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Kaithal News: बॉर्डर पर बंद किए रास्ते से राहगीर परेशान
Sun, 25 Feb 2024 01:44 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sun, 25 Feb 2024 01:44 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुहला-चीका। हरियाणा-पंजाब सीमा पर टटियाना बॉर्डर पर बंद किए रास्ते को लेकर राहगीर काफी परेशान हो गए हैं। लोगों के सब्र का बांध भी कभी भी टूट सकता है। राहगीरों को कहीं भी जाना हो, वे समय पर नहीं पहुंच पाते।
राहगीर काला राम, रणजीत सिंह, प्रवीण कुमार, होशियार सिंह, संतोष, जसबीर सिंह, निर्मल सिंह, कुलदीप सिंह, अजय व अशोक ने बताया कि जब 12 दिनों से हरियाणा-पंजाब सीमा पर लगाए गए नाके को पार करने के लिए कोई भी किसान नहीं आया तो फिर सरकार व प्रशासन को चाहिए कि नाका खोल दिया जाए। आमजन अब इतना परेशान हो चुका है कि लोगों के सब्र का बांध टूटने वाला है।
उन्होंने कहा कि लोग चीका से घग्गर नदी पर लगे नाके तक जाने के लिए ऑटो लेते हैं, फिर एक किलोमीटर से भी ज्यादा का सफर बॉर्डर पंजाब की तरफ पार करना पड़ता है।
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अर्धसैनिक बलों के जवान डटे बॉर्डर पर ः हरियाणा-पंजाब सीमा पर टटियाना बॉर्डर पर लगाए गए नाके के 12वें दिन आईटीबीपी व पुलिस के तमाम अधिकारी ज्यों के त्यों डटे हुए हैं। बॉर्डर पर 24 घंटे आईटीबीपी पुलिस व हरियाणा पुलिस के जवान भी मौजूद होते हैं। एसडीएम कृष्ण कुमार व नायब तहसीलदार सुनील कुमार भी पूरा दिन बॉर्डर पर डेरा डाले रहते हैं।
इंटरनेट सेवा पूरी तरह ठप पड़ी है। इसका सबसे ज्यादा नुकसान स्कूल-कॉलेज जाने वाले विद्यार्थियों को उठाना पड़ रहा हैं। स्कूलों की परीक्षाएं चल रही हैं ऐसे में रास्ते बंद होने के कारण स्कूल नहीं पहुंच पाने वाले विद्यार्थियों को अपना एक साल बर्बाद होने का डर सताने लगा है। स्कूल व कॉलेज में पढऩे वाले विद्यार्थी रविश, पवन, रोहताश, अंजू रानी व प्रवीण ने कहा कि रास्ते खोले जाएं व इंटरनेट सेवा को तुरंत चालू किया जाए।
इंटरनेट बंद होने से हुए परेशान ः चीका की मंडी एशिया की प्रमुख अनाज मंडियों में आती है। इस शहर में जहां चावल उद्योग काफी में हैं, वहीं पत्थर मार्केट के नाम से भी चीका शहर की पहचान है।
व्यापारी अशोक कुमार, राजकुमार, पुरुषोत्तम दास, मांगे राम व अनुज ने बताया कि आज 12वां दिन है। इंटरनेट व रास्ते बंद हैं। उन्होंने कहा जहां पत्थर मार्केट में एक भी ग्राहक दिखाई नहीं देता, वहीं चावल व धान का छिलका खरीदने वाले व्यापारी भी चीका में नहीं आ रहे। इस कारण छिलके के भाव 150 से 200 रुपये प्रति क्विंटल गिर गए हैं। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि व्यापारी वर्ग सरकार को सारा टैक्स देते हैं जिससे सरकार का खजाना भरा रहता है इसलिए इंटरनेट सेवा व रास्ता खोला जाए।
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गुहला-चीका। हरियाणा-पंजाब सीमा पर टटियाना बॉर्डर पर बंद किए रास्ते को लेकर राहगीर काफी परेशान हो गए हैं। लोगों के सब्र का बांध भी कभी भी टूट सकता है। राहगीरों को कहीं भी जाना हो, वे समय पर नहीं पहुंच पाते।
राहगीर काला राम, रणजीत सिंह, प्रवीण कुमार, होशियार सिंह, संतोष, जसबीर सिंह, निर्मल सिंह, कुलदीप सिंह, अजय व अशोक ने बताया कि जब 12 दिनों से हरियाणा-पंजाब सीमा पर लगाए गए नाके को पार करने के लिए कोई भी किसान नहीं आया तो फिर सरकार व प्रशासन को चाहिए कि नाका खोल दिया जाए। आमजन अब इतना परेशान हो चुका है कि लोगों के सब्र का बांध टूटने वाला है।
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उन्होंने कहा कि लोग चीका से घग्गर नदी पर लगे नाके तक जाने के लिए ऑटो लेते हैं, फिर एक किलोमीटर से भी ज्यादा का सफर बॉर्डर पंजाब की तरफ पार करना पड़ता है।
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अर्धसैनिक बलों के जवान डटे बॉर्डर पर ः हरियाणा-पंजाब सीमा पर टटियाना बॉर्डर पर लगाए गए नाके के 12वें दिन आईटीबीपी व पुलिस के तमाम अधिकारी ज्यों के त्यों डटे हुए हैं। बॉर्डर पर 24 घंटे आईटीबीपी पुलिस व हरियाणा पुलिस के जवान भी मौजूद होते हैं। एसडीएम कृष्ण कुमार व नायब तहसीलदार सुनील कुमार भी पूरा दिन बॉर्डर पर डेरा डाले रहते हैं।
इंटरनेट सेवा पूरी तरह ठप पड़ी है। इसका सबसे ज्यादा नुकसान स्कूल-कॉलेज जाने वाले विद्यार्थियों को उठाना पड़ रहा हैं। स्कूलों की परीक्षाएं चल रही हैं ऐसे में रास्ते बंद होने के कारण स्कूल नहीं पहुंच पाने वाले विद्यार्थियों को अपना एक साल बर्बाद होने का डर सताने लगा है। स्कूल व कॉलेज में पढऩे वाले विद्यार्थी रविश, पवन, रोहताश, अंजू रानी व प्रवीण ने कहा कि रास्ते खोले जाएं व इंटरनेट सेवा को तुरंत चालू किया जाए।
इंटरनेट बंद होने से हुए परेशान ः चीका की मंडी एशिया की प्रमुख अनाज मंडियों में आती है। इस शहर में जहां चावल उद्योग काफी में हैं, वहीं पत्थर मार्केट के नाम से भी चीका शहर की पहचान है।
व्यापारी अशोक कुमार, राजकुमार, पुरुषोत्तम दास, मांगे राम व अनुज ने बताया कि आज 12वां दिन है। इंटरनेट व रास्ते बंद हैं। उन्होंने कहा जहां पत्थर मार्केट में एक भी ग्राहक दिखाई नहीं देता, वहीं चावल व धान का छिलका खरीदने वाले व्यापारी भी चीका में नहीं आ रहे। इस कारण छिलके के भाव 150 से 200 रुपये प्रति क्विंटल गिर गए हैं। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि व्यापारी वर्ग सरकार को सारा टैक्स देते हैं जिससे सरकार का खजाना भरा रहता है इसलिए इंटरनेट सेवा व रास्ता खोला जाए।