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बारिश से धान को फायदा, किसानों के चेहरे खिले
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35-कैथल। रविवार को हुई बूंदा बांदी के बीच गुजरते हुए लोग।
- फोटो : Kaithal
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कैथल। दो दिन में हुई बरसात से धान की फसल को फायदा मिला है। अब धान की रोपाई के कार्य में फिर से तेजी आएगी। रविवार को दूसरे दिन भी जिले में कई स्थानों पर रुक-रुक बरसात हुई। सुबह के समय हुई बरसात से लोगों को गर्मी से राहत मिली है। इससे किसानों के चेहरों भी खिले हैं।
पिछले कई दिन से बरसात न होने की स्थिति में उमस भरी गर्मी ने परेशान किया था। इस दौरान धान की फसल भी सूखने की कगार पर पहुंच गई थी। दो दिन में 163 एमएम बरसात हुई है। जिले में औसत बारिश 23.2 एमएम रिकॉर्ड की गई। इसमें कलायत में सबसे अधिक 53 एमएम व सीवन में सबसे कम दो एमएम बारिश दर्ज की गई। पहले दिन शनिवार को 21 एमएम ही बरसात हुई थी। बरसात के कारण जिले के कई क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति बनी। सबसे अधिक समस्या कलायत और राजौंद में हुई। पूंडरी में 42, ढांड में 27, राजौंद में 20 और कैथल में महज पांच एमएम बारिश दर्ज की गई है। अन्य इलाकों में भी छिटपुट बारिश हुई।
कृषि विज्ञान केंद्र के मुख्य समन्वयक डॉ. रमेश चंद्र वर्मा ने बताया कि किसान अपने खेतों में धान की रोपाई के बाद फसल में पानी देने की प्रक्रिया व्यवस्थित रखें। यदि किसी किसान ने 15 दिन पहले धान की रोपाई की है तो वे पानी कम दें। यदि एक सप्ताह पहले ही धान उगाई है तो पानी अधिक दें। इस बारिश से धान उत्पादक किसानों को राहत मिली है।
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बुखार के बढ़े मरीज
बरसात होने के बाद मौसम में अचानक हुए बदलाव के बाद बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ी है। डेंगू की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने शनिवार को गांव तितरम व सहारन में कुल 25 लोगों के सैंपल लिए थे। इस मौसम में डेंगू व मलेरिया से ग्रस्त होने की अधिक संभावना रहती है।
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पिछले कई दिन से बरसात न होने की स्थिति में उमस भरी गर्मी ने परेशान किया था। इस दौरान धान की फसल भी सूखने की कगार पर पहुंच गई थी। दो दिन में 163 एमएम बरसात हुई है। जिले में औसत बारिश 23.2 एमएम रिकॉर्ड की गई। इसमें कलायत में सबसे अधिक 53 एमएम व सीवन में सबसे कम दो एमएम बारिश दर्ज की गई। पहले दिन शनिवार को 21 एमएम ही बरसात हुई थी। बरसात के कारण जिले के कई क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति बनी। सबसे अधिक समस्या कलायत और राजौंद में हुई। पूंडरी में 42, ढांड में 27, राजौंद में 20 और कैथल में महज पांच एमएम बारिश दर्ज की गई है। अन्य इलाकों में भी छिटपुट बारिश हुई।
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कृषि विज्ञान केंद्र के मुख्य समन्वयक डॉ. रमेश चंद्र वर्मा ने बताया कि किसान अपने खेतों में धान की रोपाई के बाद फसल में पानी देने की प्रक्रिया व्यवस्थित रखें। यदि किसी किसान ने 15 दिन पहले धान की रोपाई की है तो वे पानी कम दें। यदि एक सप्ताह पहले ही धान उगाई है तो पानी अधिक दें। इस बारिश से धान उत्पादक किसानों को राहत मिली है।
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बुखार के बढ़े मरीज
बरसात होने के बाद मौसम में अचानक हुए बदलाव के बाद बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ी है। डेंगू की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने शनिवार को गांव तितरम व सहारन में कुल 25 लोगों के सैंपल लिए थे। इस मौसम में डेंगू व मलेरिया से ग्रस्त होने की अधिक संभावना रहती है।