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स्कूल संचालक के खिलाफ केस दर्ज करने की मांग
ब्यूरो कैथल
Updated Tue, 09 Aug 2016 12:29 AM IST
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परिजनों ने मौन जुलूस निकाल कर प्रदर्शन किया
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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अप्रैल माह में स्कूल बस के नीचे आने से हुई चार साल की मासूम छात्रा की मौत के मामले में परिजनों ने मौन जुलूस निकाल कर शहर में प्रदर्शन किया और प्रशासन को ज्ञापन सौंप कर स्कूल संचालक के खिलाफ गैर इरादतन हत्या के आरोप में केस दर्ज करने की मांग की।
चालक ने जानबूझकर दिया था घटना को अंजाम
अपने ज्ञापन में परिजनों ने बताया कि 30 अप्रैल को गुरुदत्त की पुत्री रक्षिता गांव गुहणा में अपने नाना के घर से बस में पढ़ने के लिए निजी स्कूल में गई थी। जहां से वापस लौटते समय बस ड्राइवर बिना सहायक के ही बच्चों को उतार रहा था। इसी बीच उसके नाना के घर से पहले ही बस चालक ने बस को दौड़ा दिया। गांववासी अमन शर्मा, विक्रम ने बस के पीछे दौड़ते हुए बस चालक को रुकवाने का प्रयास किया। क्योंकि रक्षिता बस की खिड़की में थी। इसी बीच वह बस से नीचे गिर गई और गंभीर रूप से घायल हो गई। बाद में अस्पताल में उसकी मौत हो गई। इसके बाद पुलिस ने चालक के खिलाफ केस दर्ज कर लिया। लेकिन बाद में वह जमानत पर छूट गया।
इसके बावजूद स्कूल संचालक के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। क्योंकि उसने बस में परिचालक नहीं भेजा। जो बच्चों को बस में सुरक्षित चढ़ाने व बस से सुरक्षित उतारने के लिए आवश्यक होता है। बस में आवश्यक सुरक्षा उपाय भी नहीं किए गए थे। परिजनों ने कहा कि स्कूल तो पाड़ला में चलाया जा रहा है। जबकि बस का रजिस्ट्रेशन कैथल के स्कूल के नाम से है। इस तरह से स्कूल संचालक मिलीभगत कर बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ कर रहे हैं।
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प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में परिजनों ने कहा कि एक मासूम, निर-अपराध बच्ची से उसके जीने का अधिकार, सुरक्षा का अधिकार छीनने के दोषी स्कूल संचालकों ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान को भी गहरा झटका दिया है। साथ ही मां-बाप के उन सपनों को रौंद दिया, जो उन्होंने अपनी बच्ची को लेकर देखे थे। परिजनों ने मांग करते हुए कहा कि स्कूल संचालक के खिलाफ गैर इरादतन हत्या के आरोप में केस दर्ज होना चाहिए। जिसमें कम से कम दस साल के कारावास की सजा का प्रावधान है।
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चालक ने जानबूझकर दिया था घटना को अंजाम
अपने ज्ञापन में परिजनों ने बताया कि 30 अप्रैल को गुरुदत्त की पुत्री रक्षिता गांव गुहणा में अपने नाना के घर से बस में पढ़ने के लिए निजी स्कूल में गई थी। जहां से वापस लौटते समय बस ड्राइवर बिना सहायक के ही बच्चों को उतार रहा था। इसी बीच उसके नाना के घर से पहले ही बस चालक ने बस को दौड़ा दिया। गांववासी अमन शर्मा, विक्रम ने बस के पीछे दौड़ते हुए बस चालक को रुकवाने का प्रयास किया। क्योंकि रक्षिता बस की खिड़की में थी। इसी बीच वह बस से नीचे गिर गई और गंभीर रूप से घायल हो गई। बाद में अस्पताल में उसकी मौत हो गई। इसके बाद पुलिस ने चालक के खिलाफ केस दर्ज कर लिया। लेकिन बाद में वह जमानत पर छूट गया।
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इसके बावजूद स्कूल संचालक के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। क्योंकि उसने बस में परिचालक नहीं भेजा। जो बच्चों को बस में सुरक्षित चढ़ाने व बस से सुरक्षित उतारने के लिए आवश्यक होता है। बस में आवश्यक सुरक्षा उपाय भी नहीं किए गए थे। परिजनों ने कहा कि स्कूल तो पाड़ला में चलाया जा रहा है। जबकि बस का रजिस्ट्रेशन कैथल के स्कूल के नाम से है। इस तरह से स्कूल संचालक मिलीभगत कर बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ कर रहे हैं।
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प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में परिजनों ने कहा कि एक मासूम, निर-अपराध बच्ची से उसके जीने का अधिकार, सुरक्षा का अधिकार छीनने के दोषी स्कूल संचालकों ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान को भी गहरा झटका दिया है। साथ ही मां-बाप के उन सपनों को रौंद दिया, जो उन्होंने अपनी बच्ची को लेकर देखे थे। परिजनों ने मांग करते हुए कहा कि स्कूल संचालक के खिलाफ गैर इरादतन हत्या के आरोप में केस दर्ज होना चाहिए। जिसमें कम से कम दस साल के कारावास की सजा का प्रावधान है।