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गुहला-चीका क्षेत्र में पांच सालों में रही है नशे की बड़ी समस्या
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- फोटो : Kaithal
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गुहला-चीका विधानसभा के काफी गांव पंजाब बॉर्डर को छूते हैं। पंजाब के अलावा हरियाणा के नरवाना सहित कई क्षेत्रों से यहां नशे का कारोबार पिछले पांच-सात सालों में खूब फला-फूला है। पिछले साल प्रशासन द्वारा यहां विशेष सैल का गठन करके 63 एफआईआर भी दर्ज की थी। यहां मुख्य रुप से स्मैक तस्करी के कारण लोग परेशान रहे। बदहाल नशा मुक्ति केंद्र, नशेड़ियों के पुनर्वास में समस्या इस बार चुनाव में बड़ा मुद्दा बने हुए हैं।
नशे का खात्मा करने वाला हो विधायक:-राष्ट्रीय जनशक्ति मंच नामक संगठन के माध्यम से चीका में अलख जगाए रहे सुरेंद्र कुमार का कहना है कि पिछले तीन-चार सालों से उन्होंने नशे के खिलाफ विशेष मुहिम चलाई थी। इस मुहीम का असर भी हुआ था। लेकिन पांच-छह सालों में जो हालात गुहला के हो गए थे। यह चिंतनीय हैं। इसीलिए इस बार नशे का खात्मा करने वाला विधायक बनाने का प्रयास किया जा रहा है। सभी प्रत्याशियों से इस बात का आश्वासन लिया जा रहा है कि वे नशे को खत्म करें। कई प्रत्याशियों ने लिखित में आश्वासन दिया है कि वे विधायक बनते ही नशे को खत्म करेंगे।
ऐसे में क्षेत्र के लोगों को अपने बच्चों के भविष्य की चिंता सताने लगी थी। शहर में सरेआम केलकुलेटर टाइप कांटे बिकने लगे थे। जिसमें स्मैक की एक ग्राम से भी कम मात्रा तोली जा सकती थी। इसके अलावा शहर व गांवों में कई युवाओं की मौत के कारण हालात बदतर नजर आने लगे थे। जन संघर्ष मंच, युवाओं द्वारा चलाए गए अभियानों का असर था कि कुछ रोकथाम लगी।
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गांव खरका में कमेटी का गठन करके इस बुराई के खिलाफ संघर्ष करने वाले युवा अंग्रेज सिंह का कहना है कि नशे को लेकर उन्होंने मुहिम चलाई थी। वो इस समय लोगों के सिर चढक़र बोल रही है।
राष्ट्रीय जनशक्ति मंच से जुड़े एडवोकेट सुखचैन सिंह थिंद, सरदार इंद्रजीत सिंह गुहला, डा. कमलकांत शर्मा ने कहा कि कई परिवार ऐसे हैं, जिनके युवा नशे की दलदल से बाहर निकलना चाहते हैं। यहां सरकारी नशा मुक्ति केंद्र करीब-करीब बंद हो चुका है। जिस कारण लोग परेशान हैं। लोगों की यह भी मांग है कि जो युवक नशे के आदि हो चुके हैं, उनके इलाज व पुनर्वास के लिए व्यवस्था हो।
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नशे का खात्मा करने वाला हो विधायक:-राष्ट्रीय जनशक्ति मंच नामक संगठन के माध्यम से चीका में अलख जगाए रहे सुरेंद्र कुमार का कहना है कि पिछले तीन-चार सालों से उन्होंने नशे के खिलाफ विशेष मुहिम चलाई थी। इस मुहीम का असर भी हुआ था। लेकिन पांच-छह सालों में जो हालात गुहला के हो गए थे। यह चिंतनीय हैं। इसीलिए इस बार नशे का खात्मा करने वाला विधायक बनाने का प्रयास किया जा रहा है। सभी प्रत्याशियों से इस बात का आश्वासन लिया जा रहा है कि वे नशे को खत्म करें। कई प्रत्याशियों ने लिखित में आश्वासन दिया है कि वे विधायक बनते ही नशे को खत्म करेंगे।
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ऐसे में क्षेत्र के लोगों को अपने बच्चों के भविष्य की चिंता सताने लगी थी। शहर में सरेआम केलकुलेटर टाइप कांटे बिकने लगे थे। जिसमें स्मैक की एक ग्राम से भी कम मात्रा तोली जा सकती थी। इसके अलावा शहर व गांवों में कई युवाओं की मौत के कारण हालात बदतर नजर आने लगे थे। जन संघर्ष मंच, युवाओं द्वारा चलाए गए अभियानों का असर था कि कुछ रोकथाम लगी।
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गांव खरका में कमेटी का गठन करके इस बुराई के खिलाफ संघर्ष करने वाले युवा अंग्रेज सिंह का कहना है कि नशे को लेकर उन्होंने मुहिम चलाई थी। वो इस समय लोगों के सिर चढक़र बोल रही है।
राष्ट्रीय जनशक्ति मंच से जुड़े एडवोकेट सुखचैन सिंह थिंद, सरदार इंद्रजीत सिंह गुहला, डा. कमलकांत शर्मा ने कहा कि कई परिवार ऐसे हैं, जिनके युवा नशे की दलदल से बाहर निकलना चाहते हैं। यहां सरकारी नशा मुक्ति केंद्र करीब-करीब बंद हो चुका है। जिस कारण लोग परेशान हैं। लोगों की यह भी मांग है कि जो युवक नशे के आदि हो चुके हैं, उनके इलाज व पुनर्वास के लिए व्यवस्था हो।