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लोगों को वैदिक जीवन अपनाना चाहिए : धर्मपाल
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गुहला-चीका। आर्य समाज की ओर से सनातन संस्कृति को बढ़ावा देने और व्यापक प्रचार प्रसार कर आम जन मानस में जागरूकता पैदा करने के लिए एक दिवसीय वेद प्रचार महोत्सव एवं आर्य समाज सम्मेलन समारोह का आयोजन श्री विश्वकर्मा मंदिर चीका के प्रांगण में पतंजलि जिला प्रभारी एवं आचार्य हरिओम शोकल की अध्यक्षता में किया।
कार्यक्रम में मुख्यातिथि सनातन प्रचारिणी सभा कैथल के प्रतिनिधि आचार्य धर्मपाल व विशिष्ट अतिथि कुलदीप शास्त्री ने शिरकत की। पंडित सत्यवीर शास्त्री ने सभी अतिथियों का स्वागत किया तथा जिले में वैदिक प्रचार की चल रही गतिविधियों पर प्रकाश डाला। आचार्य धर्मपाल ने कहा कि वर्तमान समय सनातन धर्म के उदय का सही वक्त है और यही समय है जब लोगों को वैदिक जीवन अपना लेना चाहिए।
दुनिया का दृष्टिकोण भी सनातन धर्म और वैदिक जीवन के प्रति बदल रहा है। उन्होंने कहा कि धर्म जीवन की नींव है और इसके कई अर्थ हैं। इसलिए जो कर्तव्य हमें जीवन को व्यवस्थित रखने के लिए करने चाहिए, उन्हें भी धर्म कहा जाता है। जीवन को सही ढंग से चलाने और एक साथ रहने के लिए हमें एक दूसरे की प्रकृति को समझकर व्यवहार करना चाहिए। इसलिए प्रकृति को भी धर्म कहा जाता है।
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हालांकि धर्म का ज्ञान वेदों से आता है क्योंकि वेद सत्य पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि विज्ञान भी इस बात को स्वीकार करता है कि सृष्टि का पहला रूप ध्वनि था। इस अवसर पर आर्य समाज फाउंडेशन चीका के प्रधान सुरेंद्र आर्य, हर्षित आर्य, विक्की आर्य, अमित जिंदल आर्य, सुरेश कुमार, जयभगवान आदि मौजूद रहे।
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कार्यक्रम में मुख्यातिथि सनातन प्रचारिणी सभा कैथल के प्रतिनिधि आचार्य धर्मपाल व विशिष्ट अतिथि कुलदीप शास्त्री ने शिरकत की। पंडित सत्यवीर शास्त्री ने सभी अतिथियों का स्वागत किया तथा जिले में वैदिक प्रचार की चल रही गतिविधियों पर प्रकाश डाला। आचार्य धर्मपाल ने कहा कि वर्तमान समय सनातन धर्म के उदय का सही वक्त है और यही समय है जब लोगों को वैदिक जीवन अपना लेना चाहिए।
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दुनिया का दृष्टिकोण भी सनातन धर्म और वैदिक जीवन के प्रति बदल रहा है। उन्होंने कहा कि धर्म जीवन की नींव है और इसके कई अर्थ हैं। इसलिए जो कर्तव्य हमें जीवन को व्यवस्थित रखने के लिए करने चाहिए, उन्हें भी धर्म कहा जाता है। जीवन को सही ढंग से चलाने और एक साथ रहने के लिए हमें एक दूसरे की प्रकृति को समझकर व्यवहार करना चाहिए। इसलिए प्रकृति को भी धर्म कहा जाता है।
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हालांकि धर्म का ज्ञान वेदों से आता है क्योंकि वेद सत्य पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि विज्ञान भी इस बात को स्वीकार करता है कि सृष्टि का पहला रूप ध्वनि था। इस अवसर पर आर्य समाज फाउंडेशन चीका के प्रधान सुरेंद्र आर्य, हर्षित आर्य, विक्की आर्य, अमित जिंदल आर्य, सुरेश कुमार, जयभगवान आदि मौजूद रहे।