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Kaithal News: जीपीएस के पेंच में फंसा धान का उठान, मंडियों में एक लाख क्विंटल से ज्यादा स्टॉक खुले आसमान के नीचे
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चीका अनाज मंडी परिसर में उठान के इंतजार में पड़ा धान। संवाद
गुहला-चीका। अनाज मंडियों में धान की बंपर आवक के बीच उठान व्यवस्था चरमराने से किसानों और आढ़तियों की परेशानी बढ़ती जा रही है। चीका की पुरानी और नई अनाज मंडी में पिछले करीब पांच दिनों से उठान प्रभावित है। दोनों मंडियों में एक लाख से अधिक क्विंटल धान तुलाई और खरीद के बाद उठान के इंतजार में पड़ा है।
मंडी परिसर में करीब 80 प्रतिशत जगह धान से भर चुकी है। जगह की कमी के कारण किसानों को फसल उतारने में परेशानी हो रही है और धान से भरी ट्रॉलियां मंडी के बाहर सड़क पर खड़ी करनी पड़ रही है। कई जगह ट्रॉलियों की कतार करीब दो किलोमीटर तक पहुंच गई है। आढ़तियों का कहना है कि पुराना धान मंडी से बाहर नहीं जा रहा, जबकि नई फसल की आवक लगातार जारी है। ऐसे में किसानों की फसल कहां उतरवाई जाए, यह सबसे बड़ी समस्या बन गई है। उठान में देरी के कारण खरीद और तुलाई पूरी होने के बाद भी किसानों को भुगतान का इंतजार करना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि धान बेचने के बाद उन्हें आढ़तियों से भी भुगतान नहीं मिल पा रहा, क्योंकि सरकार की ओर से सीधा भुगतान किए जाने की व्यवस्था है। आढ़ती एसोसिएशन के सदस्य अशोक गर्ग और राजकुमार जखौली ने कहा कि मंडी में करीब 80 प्रतिशत जगह धान से भर चुकी है। उठान की गति धीमी होने से लेबर और व्यापारिक गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने प्रशासन से उठान तेज करवाने की मांग की।
बारिश हुई तो खुले में पड़ी फसल को नुकसान का डर
उठान नहीं होने के कारण कई ट्रॉलियां मंडी के बाहर सड़कों पर खड़ी हैं। किसानों को डर है कि मौसम खराब होने या बारिश होने पर खुले में पड़ी धान की फसल खराब हो सकती है। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि अगले 24 घंटे में उठान शुरू नहीं हुआ और बारिश से फसल खराब हुई तो इसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
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जीपीएस व्यवस्था को बताया उठान में देरी का कारण
आढ़तियों और किसानों का आरोप है कि ट्रकों में जीपीएस लगाने की प्रक्रिया के कारण उठान प्रभावित हो रहा है। उनका कहना है कि पारदर्शिता के लिए जीपीएस व्यवस्था ठीक है लेकिन तकनीकी प्रक्रिया के कारण किसानों की फसल मंडी में अटकी नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने सरकार और संबंधित विभाग से तकनीकी दिक्कत दूर कर ट्रांसपोर्ट व्यवस्था तेज करने की मांग की।
उठान सुचारू रूप से जारी है : राहुल जाखड़
एएफएसओ चीका राहुल जाखड़ ने कहा कि धान का उठान सुचारू रूप से हो रहा है। जीपीएस व्यवस्था सरकार की अच्छी पहल है। इससे हर ट्रक की लाइव लोकेशन और उसके मंडी से राइस मिल तक पहुंचने की निगरानी की जा रही है। शुरुआत में ट्रांसपोर्टरों को जीपीएस लगाने में दिक्कत आई थी, लेकिन अब करीब 90 प्रतिशत ट्रकों पर जीपीएस लगाया जा चुका है। उन्होंने कहा कि जिन किसानों की धान की तुलाई हो चुकी है, उनकी पेमेंट 48 घंटे में बैंक खातों में पहुंच जाएगी।
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मंडी परिसर में करीब 80 प्रतिशत जगह धान से भर चुकी है। जगह की कमी के कारण किसानों को फसल उतारने में परेशानी हो रही है और धान से भरी ट्रॉलियां मंडी के बाहर सड़क पर खड़ी करनी पड़ रही है। कई जगह ट्रॉलियों की कतार करीब दो किलोमीटर तक पहुंच गई है। आढ़तियों का कहना है कि पुराना धान मंडी से बाहर नहीं जा रहा, जबकि नई फसल की आवक लगातार जारी है। ऐसे में किसानों की फसल कहां उतरवाई जाए, यह सबसे बड़ी समस्या बन गई है। उठान में देरी के कारण खरीद और तुलाई पूरी होने के बाद भी किसानों को भुगतान का इंतजार करना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि धान बेचने के बाद उन्हें आढ़तियों से भी भुगतान नहीं मिल पा रहा, क्योंकि सरकार की ओर से सीधा भुगतान किए जाने की व्यवस्था है। आढ़ती एसोसिएशन के सदस्य अशोक गर्ग और राजकुमार जखौली ने कहा कि मंडी में करीब 80 प्रतिशत जगह धान से भर चुकी है। उठान की गति धीमी होने से लेबर और व्यापारिक गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने प्रशासन से उठान तेज करवाने की मांग की।
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बारिश हुई तो खुले में पड़ी फसल को नुकसान का डर
उठान नहीं होने के कारण कई ट्रॉलियां मंडी के बाहर सड़कों पर खड़ी हैं। किसानों को डर है कि मौसम खराब होने या बारिश होने पर खुले में पड़ी धान की फसल खराब हो सकती है। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि अगले 24 घंटे में उठान शुरू नहीं हुआ और बारिश से फसल खराब हुई तो इसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
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जीपीएस व्यवस्था को बताया उठान में देरी का कारण
आढ़तियों और किसानों का आरोप है कि ट्रकों में जीपीएस लगाने की प्रक्रिया के कारण उठान प्रभावित हो रहा है। उनका कहना है कि पारदर्शिता के लिए जीपीएस व्यवस्था ठीक है लेकिन तकनीकी प्रक्रिया के कारण किसानों की फसल मंडी में अटकी नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने सरकार और संबंधित विभाग से तकनीकी दिक्कत दूर कर ट्रांसपोर्ट व्यवस्था तेज करने की मांग की।
उठान सुचारू रूप से जारी है : राहुल जाखड़
एएफएसओ चीका राहुल जाखड़ ने कहा कि धान का उठान सुचारू रूप से हो रहा है। जीपीएस व्यवस्था सरकार की अच्छी पहल है। इससे हर ट्रक की लाइव लोकेशन और उसके मंडी से राइस मिल तक पहुंचने की निगरानी की जा रही है। शुरुआत में ट्रांसपोर्टरों को जीपीएस लगाने में दिक्कत आई थी, लेकिन अब करीब 90 प्रतिशत ट्रकों पर जीपीएस लगाया जा चुका है। उन्होंने कहा कि जिन किसानों की धान की तुलाई हो चुकी है, उनकी पेमेंट 48 घंटे में बैंक खातों में पहुंच जाएगी।

चीका अनाज मंडी परिसर में उठान के इंतजार में पड़ा धान। संवाद