपये वार्षिक हो पढ़ाई के लिए योजना का लाभ ले सकते हैं। उन्होंनेे बताया कि योजना का लाभ लेने के लिए बच्चे का आधार कार्ड, अभिभावक का
आधार कार्ड, परिवार पहचान पत्र, अतिरिक्त उपायुक्त की ओर से सत्यापित आय प्रमाणपत्र जैसे दस्तावेज
सहित मृत्यु प्रमाणपत्र (यदि
अभिभावक की मृत्यु हो चुकी है तो) व बच्चों के बैंक खाते की विवरण की फोटो प्रति अनिवार्य है।
बाल विवाह रोकने के लिए सार्थक कदम उठाने को किया प्रेरित
इस मौके पर जिला बाल संरक्षण इकाई से सुरेश, सोनू, महिला एवं बाल विकास विभाग से सुपरवाइजर, सभी ब्लॉक आंगनबाडी वर्कर आदि उपस्थित रहें।
कैथल। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के वैकल्पिक विवाद समाधान केंद्र के सभागार में जिला सत्र न्यायाधीश रितू वाई के बहल के निर्देश पर शक्ति अभियान बाल विवाह के खिलाफ आंदोलन के तहत एक कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें बाल विवाह रोकने के लिए सार्थक कदम उठाने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यशाला में पुलिस अधिकारियों के साथ स्वास्थ्य विभाग के डाॅक्टरों ने हिस्सा लिया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के पैनल अधिवक्ता अरविंद खुरानिया ने बाल विवाह निषेध कानून 2006 की जानकारी दी। कार्यशाला को बाल विवाह निषेध अधिकारी सुनीता शर्मा ने भी संबोधित किया। बताया गया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की हेल्पलाइन नंबर 01746-235759 पर किसी भी तरह की कानूनी या सामाजिक समस्या के बारे में भी बात कर सकते हैं।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य पूरे जिले में आमजन को इस बुराई की रोकथाम करने बारे व बाल विवाह को रोकने के लिए सार्थक कदम उठाने बारे प्रेरित करना है। निकट भविष्य में इस कार्यशाला के माध्यम से अच्छे परिणाम आने के संभावना है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी रितु ने बताया कि विभिन्न वर्गों को अलग अलग कानूनों की जानकारियां उपलब्ध करवा रहा है, ताकि आम नागरिकों के कानूनी अधिकारों की सुरक्षा की जा सके और वांछित व्यक्ति/महिला इत्यादि कानून में दिए गए प्रावधानों की जानकारी रखते हुए अपने हितों की रक्षा कर सकें। संवाद
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कैथल। महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी कलायत के कार्यालय में बुधवार को प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें जानकारी दी गई कि यदि कोई भी व्यक्ति या माता-पिता आदि बच्चों से बाल भिक्षावृत्ति करवाते है, करने के लिए उकसाते है या बाल भिक्षावृत्ति के लिए कारण बनते है और बाल भिक्षावृत्ति के लिए दोषी पाए जाते है तो ऐसे व्यक्तियों के लिए पांच साल की सजा व एक लाख रुपये जुर्माना का प्रावधान है।
कार्यक्रम में जिला बाल संरक्षण इकाई से मौजूद सुरेश कुमार एवं सोनू आउटरीच वर्कर की ओर से बाल श्रम, पॉक्सो एक्ट,जेजे एक्ट, स्पोंसरशिप स्कीम, चाइल्ड लाइन 1098 इत्यादि के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बाल श्रम के बारे में जानकारी दी। साथ ही सभी से अपील की कि यदि कोई बच्चा बाल भिक्षावृत्ति में संलिप्त मिलता है तो उसकी जानकारी तुंरत चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर दें।
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उन्होंने पॉक्सो एक्ट 2012 एवं जेजे एक्ट पर भी विस्तार से जानकारी दी। उनके द्वारा बताया गया कि बच्चों के साथ होने वाले शोषण को रोकने के लिए समिति व पुलिस प्रशासन को भी जानकारी देने में आगे आए। जब भी किसी बच्चे के साथ शोषण होता देखें या उन्हें कोई लावारिस बच्चा मिले तो तुरंत पुलिस में या समिति के कार्यालय में सूचना दें, ताकि मामले में पूरी कार्रवाई की जा सके।
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उन्होंने आर्थिक सहायता (स्पॉन्सरशिप) योजना के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। इसके तहत 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को चार हजार रुपये प्रतिमाह दिए जा रहे हैं। उन्होंनेे बताया कि योजना का लाभ उसी परिवार को दिया जा रहा है, जहां मां विधवा, तलाकशुदा है। इसके अलावा जहां बच्चे अनाथ है और विस्तारित परिवार के साथ रह रहे हैं। माता-पिता जीवन को खतरे में डालने वाली या टर्मिनल बीमारी के शिकार है। माता-पिता आर्थिक और शारीरिक रूप से बच्चों की देखभाल करने में अक्षम या असमर्थ हो।
उन्होंनेे बताया कि ग्रामीण क्षेत्र में परिवार की आय 72 हजार रुपये व शहरी क्षेत्र में 96 हजार रुपये वार्षिक हो पढ़ाई के लिए योजना का लाभ ले सकते हैं। उन्होंनेे बताया कि योजना का लाभ लेने के लिए बच्चे का आधार कार्ड, अभिभावक का
आधार कार्ड, परिवार पहचान पत्र, अतिरिक्त उपायुक्त की ओर से सत्यापित आय प्रमाणपत्र जैसे दस्तावेज
सहित मृत्यु प्रमाणपत्र (यदि
अभिभावक की मृत्यु हो चुकी है तो) व बच्चों के बैंक खाते की विवरण की फोटो प्रति अनिवार्य है।
बाल विवाह रोकने के लिए सार्थक कदम उठाने को किया प्रेरित
इस मौके पर जिला बाल संरक्षण इकाई से सुरेश, सोनू, महिला एवं बाल विकास विभाग से सुपरवाइजर, सभी ब्लॉक आंगनबाडी वर्कर आदि उपस्थित रहें।
कैथल। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के वैकल्पिक विवाद समाधान केंद्र के सभागार में जिला सत्र न्यायाधीश रितू वाई के बहल के निर्देश पर शक्ति अभियान बाल विवाह के खिलाफ आंदोलन के तहत एक कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें बाल विवाह रोकने के लिए सार्थक कदम उठाने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यशाला में पुलिस अधिकारियों के साथ स्वास्थ्य विभाग के डाॅक्टरों ने हिस्सा लिया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के पैनल अधिवक्ता अरविंद खुरानिया ने बाल विवाह निषेध कानून 2006 की जानकारी दी। कार्यशाला को बाल विवाह निषेध अधिकारी सुनीता शर्मा ने भी संबोधित किया। बताया गया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की हेल्पलाइन नंबर 01746-235759 पर किसी भी तरह की कानूनी या सामाजिक समस्या के बारे में भी बात कर सकते हैं।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य पूरे जिले में आमजन को इस बुराई की रोकथाम करने बारे व बाल विवाह को रोकने के लिए सार्थक कदम उठाने बारे प्रेरित करना है। निकट भविष्य में इस कार्यशाला के माध्यम से अच्छे परिणाम आने के संभावना है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी रितु ने बताया कि विभिन्न वर्गों को अलग अलग कानूनों की जानकारियां उपलब्ध करवा रहा है, ताकि आम नागरिकों के कानूनी अधिकारों की सुरक्षा की जा सके और वांछित व्यक्ति/महिला इत्यादि कानून में दिए गए प्रावधानों की जानकारी रखते हुए अपने हितों की रक्षा कर सकें। संवाद