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Kaithal News: 17 लाख का बकाया, 1 लाख जमा कर जारी किया एनडीसी
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कैथल। नगर परिषद में प्रॉपर्टी टैक्स में गड़बड़ी कर लाखों रुपये का बकाया कम दिखाकर एनडीसी यानी नो ड्यूज सर्टिफिकेट जारी करने के मामले में जांच कमेटी ने दो शिकायतों को सही पाया है।
जांच के बाद संबंधित संपत्तियों को नियमानुसार तीन-तीन नोटिस जारी किए जा चुके हैं। अब मामले में कोर्ट में वाद दायर करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
जिला नगर आयुक्त कपिल शर्मा के निर्देश पर नगर परिषद सचिव मोहन लाल की अध्यक्षता में गठित जांच कमेटी ने अपनी जांच पूरी कर ली है। मोहन लाल ने बताया कि दो प्रॉपर्टी आईडी में छेड़छाड़ कर बकाया प्रॉपर्टी टैक्स कम दर्शाते हुए राशि जमा कराई गई और इसके बाद एनडीसी जारी कर दिया गया। जांच में शिकायतें सही पाई गई हैं।
जांच के अनुसार ढांड रोड स्थित एक निजी पैलेस पर करीब 17 लाख रुपये से अधिक का प्रॉपर्टी टैक्स बकाया था लेकिन कथित रूप से लगभग एक लाख रुपये जमा करवाकर एनडीसी जारी कर दिया गया। इसी प्रकार एक निजी स्कूल के मामले में भी प्रॉपर्टी टैक्स संबंधी अनियमितता सामने आई है और उसे भी एनडीसी जारी किया गया था।
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जांच कमेटी ने दोनों मामलों में संबंधित पक्षों को तीन-तीन नोटिस जारी किए हैं। इसके बाद नियमानुसार कोर्ट में केस दायर किया जाएगा।
साथ ही पूरी जांच रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह महज लिपिकीय त्रुटि थी या फिर जानबूझकर की गई अनियमितता।
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जांच के बाद संबंधित संपत्तियों को नियमानुसार तीन-तीन नोटिस जारी किए जा चुके हैं। अब मामले में कोर्ट में वाद दायर करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
जिला नगर आयुक्त कपिल शर्मा के निर्देश पर नगर परिषद सचिव मोहन लाल की अध्यक्षता में गठित जांच कमेटी ने अपनी जांच पूरी कर ली है। मोहन लाल ने बताया कि दो प्रॉपर्टी आईडी में छेड़छाड़ कर बकाया प्रॉपर्टी टैक्स कम दर्शाते हुए राशि जमा कराई गई और इसके बाद एनडीसी जारी कर दिया गया। जांच में शिकायतें सही पाई गई हैं।
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जांच के अनुसार ढांड रोड स्थित एक निजी पैलेस पर करीब 17 लाख रुपये से अधिक का प्रॉपर्टी टैक्स बकाया था लेकिन कथित रूप से लगभग एक लाख रुपये जमा करवाकर एनडीसी जारी कर दिया गया। इसी प्रकार एक निजी स्कूल के मामले में भी प्रॉपर्टी टैक्स संबंधी अनियमितता सामने आई है और उसे भी एनडीसी जारी किया गया था।
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जांच कमेटी ने दोनों मामलों में संबंधित पक्षों को तीन-तीन नोटिस जारी किए हैं। इसके बाद नियमानुसार कोर्ट में केस दायर किया जाएगा।
साथ ही पूरी जांच रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह महज लिपिकीय त्रुटि थी या फिर जानबूझकर की गई अनियमितता।