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Kaithal News: गुप्त नवरात्र में करें 10 महाविद्याओं की साधना
Tue, 24 Jun 2025 01:28 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Tue, 24 Jun 2025 01:28 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल/कलायत। हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तिथि तक मनाए जाने वाले गुप्त नवरात्र इस वर्ष 26 जून से प्रारंभ होकर 4 जुलाई तक चलेंगे। गुप्त नवरात्र पर 10 महाविद्याओं की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। यह समय महाकाली एवं भगवान शिव की साधना करने वाले तंत्र साधकों के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है।
पंडित विशाल शांडिल्य ने बताया कि इन नवरात्रों में साधक विशेष रूप से तांत्रिक उपासना, ध्यान और अनुष्ठान करते हैं। दस महाविद्याएं- मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की साधना का शास्त्रों में विशिष्ट विधान है।
गुप्त नवरात्र के लाभ ः पंडित शांडिल्य के अनुसार, इन दिनों की गई साधना जन्मकुंडली के दोषों को दूर कर चारों पुरुषार्थ- धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति में सहायक होती है। सबसे प्रभावशाली समय मध्यरात्रि से सूर्योदय तक का माना गया है। प्रतिपदा से नवमी तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है।
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पं. प्रेम शंकर शास्त्री ने बताया कि गुप्त नवरात्रि लोगों के बीच ज्यादा प्रचलित नहीं है, जिसके पीछे का कारण यही है कि इसमें तंत्र मंत्र के साधक ज्यादा साधना रखते हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष में कुल चार नवरात्र होते हैं चैत्र, शारदीय, और दो गुप्त नवरात्र (आषाढ़ व माघ मास में)। आषाढ़ गुप्त नवरात्र में देवी की दस महाविद्याओं की साधना का विशेष महत्व होता है।
गुप्त नवरात्र केवल साधना की गहराई और तांत्रिक प्रक्रिया के कारण विशेष मानी जाती है, इसलिए इसे आमतौर पर हर कोई नहीं मनाता। उन्होंने यह भी कहा कि तामसिक भोजन जैसे- मांस, प्याज, लहसुन आदि का सेवन नहीं करना चाहिए। साथ ही, इस अवधि के दौरान मदिरा से भी दूरी बनाकर रखनी चाहिए। नहीं तो पूजा का फल प्राप्त नहीं होता।
आषाढ़ गुप्त नवरात्र की तिथि और शुभ मुहूर्त
पं. विशाल शांडिल्य ने बताया कि 25 जून को शाम 4:00 बजे से प्रतिपदा तिथि शुरू होगी, लेकिन उदयातिथि मान्यता के अनुसार 26 जून को गुप्त नवरात्र की शुरुआत होगी। घट स्थापना (कलश स्थापना) के लिए शुभ मुहूर्त 26 जून को सुबह 4:33 से 6:05 बजे तक रहेगा। इस दिन ध्रुव योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग भी बन रहा है, जो साधकों के लिए विशेष फलदायक रहेगा। इन योगों में मां दुर्गा की आराधना करने से साधक की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
पंडित रविदत्त शास्त्री ने बताया कि चैत्र नवरात्र और शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। वहीं, गुप्त नवरात्रि में देवी की 10 महाविद्याओं की साधना की जाती है। इस दौरान तांत्रिक, अघोरी तंत्र मंत्र और सिद्धि प्राप्त करते हैं। ऐसे में गुप्त नवरात्र का महत्व बहुत विशेष होता है। इस दौरान देवी की साधना करने से मनोकामनाएं पूर्ण हो सकती हैं।
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कैथल/कलायत। हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तिथि तक मनाए जाने वाले गुप्त नवरात्र इस वर्ष 26 जून से प्रारंभ होकर 4 जुलाई तक चलेंगे। गुप्त नवरात्र पर 10 महाविद्याओं की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। यह समय महाकाली एवं भगवान शिव की साधना करने वाले तंत्र साधकों के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है।
पंडित विशाल शांडिल्य ने बताया कि इन नवरात्रों में साधक विशेष रूप से तांत्रिक उपासना, ध्यान और अनुष्ठान करते हैं। दस महाविद्याएं- मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की साधना का शास्त्रों में विशिष्ट विधान है।
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गुप्त नवरात्र के लाभ ः पंडित शांडिल्य के अनुसार, इन दिनों की गई साधना जन्मकुंडली के दोषों को दूर कर चारों पुरुषार्थ- धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति में सहायक होती है। सबसे प्रभावशाली समय मध्यरात्रि से सूर्योदय तक का माना गया है। प्रतिपदा से नवमी तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है।
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पं. प्रेम शंकर शास्त्री ने बताया कि गुप्त नवरात्रि लोगों के बीच ज्यादा प्रचलित नहीं है, जिसके पीछे का कारण यही है कि इसमें तंत्र मंत्र के साधक ज्यादा साधना रखते हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष में कुल चार नवरात्र होते हैं चैत्र, शारदीय, और दो गुप्त नवरात्र (आषाढ़ व माघ मास में)। आषाढ़ गुप्त नवरात्र में देवी की दस महाविद्याओं की साधना का विशेष महत्व होता है।
गुप्त नवरात्र केवल साधना की गहराई और तांत्रिक प्रक्रिया के कारण विशेष मानी जाती है, इसलिए इसे आमतौर पर हर कोई नहीं मनाता। उन्होंने यह भी कहा कि तामसिक भोजन जैसे- मांस, प्याज, लहसुन आदि का सेवन नहीं करना चाहिए। साथ ही, इस अवधि के दौरान मदिरा से भी दूरी बनाकर रखनी चाहिए। नहीं तो पूजा का फल प्राप्त नहीं होता।
आषाढ़ गुप्त नवरात्र की तिथि और शुभ मुहूर्त
पं. विशाल शांडिल्य ने बताया कि 25 जून को शाम 4:00 बजे से प्रतिपदा तिथि शुरू होगी, लेकिन उदयातिथि मान्यता के अनुसार 26 जून को गुप्त नवरात्र की शुरुआत होगी। घट स्थापना (कलश स्थापना) के लिए शुभ मुहूर्त 26 जून को सुबह 4:33 से 6:05 बजे तक रहेगा। इस दिन ध्रुव योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग भी बन रहा है, जो साधकों के लिए विशेष फलदायक रहेगा। इन योगों में मां दुर्गा की आराधना करने से साधक की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
पंडित रविदत्त शास्त्री ने बताया कि चैत्र नवरात्र और शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। वहीं, गुप्त नवरात्रि में देवी की 10 महाविद्याओं की साधना की जाती है। इस दौरान तांत्रिक, अघोरी तंत्र मंत्र और सिद्धि प्राप्त करते हैं। ऐसे में गुप्त नवरात्र का महत्व बहुत विशेष होता है। इस दौरान देवी की साधना करने से मनोकामनाएं पूर्ण हो सकती हैं।