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दो सौ से अधिक फाइलों का रिकॉर्ड़ उड़ा, प्रॉपर्टी टेक्स ब्रांच में चक्कर काटने को मजबूर हैं लोग

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 28 Jul 2021 01:30 AM IST
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Online data of property tax destroyed, troubled public bidders also corrupt
नगर परिषद कार्यालय में प्रॉपर्टी टैक्स फाइलों के लिए ईओ कार्यालय के बाहर एकत्रित शहरवासी - फोटो : Kaithal
20 जून के बाद प्रापर्टी टैक्स संबंधी आनलाइन डाटा नष्ट हो जाने का खामियाजा शहर की जनता को भुगतना पड़ रहा है। परेशान शहरवासी आए दिन नगर परिषद कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। वहीं नप अधिकारियों की ओर से मुख्यालय स्तर से डाटा नष्ट होने का हवाला दिया जा रहा है। परेशान लोगों ने कार्यालय में भ्रष्टाचार और दलालों के बोलबाले का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि दलालों के माध्यम से मोटी रकम लेकर कार्य किये जा रहे हैं, जबकि आमजन को जानबूझकर परेशान किया जा रहा है।
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शहरवासी सुरेश कुमार, नत्थू लाल, रमेश कुमार, संजय, टिंकू आदि ने बताया कि वे नगर परिषद के चक्कर काट कर थक चुके हैं। उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही। जब सारे कागजात जमा करवा दिए तो आखिर चक्कर क्यों कटवाए जा रहे हैं? आरोप लगाया कि आमजन को चक्कर काटने पड़ रहे हैं और दलालों के माध्यम से आसानी से काम हो जाते हैं। सवाल उठाया कि यदि प्रापर्टी टैक्स के लिए फाइलों का रिकार्ड मुख्यालय स्तर से नष्ट हो गया है तो इसे दोबारा ऑनलाइन क्यों नहीं किया जा रहा। एक माह से अधिक समय बीतने के बाद भी लोगों की समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है। फाइलें अप्रूव नहीं होने से लोगों के जमीन के सौदे लटके हुए हैं और रजिस्टरी नहीं हो पा रही है। कारण कि नए नियम के अनुसार जब तक विकास शुल्क जमा नहीं हो जाता, तब तक जमीन की रजिस्ट्री नहीं हो सकती। यह वैसे तो ऑनलाइन निकल जाता है, लेकिन जिस प्रॉपर्टी पर विकास शुल्क नियमानुसार ज्यादा या फिर घरेलू की बजाए कामर्शियल चढ़ा हुआ है। उस प्रॉपर्टी के लिए ऑनलाइन आवेदन करने के साथ-साथ आफलाइन फाइल भी जमा होती है। इसी तरह की करीब दो सौ से अधिक फाइलों का ऑनलाइन डाटा विभाग मुख्यालय स्तर पर नष्ट होने की बात की जा रही है।
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‘सीधे मुंह बात नहीं करते कर्मी’
पार्षद प्रतिनिधि दलबीर भान ने कहा कि नगर परिषद की टैक्स ब्रांच का बुरा हाल है। यहां लोगों से अभद्र व्यवहार किया जाता है। दलाल इस ब्रांच के अंदर व बाहर घूमते हैं। उनकी फाइलों पर तुरंत काम हो जाता है। कुछ कर्मचारी तो ऐसे हैं जो आम लोगों से सीधे मुंह बात तक नहीं करते। लोग अपनी फाइलों के लिए चक्कर काटने को मजबूर हैं।
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दलालों का अड्डा बनी हुई है टैक्स ब्रांच-
अमर उजाला ने जब आमजन के शिकायतों की पड़ताल की तो वह सही साबित हुईं। देखा गया कि एक व्यक्ति टैक्स ब्रांच के बाहर दो घंटे से खड़ा था। जब उससे पूछा गया कि क्या उसकी फाइल है तो इंकार कर दिया। इसके करीब एक घंटे बाद फिर वही व्यक्ति इस ब्रांच के बाहर खड़ा नजर आया। जब दोबारा उससे पूछा गया तो उसने फिर भी फाइल होने की बात से इंकार कर दिया। इसी प्रकार जब कर्मचारियों से पूछा गया कि अंदर क्या सभी विभाग के कर्मचारी हैं तो उन्होंने एक व्यक्ति को बाहर जाने के लिए कहा, जो अक्सर अंदर ही फाइल लिए नजर आता है।
नए ईओ आए हैं, उनका रजिस्ट्रेशन होगा, तब जाकर निकलेंगी पुरानी फाइलें-
प्रॉपर्टी टैक्स ब्रांच में कार्यरत सुनील कुमार ने बताया कि विभाग मुख्यालय स्तर पर 20 जून के बाद की ऑनलाइन की गई फाइलों का रिकॉर्ड नष्ट हो गया है। अब नए ईओ आए हैं, उनके नाम से अलग से रजिस्ट्रेशन होगा। इसके बाद ही पुरानी फाइलें निकल सकेंगी। प्रत्येक फाइल के लिए ईओ के मोबाइल पर ओटीपी आता है। जब वे ओटीपी बताते हैं, तभी जाकर फाइल निकलती है। प्रयास किया जा रहा है कि जल्द से जल्द रुकी हुई फाइलें निकल सकें।

ईओ रविंद्र कुहाड़ ने कहा कि उन्होंने अभी ज्वाइन किया है। वे पता करवा रहे हैं। जहां-जहां समस्या पता चल रही है, उसका समाधान ढूंढा जा रहा है। जो फाइलों का रिकॉर्ड उड़ा है, वह मुख्यालय स्तर पर है। उसे भी दुरुस्त करवाया जा रहा है। वे जल्द ही अपना रजिस्ट्रेशन करवा रहे हैं। उम्मीद है जल्द समस्याओं का समाधान हो जाएगा।

नगर परिषद कार्यालय में टैक्स ब्रांच का दृश्य

नगर परिषद कार्यालय में टैक्स ब्रांच का दृश्य- फोटो : Kaithal

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