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Kaithal News: बेटे की जीत पर छलकीं खुशियां, हरविंदर ने बढ़ाया कैथल का मान
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हरविंदर के पिता व भाई को मिठाई खिलाकर जीत की बधाई देती बहन संदीप कौर। संवाद
कैथल। जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियन पैरा गेम्स 2026 में कैथल के पैरा तीरंदाज हरविंदर सिंह ने स्वर्ण पदक जीतकर देश और जिले का नाम रोशन किया है।
कैथल के हरविंदर सिंह और झारखंड के विजय सुंडी की भारतीय जोड़ी ने पुरुष रिकर्व युगल स्पर्धा के फाइनल में चीन के डुओ युन और झाओ लिक्सुए को 5-1 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
हरविंद्र की उपलबि्ध से उनके परिवार में खुशी का माहाैल है। परिजनों ने एक दूसरे को मिठाई खिलाकर एक-दूसरे को बधाई दी। परिवार वालों ने बताया कि हरविंदर खेल के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र में भी आगे बढ़ रहे हैं और पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला से अर्थशास्त्र में पीएचडी कर रहे हैं।
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एशियन पैरा गेम्स में स्वर्ण पदक जीतना उनकी मेहनत, दृढ़ इच्छाशक्ति और निरंतर अभ्यास का परिणाम है। पदक जीतने के बाद परिवार में खुशी का माहौल है। परिवार के सदस्यों ने एक दूसरे को मिठाई खिलाकर हरविंदर की जीत का जश्न मनाया। वहीं पड़ोसी और क्षेत्र के जाने माने लोग भी हरविंदर की जीत पर फोन के माध्यम से उन्हें और उनके परिवार को लगातार बधाई संदेश भेज रहे हैं।
मुश्किलों के सामने भी नहीं मानी हार, जारी रखा अभ्यास
हरविंदर सिंह कैथल के गुहला के गांव अजीत नगर के रहने वाले हैं। उनका जन्म 25 फरवरी 1991 को हुआ था। डेढ़ साल की उम्र में डेंगू होने के बाद उपचार के दौरान इंजेक्शन के दुष्प्रभावों से उनको पोलियो हो गया था। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और तीरंदाजी में अपनी अलग पहचान बनाई। हरविंदर ने 2017 में पैरा तीरंदाजी विश्व चैंपियनशिप में पदार्पण किया था। वर्ष 2018 में जकार्ता एशियाई पैरा खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने प्रतिभा साबित की। कोविड महामारी के दौरान उनके पिता परमजीत सिंह ने खेत में ही तीरंदाजी अभ्यास के लिए व्यवस्था की, ताकि उनका प्रशिक्षण जारी रह सके।
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कैथल के हरविंदर सिंह और झारखंड के विजय सुंडी की भारतीय जोड़ी ने पुरुष रिकर्व युगल स्पर्धा के फाइनल में चीन के डुओ युन और झाओ लिक्सुए को 5-1 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
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हरविंद्र की उपलबि्ध से उनके परिवार में खुशी का माहाैल है। परिजनों ने एक दूसरे को मिठाई खिलाकर एक-दूसरे को बधाई दी। परिवार वालों ने बताया कि हरविंदर खेल के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र में भी आगे बढ़ रहे हैं और पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला से अर्थशास्त्र में पीएचडी कर रहे हैं।
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एशियन पैरा गेम्स में स्वर्ण पदक जीतना उनकी मेहनत, दृढ़ इच्छाशक्ति और निरंतर अभ्यास का परिणाम है। पदक जीतने के बाद परिवार में खुशी का माहौल है। परिवार के सदस्यों ने एक दूसरे को मिठाई खिलाकर हरविंदर की जीत का जश्न मनाया। वहीं पड़ोसी और क्षेत्र के जाने माने लोग भी हरविंदर की जीत पर फोन के माध्यम से उन्हें और उनके परिवार को लगातार बधाई संदेश भेज रहे हैं।
मुश्किलों के सामने भी नहीं मानी हार, जारी रखा अभ्यास
हरविंदर सिंह कैथल के गुहला के गांव अजीत नगर के रहने वाले हैं। उनका जन्म 25 फरवरी 1991 को हुआ था। डेढ़ साल की उम्र में डेंगू होने के बाद उपचार के दौरान इंजेक्शन के दुष्प्रभावों से उनको पोलियो हो गया था। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और तीरंदाजी में अपनी अलग पहचान बनाई। हरविंदर ने 2017 में पैरा तीरंदाजी विश्व चैंपियनशिप में पदार्पण किया था। वर्ष 2018 में जकार्ता एशियाई पैरा खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने प्रतिभा साबित की। कोविड महामारी के दौरान उनके पिता परमजीत सिंह ने खेत में ही तीरंदाजी अभ्यास के लिए व्यवस्था की, ताकि उनका प्रशिक्षण जारी रह सके।

हरविंदर के पिता व भाई को मिठाई खिलाकर जीत की बधाई देती बहन संदीप कौर। संवाद