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Kaithal News: आशा कर्मियों को पुलिस ने क्योड़क के पास रोका
Tue, 29 Aug 2023 12:50 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Tue, 29 Aug 2023 12:50 AM IST
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कैथल। राज्य स्तरीय प्रदर्शन में शामिल होने के लिए पंचकूला जा रही आशा कर्मियों को उच्चाधिकारियों के आदेशों के बाद सोमवार को पुलिस ने गांव क्योड़क के पास रोक लिया। हालांकि जिलेभर में विभिन्न स्थानों पर पुलिस आशा वर्कर यूनियन की नेताओं को घरों पर पहुंच गई और उन्हें वहीं पर नजरबंद कर लिया।
इस बीच यूनियन से जुड़ी कुछ सदस्य घरों से निकलकर अलग-अलग जगह से कैथल पहुंची और यहां से गाडिय़ों में सवार होकर विधानसभा घेराव के लिए निकल पड़ी। प्रशासन को जैसे ही इसकी सूचना मिली तो गांव क्योड़क के पास पुलिस प्रबंधन के माध्यम से उन्हें वहीं रोक लिया।
हालांकि आशा कर्मी पंचकूला पहुंचने की जिद पर अड़ी रही, लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे नहीं जाने दिया। कुछ समय बाद उन्हें जब वापस घर जाने के लिए कहा तो आशाकर्मी उन्हें कैथल लघु सचिवालय स्थित धरने पर जाने के लिए कहने लगे। ऐसे में मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों ने उन गाड़ी चालकों को निर्देश दिए कि सभी आशा कर्मियों को वापस शहर में बस स्टैंड पर छोड़ें ताकि वे अपने घर जा सकें। बाद में सभी आशा कर्मी लघु सचिवालय में दिए जा रहे धरने में शामिल हुई।
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दूसरी ओर हिसार के विभिन्न ब्लॉकों से पंचकूला में पहुंची आशाकर्मियों को पुलिस वहां से गाडिय़ों में बैठाकर कैथल बस स्टैंड पर छोड़ गई और उन्हें वापस जाने के लिए कहा। वहां से कैथल बस स्टैंड पर पहुंचने के बाद आशाकर्मियों ने जोरदार नारेबाजी की। आशाकर्मी सीमा, कमलेश, अंजू, सुमन व नीता ने कहा कि पुलिस ने उन्हें वहां से धक्के देकर वापस भेज दिया। जो सामान वे अपने साथ लेकर गई हुई थी, वह भी वापस नहीं लेने दिया गया। बेटियों को बचाने का नारा देने वाली सरकार ने प्रदेश की बेटियों पर ही अत्याचार कर रही है। आगामी चुनाव में सरकार इस बात का खामियाजा भुगतने के लिए तैयार रहे।
इस संबंध में एसपी अभिषेक जोरवाल ने बताया कि आशाकर्मियों को पंचकूला प्रदर्शन में जाने के लिए अनुमति नहीं थी। पुलिस ने उनके वाहनों को क्योडक़ के पास ही रोक लिया। एसपी ने बताया कि कैथल में किसी प्रकार विवाद या झड़प की बात सामने नहीं आई। आशाकर्मियों को शांतिपूर्ण तरीके से रोका गया और कैथल वापस भेजा गया।
नजरबंद की गई आशा कर्मी चकमा दे पहुंच गईं पंचकूला
गुहला-चीका। पंचकूला में किए जाने वाले विरोध प्रदर्शन में आशा कर्मी न पहुंच सकें, इसको लेकर गुहला-चीका पुलिस पिछले दो दिनों से आशाकर्मियों पर नजर बनाए हुए थी। आशा कर्मियों संपर्क को तोड़ा जा सके, इसको लेकर पुलिस ने यूनियन की जिला कमेटी सदस्या चरणजीत कौर, ब्लॉक प्रधान सुरेंद्र कौर भूंसला व सचिव अमन कौर को एक दिन पहले ही उनके घरों में नजरबंद कर दिया था। पुलिस कर्मचारी इन तीनों ही पदाधिकारियों के घरों के बाहर पहरा देते रहे, लेकिन इनमें से चरणजीत कौर व सुरेंद्र कौर पुलिस को चकमा दे घर के पिछले दरवाजे से निकल चुपके से पंचकूला के लिए रवाना हो गई। पंचकूला पहुंचने से पहले पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। जब पुलिस को दोनों ही महिलाओं के घरों के अंदर न होने का पता चला तो उनके हाथ-पांव फूल गए और उन्होंने तुरंत अपने उच्च अधिकारियों को सूचना दी। अन्य आशा कर्मी किसी भी सूरत में पंचकूला न पहुंच सकें इसके लिए चीका के शहीद ऊधम सिंह चौंक पर पटियाला व पिहोवा के लिए रवाना होने वाली हर एक बस की पुलिस गहनता से तलाशी ले रही थी। तलाशी के दौरान पुलिस ने पंचकूला रवाना हो रही दो दर्जन से अधिक आशा कर्मियों को पंजाब रोडवेज की बस से उतार कर रोक लिया। खफा आशा कर्मियों ने चीका-पिहोवा रोड जाम कर नारेबाजी शुरू कर दी। मौके पर मौजूद चीका थाना प्रभारी राजेश कुमार के समझाने पर उन्होंने मार्ग तो खाली कर दिया, लेकिन शहीद ऊधम सिंह चौंक पर प्रदर्शन करते हुए दिनभर का धरना शुरू कर दिया।
एसआई ने राखी बंधवा धरना करवाया समाप्त
गुहला-चीका। पंचकूला में होने वाले प्रदर्शन में भाग लेने जा रही लगभग तीन दर्जन आशा वर्कर से एसआई ने राखी बंधवा धरना खत्म करवा दिया। जब चीका पुलिस के कर्मचारियों ने बसों से उतार लिया तो ये महिलाएं घर जाने की बजाए शहीद ऊधम सिंह चौक पर ही बैठ गई। महिलाओं का रोष था कि उन्हें अपनी मांगों को लेकर पंचकूला में होने वाले शांतिपूर्वक प्रदर्शन में भाग लेना था, लेकिन गुहला-चीका पुलिस ने उन्हें जबरदस्ती बसों से उतार लिया।
दिनभर होती महिलाओं की इस दुर्दशा को वहां पर तैनात एसआई जसविंद्र सिंह देख रहे थे। उन्हें महिलाओं से कहा कि वे उन्हें अपना भाई समझे और अब धरने का समाप्त कर घर जाएं। यदि उनमें से कोई महिला उसे राखी भी बांध भाई बनाना चाहें तो वह इसके लिए भी तैयार है। इस पहल पर आशा कर्मी ने चौक के पास से राखी खरीदी और एसआई के हाथ पर बांध दी और धरना समाप्त कर घरों को रवाना हो गई।
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इस बीच यूनियन से जुड़ी कुछ सदस्य घरों से निकलकर अलग-अलग जगह से कैथल पहुंची और यहां से गाडिय़ों में सवार होकर विधानसभा घेराव के लिए निकल पड़ी। प्रशासन को जैसे ही इसकी सूचना मिली तो गांव क्योड़क के पास पुलिस प्रबंधन के माध्यम से उन्हें वहीं रोक लिया।
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हालांकि आशा कर्मी पंचकूला पहुंचने की जिद पर अड़ी रही, लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे नहीं जाने दिया। कुछ समय बाद उन्हें जब वापस घर जाने के लिए कहा तो आशाकर्मी उन्हें कैथल लघु सचिवालय स्थित धरने पर जाने के लिए कहने लगे। ऐसे में मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों ने उन गाड़ी चालकों को निर्देश दिए कि सभी आशा कर्मियों को वापस शहर में बस स्टैंड पर छोड़ें ताकि वे अपने घर जा सकें। बाद में सभी आशा कर्मी लघु सचिवालय में दिए जा रहे धरने में शामिल हुई।
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दूसरी ओर हिसार के विभिन्न ब्लॉकों से पंचकूला में पहुंची आशाकर्मियों को पुलिस वहां से गाडिय़ों में बैठाकर कैथल बस स्टैंड पर छोड़ गई और उन्हें वापस जाने के लिए कहा। वहां से कैथल बस स्टैंड पर पहुंचने के बाद आशाकर्मियों ने जोरदार नारेबाजी की। आशाकर्मी सीमा, कमलेश, अंजू, सुमन व नीता ने कहा कि पुलिस ने उन्हें वहां से धक्के देकर वापस भेज दिया। जो सामान वे अपने साथ लेकर गई हुई थी, वह भी वापस नहीं लेने दिया गया। बेटियों को बचाने का नारा देने वाली सरकार ने प्रदेश की बेटियों पर ही अत्याचार कर रही है। आगामी चुनाव में सरकार इस बात का खामियाजा भुगतने के लिए तैयार रहे।
इस संबंध में एसपी अभिषेक जोरवाल ने बताया कि आशाकर्मियों को पंचकूला प्रदर्शन में जाने के लिए अनुमति नहीं थी। पुलिस ने उनके वाहनों को क्योडक़ के पास ही रोक लिया। एसपी ने बताया कि कैथल में किसी प्रकार विवाद या झड़प की बात सामने नहीं आई। आशाकर्मियों को शांतिपूर्ण तरीके से रोका गया और कैथल वापस भेजा गया।
नजरबंद की गई आशा कर्मी चकमा दे पहुंच गईं पंचकूला
गुहला-चीका। पंचकूला में किए जाने वाले विरोध प्रदर्शन में आशा कर्मी न पहुंच सकें, इसको लेकर गुहला-चीका पुलिस पिछले दो दिनों से आशाकर्मियों पर नजर बनाए हुए थी। आशा कर्मियों संपर्क को तोड़ा जा सके, इसको लेकर पुलिस ने यूनियन की जिला कमेटी सदस्या चरणजीत कौर, ब्लॉक प्रधान सुरेंद्र कौर भूंसला व सचिव अमन कौर को एक दिन पहले ही उनके घरों में नजरबंद कर दिया था। पुलिस कर्मचारी इन तीनों ही पदाधिकारियों के घरों के बाहर पहरा देते रहे, लेकिन इनमें से चरणजीत कौर व सुरेंद्र कौर पुलिस को चकमा दे घर के पिछले दरवाजे से निकल चुपके से पंचकूला के लिए रवाना हो गई। पंचकूला पहुंचने से पहले पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। जब पुलिस को दोनों ही महिलाओं के घरों के अंदर न होने का पता चला तो उनके हाथ-पांव फूल गए और उन्होंने तुरंत अपने उच्च अधिकारियों को सूचना दी। अन्य आशा कर्मी किसी भी सूरत में पंचकूला न पहुंच सकें इसके लिए चीका के शहीद ऊधम सिंह चौंक पर पटियाला व पिहोवा के लिए रवाना होने वाली हर एक बस की पुलिस गहनता से तलाशी ले रही थी। तलाशी के दौरान पुलिस ने पंचकूला रवाना हो रही दो दर्जन से अधिक आशा कर्मियों को पंजाब रोडवेज की बस से उतार कर रोक लिया। खफा आशा कर्मियों ने चीका-पिहोवा रोड जाम कर नारेबाजी शुरू कर दी। मौके पर मौजूद चीका थाना प्रभारी राजेश कुमार के समझाने पर उन्होंने मार्ग तो खाली कर दिया, लेकिन शहीद ऊधम सिंह चौंक पर प्रदर्शन करते हुए दिनभर का धरना शुरू कर दिया।
एसआई ने राखी बंधवा धरना करवाया समाप्त
गुहला-चीका। पंचकूला में होने वाले प्रदर्शन में भाग लेने जा रही लगभग तीन दर्जन आशा वर्कर से एसआई ने राखी बंधवा धरना खत्म करवा दिया। जब चीका पुलिस के कर्मचारियों ने बसों से उतार लिया तो ये महिलाएं घर जाने की बजाए शहीद ऊधम सिंह चौक पर ही बैठ गई। महिलाओं का रोष था कि उन्हें अपनी मांगों को लेकर पंचकूला में होने वाले शांतिपूर्वक प्रदर्शन में भाग लेना था, लेकिन गुहला-चीका पुलिस ने उन्हें जबरदस्ती बसों से उतार लिया।
दिनभर होती महिलाओं की इस दुर्दशा को वहां पर तैनात एसआई जसविंद्र सिंह देख रहे थे। उन्हें महिलाओं से कहा कि वे उन्हें अपना भाई समझे और अब धरने का समाप्त कर घर जाएं। यदि उनमें से कोई महिला उसे राखी भी बांध भाई बनाना चाहें तो वह इसके लिए भी तैयार है। इस पहल पर आशा कर्मी ने चौक के पास से राखी खरीदी और एसआई के हाथ पर बांध दी और धरना समाप्त कर घरों को रवाना हो गई।