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Kaithal News: नए कानूनों के तहत कार्रवाई के लिए पुलिस तैयार
Sun, 30 Jun 2024 04:42 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sun, 30 Jun 2024 04:42 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। एक जुलाई 2024 से नए कानूनों के तहत कार्रवाई के लिए कैथल पुलिस पूरी तरह से तैयार है। यह बात एसपी उपासना ने कही। उन्होंने बताया कि नए कानूनों के बारे में सभी अनुसंधानकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
एसपी ने कहा कि भारतीय दंड संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता व साक्ष्य अधिनियम की जगह भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, भारतीय साक्ष्य अधिनियम ने ली है। अब कानून व पुलिस प्रक्रिया नए कानूनों के अनुसार लागू होगी। भारतीय दंड संहिता में जहां 511 धाराएं थी वहीं अब भारतीय न्याय संहिता में 358 धाराएं हैं। इनको 20 अध्यायों में विभाजित किया गया है, 33 अपराधों में सजा अवधि बढ़ाई है, 83 अपराधों में जुर्माने की राशि बढ़ाई है व 23 अपराधों में अनिवार्य न्यूनतम सजा का प्रावधान किया है।
उन्होंने बताया कि भारतीय न्याय संहिता के माध्यम से सजा के एक नए तरीके के तौर पर सामुदायिक सेवा को जोड़ा गया है व छह अपराधों में सामुदायिक सेवा की सजा का प्रावधान रखा गया है।
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नए कानूनों के मुख्य बिंदु ः भारतीय न्याय संहिता में आईपीसी की ज्यादातर धाराओं को शामिल किया गया। भारतीय न्याय संहिता में कम्युनिटी सर्विस को सजा के तौर पर शामिल किया है। आतंकवाद को एक अपराध के तौर पर शामिल किया है। राजद्रोह के स्थान पर भारत की संप्रभुता, अखंडता, एकता को खतरे में डालना को शामिल किया है। किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह द्वारा हिंसा की धमकी, हिंसा का उपयोग या किसी अन्य गैर-कानूनी तरीके से अपराध करने को संगठित अपराध करने की श्रेणी में लिया गया है, जिसके लिए भारतीय न्याय संहिता की धारा 111 में सजा का प्रावधान है। आर्थिक अपराधों को भी इस श्रेणी में शामिल किया गया है।
किसी अपराध को करने के लिए बच्चों को काम में लगाना को भारतीय न्याय संहिता की धारा 95 के अंतर्गत अपराध माना जाएगा। भारत में अपराध के लिए भारत के बाहर किसी को बहकाना या उकसाना को भारतीय न्याय संहिता की धारा 48 के अंतर्गत अपराध माना जाएगा। किसी महिला की निजी तस्वीरें बिना महिला की इजाजत के खींचना/देखना भारतीय न्याय संहिता द्वारा 77 के अंतर्गत, किसी महिला का पीछा करना भारतीय न्याय संहिता की धारा 78 के अंतर्गत अपराध माना जाएगा। बलपूर्वक व हिंसा करते हुए दंगे करना भारतीय न्याय संहिता की धारा 191 के अंतर्गत अपराध माना जाएगा।
एसपी ने बताया कि सीआरपीसी में 484 धाराएं थी वहीं अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में 531 धाराएं हैं, पूर्व में प्रथम सूचना रिपोर्ट सीआरपीसी की धारा 154 के तहत अंकित की जाती थी जो अब एक जुलाई से बीएनएसएस की धारा 173 के तहत अंकित की जाएगी। 29 जून को पुलिस लाइन कैथल में पीएसआई मंजू ने पुलिस कर्मियों को नए कानूनों के संबंध में प्रशिक्षण दिया। नए कानूनों के संबंध में परीक्षा हुई, जिसमें जिले के सभी अनुसंधानकर्ताओं ने भाग लिया।
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कैथल। एक जुलाई 2024 से नए कानूनों के तहत कार्रवाई के लिए कैथल पुलिस पूरी तरह से तैयार है। यह बात एसपी उपासना ने कही। उन्होंने बताया कि नए कानूनों के बारे में सभी अनुसंधानकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
एसपी ने कहा कि भारतीय दंड संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता व साक्ष्य अधिनियम की जगह भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, भारतीय साक्ष्य अधिनियम ने ली है। अब कानून व पुलिस प्रक्रिया नए कानूनों के अनुसार लागू होगी। भारतीय दंड संहिता में जहां 511 धाराएं थी वहीं अब भारतीय न्याय संहिता में 358 धाराएं हैं। इनको 20 अध्यायों में विभाजित किया गया है, 33 अपराधों में सजा अवधि बढ़ाई है, 83 अपराधों में जुर्माने की राशि बढ़ाई है व 23 अपराधों में अनिवार्य न्यूनतम सजा का प्रावधान किया है।
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उन्होंने बताया कि भारतीय न्याय संहिता के माध्यम से सजा के एक नए तरीके के तौर पर सामुदायिक सेवा को जोड़ा गया है व छह अपराधों में सामुदायिक सेवा की सजा का प्रावधान रखा गया है।
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नए कानूनों के मुख्य बिंदु ः भारतीय न्याय संहिता में आईपीसी की ज्यादातर धाराओं को शामिल किया गया। भारतीय न्याय संहिता में कम्युनिटी सर्विस को सजा के तौर पर शामिल किया है। आतंकवाद को एक अपराध के तौर पर शामिल किया है। राजद्रोह के स्थान पर भारत की संप्रभुता, अखंडता, एकता को खतरे में डालना को शामिल किया है। किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह द्वारा हिंसा की धमकी, हिंसा का उपयोग या किसी अन्य गैर-कानूनी तरीके से अपराध करने को संगठित अपराध करने की श्रेणी में लिया गया है, जिसके लिए भारतीय न्याय संहिता की धारा 111 में सजा का प्रावधान है। आर्थिक अपराधों को भी इस श्रेणी में शामिल किया गया है।
किसी अपराध को करने के लिए बच्चों को काम में लगाना को भारतीय न्याय संहिता की धारा 95 के अंतर्गत अपराध माना जाएगा। भारत में अपराध के लिए भारत के बाहर किसी को बहकाना या उकसाना को भारतीय न्याय संहिता की धारा 48 के अंतर्गत अपराध माना जाएगा। किसी महिला की निजी तस्वीरें बिना महिला की इजाजत के खींचना/देखना भारतीय न्याय संहिता द्वारा 77 के अंतर्गत, किसी महिला का पीछा करना भारतीय न्याय संहिता की धारा 78 के अंतर्गत अपराध माना जाएगा। बलपूर्वक व हिंसा करते हुए दंगे करना भारतीय न्याय संहिता की धारा 191 के अंतर्गत अपराध माना जाएगा।
एसपी ने बताया कि सीआरपीसी में 484 धाराएं थी वहीं अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में 531 धाराएं हैं, पूर्व में प्रथम सूचना रिपोर्ट सीआरपीसी की धारा 154 के तहत अंकित की जाती थी जो अब एक जुलाई से बीएनएसएस की धारा 173 के तहत अंकित की जाएगी। 29 जून को पुलिस लाइन कैथल में पीएसआई मंजू ने पुलिस कर्मियों को नए कानूनों के संबंध में प्रशिक्षण दिया। नए कानूनों के संबंध में परीक्षा हुई, जिसमें जिले के सभी अनुसंधानकर्ताओं ने भाग लिया।