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Kaithal News: प्रदूषण का असर, सांस की बीमारियों से जूझ रहे लोग
Thu, 23 Oct 2025 01:12 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Thu, 23 Oct 2025 01:12 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। दिवाली के बाद वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ने से अस्पतालों में मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। बुधवार को शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एयर क्वालिटी इंडेक्स- एक्यूआई) 231 दर्ज किया गया। यह बीते दिन 273 से कम था लेकिन यह भी खराब श्रेणी में गिना जाता है। उधर, इसका असर नागरिक अस्पताल की ओपीडी में दिखा, जहां सांस लेने में तकलीफ के 40 से अधिक मरीज पहुंचे।
वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. राकेश गुप्ता ने बताया कि पिछले वर्षों की तुलना में इस बार दिवाली के बाद गंभीर मामले कुछ कम देखने को मिले हैं। उन्होंने कहा कि इस बार त्योहार जल्दी आने और मौसम के अपेक्षाकृत गर्म रहने के साथ-साथ हवा की दिशा अनुकूल होने से प्रदूषण का स्तर थोड़ा नियंत्रित रहा। फिर भी अस्थमा, सीओपीडी और पुरानी बीमारियों से पीड़ित मरीजों के लक्षणों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
डॉ. गुप्ता ने चिंता जताई कि दिवाली के बाद हवा की गुणवत्ता में गिरावट पहले की तुलना में अधिक देखी जा रही है। लोगों में सीने में जकड़न, गले में जलन, लगातार खांसी और सांस फूलने जैसी शिकायतें आम हो गई हैं। उन्होंने कहा कि पिछले साल की तुलना में इस बार दिवाली के बाद सांस की बीमारियों की संख्या और गंभीरता दोनों में वृद्धि हुई है।
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डॉक्टरों ने लोगों से अपील की है कि वायु प्रदूषण देखते हुए सुबह और शाम के समय बाहर निकलने से बचें। बाहर जाने पर मास्क का प्रयोग करें और फेफड़ों की सेहत का विशेष ध्यान रखें।
सांस के जरिए सीधे फेफड़ों में पहुंचते हैं सूक्ष्म कण
विशेषज्ञों के अनुसार, हवा में मौजूद PM2.5 और PM10 जैसे सूक्ष्म कण बहुत छोटे होते हैं, जो सांस के जरिए सीधे फेफड़ों में पहुंचकर बीमारियां बढ़ा देते हैं। दिवाली पर पटाखों से निकलने वाला धुआं इन कणों की मात्रा को बढ़ा देता है। साथ ही, जब हवा शांत होती है और तेज नहीं चलती, तो यह प्रदूषण वातावरण में जमा रहता है। वहीं पराली जलाने से भी हवा में प्रदूषण के कणों की संख्या बढ़ जाती है, जो दूर-दूर तक फैलते हैं। इन सभी कारणों से दिवाली के बाद सांस संबंधी बीमारियों के मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा देखा जा रहा है।
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कैथल। दिवाली के बाद वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ने से अस्पतालों में मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। बुधवार को शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एयर क्वालिटी इंडेक्स- एक्यूआई) 231 दर्ज किया गया। यह बीते दिन 273 से कम था लेकिन यह भी खराब श्रेणी में गिना जाता है। उधर, इसका असर नागरिक अस्पताल की ओपीडी में दिखा, जहां सांस लेने में तकलीफ के 40 से अधिक मरीज पहुंचे।
वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. राकेश गुप्ता ने बताया कि पिछले वर्षों की तुलना में इस बार दिवाली के बाद गंभीर मामले कुछ कम देखने को मिले हैं। उन्होंने कहा कि इस बार त्योहार जल्दी आने और मौसम के अपेक्षाकृत गर्म रहने के साथ-साथ हवा की दिशा अनुकूल होने से प्रदूषण का स्तर थोड़ा नियंत्रित रहा। फिर भी अस्थमा, सीओपीडी और पुरानी बीमारियों से पीड़ित मरीजों के लक्षणों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
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डॉ. गुप्ता ने चिंता जताई कि दिवाली के बाद हवा की गुणवत्ता में गिरावट पहले की तुलना में अधिक देखी जा रही है। लोगों में सीने में जकड़न, गले में जलन, लगातार खांसी और सांस फूलने जैसी शिकायतें आम हो गई हैं। उन्होंने कहा कि पिछले साल की तुलना में इस बार दिवाली के बाद सांस की बीमारियों की संख्या और गंभीरता दोनों में वृद्धि हुई है।
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डॉक्टरों ने लोगों से अपील की है कि वायु प्रदूषण देखते हुए सुबह और शाम के समय बाहर निकलने से बचें। बाहर जाने पर मास्क का प्रयोग करें और फेफड़ों की सेहत का विशेष ध्यान रखें।
सांस के जरिए सीधे फेफड़ों में पहुंचते हैं सूक्ष्म कण
विशेषज्ञों के अनुसार, हवा में मौजूद PM2.5 और PM10 जैसे सूक्ष्म कण बहुत छोटे होते हैं, जो सांस के जरिए सीधे फेफड़ों में पहुंचकर बीमारियां बढ़ा देते हैं। दिवाली पर पटाखों से निकलने वाला धुआं इन कणों की मात्रा को बढ़ा देता है। साथ ही, जब हवा शांत होती है और तेज नहीं चलती, तो यह प्रदूषण वातावरण में जमा रहता है। वहीं पराली जलाने से भी हवा में प्रदूषण के कणों की संख्या बढ़ जाती है, जो दूर-दूर तक फैलते हैं। इन सभी कारणों से दिवाली के बाद सांस संबंधी बीमारियों के मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा देखा जा रहा है।