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Kaithal News: मौत के साये में काम करने को मजबूर पीएचसी बालू के कर्मी
Fri, 29 Aug 2025 01:27 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Fri, 29 Aug 2025 01:27 AM IST
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32 कैथल। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बालू में जर्जर हालात में
संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) बालू के कर्मचारी अपनी जान जोखिम में डालकर काम करने को मजबूर हैं। पीएचसी की छत इतनी जर्जर हो चुकी है कि किसी भी समय गिर सकती है। सबसे हैरानी की बात यह है कि सरकार इस भवन को पहले ही कंडम घोषित कर चुकी है, इसके बावजूद कर्मचारियों को इसी खंडहरनुमा इमारत में ड्यूटी निभानी पड़ रही है।
इस केंद्र में न सिर्फ गांव बालू बल्कि आसपास के गांव रामगढ़, वजीरनगर, कसान, चौशाला, जुलानीखेड़ा आदि के लोग भी इलाज के लिए आते हैं। लेकिन जब खुद डॉक्टर और कर्मचारी ही मौत के साए में काम कर रहे हों तो मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल पाना मुश्किल है। वर्तमान में भवन की छत से सीमेंट और सरिये खुले दिखाई दे रहे हैं। यही वजह है कि यहां न तो डॉक्टर ड्यूटी करना चाहते हैं और न ही अन्य कर्मचारी। विभाग द्वारा ड्यूटी लगाई जाने पर ही कर्मचारी मजबूरन काम कर रहे हैं। फिलहाल यहां करीब एक दर्जन कर्मचारी सेवाएं दे रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, गांव बालू में पीएचसी के नए भवन का प्रस्ताव पास हो चुका है और सरकार से मंजूरी भी मिल चुकी है। लेकिन टेंडर और निर्माण प्रक्रिया कब पूरी होगी, यह फिलहाल अनिश्चित है। कर्मचारियों का कहना है कि जब तक नया भवन तैयार नहीं होता, तब तक उन्हें असुरक्षित भवन में ही काम करना पड़ेगा। उन्होंने जिला उपायुक्त और मुख्य चिकित्सा अधिकारी से मांग की है कि वैकल्पिक भवन की व्यवस्था की जाए, ताकि वे सुरक्षित वातावरण में अपनी ड्यूटी निभा सकें।
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पीएचसी बालू की बिल्डिंग जर्जर घोषित है। नई बिल्डिंग बनने तक वैकल्पिक व्यवस्था की तलाश ग्राम पंचायत के माध्यम से जारी है। जैसे ही उपयुक्त भवन मिलेगा, स्वास्थ्य सेवाओं को वहां शिफ्ट कर दिया जाएगा। -डॉ. राजीव मित्तल, सीनियर मेडिकल ऑफिसर एवं सीएमओ
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कैथल। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) बालू के कर्मचारी अपनी जान जोखिम में डालकर काम करने को मजबूर हैं। पीएचसी की छत इतनी जर्जर हो चुकी है कि किसी भी समय गिर सकती है। सबसे हैरानी की बात यह है कि सरकार इस भवन को पहले ही कंडम घोषित कर चुकी है, इसके बावजूद कर्मचारियों को इसी खंडहरनुमा इमारत में ड्यूटी निभानी पड़ रही है।
इस केंद्र में न सिर्फ गांव बालू बल्कि आसपास के गांव रामगढ़, वजीरनगर, कसान, चौशाला, जुलानीखेड़ा आदि के लोग भी इलाज के लिए आते हैं। लेकिन जब खुद डॉक्टर और कर्मचारी ही मौत के साए में काम कर रहे हों तो मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल पाना मुश्किल है। वर्तमान में भवन की छत से सीमेंट और सरिये खुले दिखाई दे रहे हैं। यही वजह है कि यहां न तो डॉक्टर ड्यूटी करना चाहते हैं और न ही अन्य कर्मचारी। विभाग द्वारा ड्यूटी लगाई जाने पर ही कर्मचारी मजबूरन काम कर रहे हैं। फिलहाल यहां करीब एक दर्जन कर्मचारी सेवाएं दे रहे हैं।
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सूत्रों के अनुसार, गांव बालू में पीएचसी के नए भवन का प्रस्ताव पास हो चुका है और सरकार से मंजूरी भी मिल चुकी है। लेकिन टेंडर और निर्माण प्रक्रिया कब पूरी होगी, यह फिलहाल अनिश्चित है। कर्मचारियों का कहना है कि जब तक नया भवन तैयार नहीं होता, तब तक उन्हें असुरक्षित भवन में ही काम करना पड़ेगा। उन्होंने जिला उपायुक्त और मुख्य चिकित्सा अधिकारी से मांग की है कि वैकल्पिक भवन की व्यवस्था की जाए, ताकि वे सुरक्षित वातावरण में अपनी ड्यूटी निभा सकें।
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पीएचसी बालू की बिल्डिंग जर्जर घोषित है। नई बिल्डिंग बनने तक वैकल्पिक व्यवस्था की तलाश ग्राम पंचायत के माध्यम से जारी है। जैसे ही उपयुक्त भवन मिलेगा, स्वास्थ्य सेवाओं को वहां शिफ्ट कर दिया जाएगा। -डॉ. राजीव मित्तल, सीनियर मेडिकल ऑफिसर एवं सीएमओ

32 कैथल। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बालू में जर्जर हालात में