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Kaithal News: सैमसंग कस्टमर केयर अधिकारी बनकर जूलर से 1.07 लाख रुपये ठगे
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कैथल। गूगल पर सैमसंग कस्टमर केयर का नंबर सर्च करना चीका के एक जूलर को महंगा पड़ गया। साइबर ठग ने खुद को सैमसंग कस्टमर केयर का अधिकारी बताकर मोबाइल पर लिंक भेजा और 10 रुपये जमा करवाने के बहाने उसके बैंक खाते से 1.07 लाख रुपये निकाल लिए। शिकायतकर्ता को खाते से रुपये कटने का पता चला तो उसने साइबर पोर्टल पर शिकायत दर्ज करवाई।
पुलिस को दी शिकायत में गांव भागल निवासी सुशील कुमार ने बताया कि उनकी चीका में सराफ की दुकान है। उनका एचडीएफसी बैंक में खाता है। उनके सैमसंग मोबाइल की स्क्रीन टूट गई थी। उन्होंने मोबाइल ठीक करवाने के लिए सैमसंग केयर सेंटर में दिया हुआ था लेकिन कई दिन बीतने के बाद भी मोबाइल ठीक होकर नहीं मिला। सुशील कुमार ने बताया कि 14 अक्तूबर को उन्होंने मोबाइल की मरम्मत के बारे में जानकारी लेने के लिए गूगल पर सैमसंग कस्टमर केयर का नंबर सर्च किया। इसके बाद सर्च में मिले नंबर पर फोन किया। फोन उठाने वाले व्यक्ति ने खुद को सैमसंग कस्टमर केयर का कर्मचारी बताया और सहायता के बारे में पूछा। इस पर उन्होंने बताया कि उनका मोबाइल मरम्मत के लिए केयर सेंटर में जमा है लेकिन अभी तक ठीक होकर नहीं आया है।
10 रुपये भेजने के लिए कहा, खाते से निकल गए 1.07 लाख रुपये
शिकायतकर्ता के अनुसार फोन पर बात करने वाले व्यक्ति ने कहा कि वह उनके मोबाइल पर एक टेक्स्ट मैसेज भेज रहा है। इसमें दिए गए लिंक के माध्यम से केवल 10 रुपये जमा करवा देना। इसके बाद उसने फोन काट दिया। कुछ देर बाद उनके बैंक खाते से पहले 12 हजार रुपये और फिर 95 हजार रुपये कट गए। खाते से कुल एक लाख सात हजार रुपये निकलने पर उन्हें धोखाधड़ी का पता चला। आरोप है कि अज्ञात व्यक्ति ने कस्टमर केयर अधिकारी बनकर उनके मोबाइल पर लिंक भेजा और बैंक खाते से रुपये दूसरे खाते में ट्रांसफर कर लिए।
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पहले ऑनलाइन शिकायत की, फिर साइबर थाने में दी लिखित शिकायत
शिकायतकर्ता ने बताया कि धोखाधड़ी का पता चलने पर उन्होंने 16 अक्तूबर को राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करवाई थी। ऑनलाइन शिकायत और जीरो एफआईआर में घटना का पूरा विवरण दर्ज नहीं होने के कारण उन्होंने 22 अक्तूबर को साइबर थाना कैथल में अलग से लिखित शिकायत दी। पीड़ित ने पुलिस से अज्ञात आरोपी का पता लगाकर कानूनी कार्रवाई करने और ठगी की रकम वापस दिलवाने की मांग की है।
डीएसपी सुशील प्रकाश ने बताया कि साइबर थाना पुलिस ने शिकायत के आधार पर अज्ञात आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस अब ठगी की रकम ट्रांसफर होने वाले बैंक खाते और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी का पता लगाने में जुटी है।
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पुलिस को दी शिकायत में गांव भागल निवासी सुशील कुमार ने बताया कि उनकी चीका में सराफ की दुकान है। उनका एचडीएफसी बैंक में खाता है। उनके सैमसंग मोबाइल की स्क्रीन टूट गई थी। उन्होंने मोबाइल ठीक करवाने के लिए सैमसंग केयर सेंटर में दिया हुआ था लेकिन कई दिन बीतने के बाद भी मोबाइल ठीक होकर नहीं मिला। सुशील कुमार ने बताया कि 14 अक्तूबर को उन्होंने मोबाइल की मरम्मत के बारे में जानकारी लेने के लिए गूगल पर सैमसंग कस्टमर केयर का नंबर सर्च किया। इसके बाद सर्च में मिले नंबर पर फोन किया। फोन उठाने वाले व्यक्ति ने खुद को सैमसंग कस्टमर केयर का कर्मचारी बताया और सहायता के बारे में पूछा। इस पर उन्होंने बताया कि उनका मोबाइल मरम्मत के लिए केयर सेंटर में जमा है लेकिन अभी तक ठीक होकर नहीं आया है।
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10 रुपये भेजने के लिए कहा, खाते से निकल गए 1.07 लाख रुपये
शिकायतकर्ता के अनुसार फोन पर बात करने वाले व्यक्ति ने कहा कि वह उनके मोबाइल पर एक टेक्स्ट मैसेज भेज रहा है। इसमें दिए गए लिंक के माध्यम से केवल 10 रुपये जमा करवा देना। इसके बाद उसने फोन काट दिया। कुछ देर बाद उनके बैंक खाते से पहले 12 हजार रुपये और फिर 95 हजार रुपये कट गए। खाते से कुल एक लाख सात हजार रुपये निकलने पर उन्हें धोखाधड़ी का पता चला। आरोप है कि अज्ञात व्यक्ति ने कस्टमर केयर अधिकारी बनकर उनके मोबाइल पर लिंक भेजा और बैंक खाते से रुपये दूसरे खाते में ट्रांसफर कर लिए।
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पहले ऑनलाइन शिकायत की, फिर साइबर थाने में दी लिखित शिकायत
शिकायतकर्ता ने बताया कि धोखाधड़ी का पता चलने पर उन्होंने 16 अक्तूबर को राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करवाई थी। ऑनलाइन शिकायत और जीरो एफआईआर में घटना का पूरा विवरण दर्ज नहीं होने के कारण उन्होंने 22 अक्तूबर को साइबर थाना कैथल में अलग से लिखित शिकायत दी। पीड़ित ने पुलिस से अज्ञात आरोपी का पता लगाकर कानूनी कार्रवाई करने और ठगी की रकम वापस दिलवाने की मांग की है।
डीएसपी सुशील प्रकाश ने बताया कि साइबर थाना पुलिस ने शिकायत के आधार पर अज्ञात आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस अब ठगी की रकम ट्रांसफर होने वाले बैंक खाते और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी का पता लगाने में जुटी है।