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Kaithal News: नागरिक अस्पताल के मरीजों को बाहर से खरीदनी पड़ रहीं दवाएं
Sat, 21 Feb 2026 01:23 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sat, 21 Feb 2026 01:23 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। मुख्य नागरिक अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति सवालों के घेरे में है। दवा भंडार में कई जरूरी दवाओं का स्टॉक खत्म होने के कगार पर है, जिसके चलते मरीजों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। बाहर से दवाएं खरीदना मजबूरी बन गया है।
डॉक्टरों की लिखी कई दवाएं फार्मेसी काउंटर पर उपलब्ध नहीं मिल रहीं। खासकर आंखों की ड्रॉप्स, एंटी-एलर्जिक दवाएं, सांस की बीमारियों से संबंधित इनहेलर और अन्य सॉल्ट की कमी बताई जा रही है। ओपीडी के बाद जब मरीज दवा लेने पहुंचते हैं, तो उन्हें दवा उपलब्ध नहीं है... कहकर लौटा दिया जाता है।
सरकारी अस्पताल में मुफ्त दवा न मिलने का सीधा असर आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों पर पड़ रहा है। दूर-दराज के गांवों से आने वाले दिहाड़ी मजदूर इलाज की उम्मीद में अस्पताल पहुंचते हैं, लेकिन दवाएं न मिलने पर उन्हें मेडिकल स्टोर से खरीदारी करनी पड़ रही है।
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आंख का ऑपरेशन हुए करीब एक महीना हो चुका है। डॉक्टर ने नियमित आई ड्रॉप्स लेने की सलाह दी थी। दवा काउंटर पर दवा उपलब्ध नहीं मिली और उन्हें जन औषधि केंद्र भेजा गया। वहां से एक शीशी मिली, जबकि डॉक्टर ने दो लिखी थीं। दूसरी शीशी बाहर मेडिकल स्टोर से खरीदनी पड़ी। -महेंद्र सिंह, सिस्मोर।
आंखों की दवा के लिए अस्पताल आया था। काउंटर पर दवा न होने की बात कहकर औषधालय भेज दिया गया। वहां भी पूरी दवा उपलब्ध नहीं थी और एक दवा बाहर से खरीदने को कहा गया। -किताबा, पाई
मैं अपने बच्चे के इलाज के लिए अस्पताल पहुंचा था। डॉक्टर ने भाप में देने वाली दवा लिखी, लेकिन अस्पताल में उपलब्ध नहीं थी। बाहर मेडिकल स्टोर से यह दवा खरीदनी पड़ी, जिससे अतिरिक्त खर्च और परेशानी उठानी पड़ी। -ईश्वर, बरटा।
वर्जन
विभाग में सभी प्रकार की दवाएं मरीजों को निःशुल्क उपलब्ध करवाई जाती हैं। यदि कोई दवा खत्म हो जाती है तो उसकी लोकल परचेज की जाती है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच करवाई जाएगी और जिस दवा की कमी होगी, उसे शीघ्र पूरा किया जाएगा। -डॉ. रेनू चावला, सिविल सर्जन
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कैथल। मुख्य नागरिक अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति सवालों के घेरे में है। दवा भंडार में कई जरूरी दवाओं का स्टॉक खत्म होने के कगार पर है, जिसके चलते मरीजों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। बाहर से दवाएं खरीदना मजबूरी बन गया है।
डॉक्टरों की लिखी कई दवाएं फार्मेसी काउंटर पर उपलब्ध नहीं मिल रहीं। खासकर आंखों की ड्रॉप्स, एंटी-एलर्जिक दवाएं, सांस की बीमारियों से संबंधित इनहेलर और अन्य सॉल्ट की कमी बताई जा रही है। ओपीडी के बाद जब मरीज दवा लेने पहुंचते हैं, तो उन्हें दवा उपलब्ध नहीं है... कहकर लौटा दिया जाता है।
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सरकारी अस्पताल में मुफ्त दवा न मिलने का सीधा असर आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों पर पड़ रहा है। दूर-दराज के गांवों से आने वाले दिहाड़ी मजदूर इलाज की उम्मीद में अस्पताल पहुंचते हैं, लेकिन दवाएं न मिलने पर उन्हें मेडिकल स्टोर से खरीदारी करनी पड़ रही है।
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आंख का ऑपरेशन हुए करीब एक महीना हो चुका है। डॉक्टर ने नियमित आई ड्रॉप्स लेने की सलाह दी थी। दवा काउंटर पर दवा उपलब्ध नहीं मिली और उन्हें जन औषधि केंद्र भेजा गया। वहां से एक शीशी मिली, जबकि डॉक्टर ने दो लिखी थीं। दूसरी शीशी बाहर मेडिकल स्टोर से खरीदनी पड़ी। -महेंद्र सिंह, सिस्मोर।
आंखों की दवा के लिए अस्पताल आया था। काउंटर पर दवा न होने की बात कहकर औषधालय भेज दिया गया। वहां भी पूरी दवा उपलब्ध नहीं थी और एक दवा बाहर से खरीदने को कहा गया। -किताबा, पाई
मैं अपने बच्चे के इलाज के लिए अस्पताल पहुंचा था। डॉक्टर ने भाप में देने वाली दवा लिखी, लेकिन अस्पताल में उपलब्ध नहीं थी। बाहर मेडिकल स्टोर से यह दवा खरीदनी पड़ी, जिससे अतिरिक्त खर्च और परेशानी उठानी पड़ी। -ईश्वर, बरटा।
वर्जन
विभाग में सभी प्रकार की दवाएं मरीजों को निःशुल्क उपलब्ध करवाई जाती हैं। यदि कोई दवा खत्म हो जाती है तो उसकी लोकल परचेज की जाती है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच करवाई जाएगी और जिस दवा की कमी होगी, उसे शीघ्र पूरा किया जाएगा। -डॉ. रेनू चावला, सिविल सर्जन