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Kaithal News: संघर्षों से उबरकर जूडो में चमकीं आशा
Thu, 09 Apr 2026 01:35 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Thu, 09 Apr 2026 01:35 AM IST
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आशा सैनी
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिले की बेटी आशा सैनी ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपनी मेहनत और हौसले के दम पर जूडो के क्षेत्र में अलग पहचान बनाई है। 27 वर्षीय आशा सैनी वर्तमान में कृषि विभाग में लैब अटेंडेंट के पद पर कार्यरत हैं।
आशा सैनी ने महज 14 वर्ष की आयु में जूडो खेलना शुरू किया था। शुरुआती दिनों में उन्होंने जाट ग्राउंड में अभ्यास किया, जहां कोच राजेश और संदीप के मार्गदर्शन में उन्होंने अपने खेल को निखारा। भले ही वर्तमान में उनकी नियमित ट्रेनिंग नहीं चल रही है, लेकिन अपने खेल कॅरिअर के दौरान वह रोजाना सुबह-शाम करीब चार घंटे तक कड़ी मेहनत करती थीं।
आशा का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। जब वह केवल छह वर्ष की थीं, तभी उनके पिता मदन लाल का निधन हो गया। इसके बाद उनकी मां ने मजदूरी कर अपने तीनों बच्चों- बड़ी बहन, आशा और छोटे भाई का पालन-पोषण किया।
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आर्थिक तंगी के बावजूद उनकी मां और बहन ने हमेशा उन्हें खेल और पढ़ाई के लिए प्रेरित किया। आशा मानती हैं कि बिना पिता के जीवन कठिन होता है, लेकिन परिवार के सहयोग ने उन्हें कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया।
हालांकि उनके कॅरिअर में एक समय ऐसा भी आया जब घुटने की चोट के कारण वह खेल जारी नहीं रख सकीं, अब वह लैब अटेंडेंट बन चुकी हैं।
उपलब्धियां
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आशा सैनी ने दो बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व किया है।
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सीनियर नेशनल जूडो प्रतियोगिता में उन्होंने कांस्य पदक हासिल किया।
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सिविल सर्विसेज जूडो प्रतियोगिताओं में उन्होंने स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक जीता।
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जूनियर नेशनल स्तर पर भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए तीन बार ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी में स्वर्ण पदक जीता।
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कैथल। जिले की बेटी आशा सैनी ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपनी मेहनत और हौसले के दम पर जूडो के क्षेत्र में अलग पहचान बनाई है। 27 वर्षीय आशा सैनी वर्तमान में कृषि विभाग में लैब अटेंडेंट के पद पर कार्यरत हैं।
आशा सैनी ने महज 14 वर्ष की आयु में जूडो खेलना शुरू किया था। शुरुआती दिनों में उन्होंने जाट ग्राउंड में अभ्यास किया, जहां कोच राजेश और संदीप के मार्गदर्शन में उन्होंने अपने खेल को निखारा। भले ही वर्तमान में उनकी नियमित ट्रेनिंग नहीं चल रही है, लेकिन अपने खेल कॅरिअर के दौरान वह रोजाना सुबह-शाम करीब चार घंटे तक कड़ी मेहनत करती थीं।
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आशा का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। जब वह केवल छह वर्ष की थीं, तभी उनके पिता मदन लाल का निधन हो गया। इसके बाद उनकी मां ने मजदूरी कर अपने तीनों बच्चों- बड़ी बहन, आशा और छोटे भाई का पालन-पोषण किया।
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आर्थिक तंगी के बावजूद उनकी मां और बहन ने हमेशा उन्हें खेल और पढ़ाई के लिए प्रेरित किया। आशा मानती हैं कि बिना पिता के जीवन कठिन होता है, लेकिन परिवार के सहयोग ने उन्हें कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया।
हालांकि उनके कॅरिअर में एक समय ऐसा भी आया जब घुटने की चोट के कारण वह खेल जारी नहीं रख सकीं, अब वह लैब अटेंडेंट बन चुकी हैं।
उपलब्धियां
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आशा सैनी ने दो बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व किया है।
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सीनियर नेशनल जूडो प्रतियोगिता में उन्होंने कांस्य पदक हासिल किया।
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सिविल सर्विसेज जूडो प्रतियोगिताओं में उन्होंने स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक जीता।
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जूनियर नेशनल स्तर पर भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए तीन बार ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी में स्वर्ण पदक जीता।