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Kaithal News: आयुष्मान योजना में ऑपरेशन किए बंद सरकार पर 15 करोड़ रुपये का बकाया
Fri, 08 Aug 2025 01:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Fri, 08 Aug 2025 01:00 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के आह्वान पर वीरवार को जिले के 12 निजी अस्पतालों ने आयुष्मान भारत योजना के तहत ऑपरेशन बंद कर दिए। अस्पतालों के बाहर इसके नोटिस चस्पा कर दिए गए, जिससे मरीजों और तीमारदारों को बिना इलाज के लौटना पड़ा। कई अस्पतालों में तो हड़ताल की सूचना मिलते ही मरीज पहुंचे ही नहीं।
निजी अस्पतालों की स कार्रवाई से जिला व उप-जिला नागरिक अस्पतालों की ओपीडी पर असर पड़ा। सामान्य दिनों की तुलना में वीरवार को 15 प्रतिशत अधिक मरीज पहुंचे। सामान्य अस्पताल में ओपीडी की संख्या जहां औसतन एक हजार रहती थी, वहीं गुरुवार को यह आंकड़ा 1200 के पार पहुंच गया।
आईएमए के जिला प्रधान डॉ. ललित जांगड़ा ने बताया कि सरकार पर जिले के 12 निजी अस्पतालों का करीब 15 करोड़ रुपये बकाया है। इसके बावजूद 7 अगस्त तक भी भुगतान नहीं होने पर अस्पतालों को मजबूरीवश ऑपरेशन बंद करने पड़े। उन्होंने बताया कि आयुष्मान योजना के तहत मरीजों के इलाज का खर्च सरकार वहन करती है, लेकिन लंबे समय से बिलों का भुगतान नहीं हुआ है।
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डॉ. जांगड़ा ने बताया कि भुगतान में देरी के अलावा बिलों में कटौती या लिपिकीय त्रुटियों के चलते बिल रद्द कर दिए जाते हैं, यहां तक कि जुर्माना भी लगाया जाता है। इससे अस्पताल संचालकों में असंतोष है।
उन्होंने यह भी बताया कि ऑपरेशन बंद करने के कारण लगभग 50 सर्जरी टालनी पड़ीं। निजी अस्पतालों की मांग है कि सरकार जल्द से जल्द लंबित भुगतान करे, बिलों में मनमानी कटौती बंद हो और सिस्टम में पारदर्शिता लाई जाए, ताकि योजना के लाभार्थियों को परेशानी न हो और अस्पतालों को आर्थिक संकट से न जूझना पड़े।
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कैथल। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के आह्वान पर वीरवार को जिले के 12 निजी अस्पतालों ने आयुष्मान भारत योजना के तहत ऑपरेशन बंद कर दिए। अस्पतालों के बाहर इसके नोटिस चस्पा कर दिए गए, जिससे मरीजों और तीमारदारों को बिना इलाज के लौटना पड़ा। कई अस्पतालों में तो हड़ताल की सूचना मिलते ही मरीज पहुंचे ही नहीं।
निजी अस्पतालों की स कार्रवाई से जिला व उप-जिला नागरिक अस्पतालों की ओपीडी पर असर पड़ा। सामान्य दिनों की तुलना में वीरवार को 15 प्रतिशत अधिक मरीज पहुंचे। सामान्य अस्पताल में ओपीडी की संख्या जहां औसतन एक हजार रहती थी, वहीं गुरुवार को यह आंकड़ा 1200 के पार पहुंच गया।
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आईएमए के जिला प्रधान डॉ. ललित जांगड़ा ने बताया कि सरकार पर जिले के 12 निजी अस्पतालों का करीब 15 करोड़ रुपये बकाया है। इसके बावजूद 7 अगस्त तक भी भुगतान नहीं होने पर अस्पतालों को मजबूरीवश ऑपरेशन बंद करने पड़े। उन्होंने बताया कि आयुष्मान योजना के तहत मरीजों के इलाज का खर्च सरकार वहन करती है, लेकिन लंबे समय से बिलों का भुगतान नहीं हुआ है।
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डॉ. जांगड़ा ने बताया कि भुगतान में देरी के अलावा बिलों में कटौती या लिपिकीय त्रुटियों के चलते बिल रद्द कर दिए जाते हैं, यहां तक कि जुर्माना भी लगाया जाता है। इससे अस्पताल संचालकों में असंतोष है।
उन्होंने यह भी बताया कि ऑपरेशन बंद करने के कारण लगभग 50 सर्जरी टालनी पड़ीं। निजी अस्पतालों की मांग है कि सरकार जल्द से जल्द लंबित भुगतान करे, बिलों में मनमानी कटौती बंद हो और सिस्टम में पारदर्शिता लाई जाए, ताकि योजना के लाभार्थियों को परेशानी न हो और अस्पतालों को आर्थिक संकट से न जूझना पड़े।