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Kaithal News: श्रावणी पर्व पर तर्पण से देव, ऋषि पितृ दोष से मुक्ति संभव
Tue, 20 Aug 2024 05:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Tue, 20 Aug 2024 05:01 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
राजौंद। श्रावणी पर्व मनुष्य को देव, ऋषि व पितृ दोष से मुक्ति दिलाता है व दोष निवारण के लिए तर्पण अनुष्ठान में शामिल होने मात्र से मनुष्य दोषों से मुक्त हो जाता हैं। यह शुद्ध विचार आचार्य जीवन प्रकाश हरित जी व आचार्य पंडित राम भगत हरित ने नगर के जींद रोड पर स्थित नहर के किनारे आयोजित तर्पण कार्यक्रम के दौरान कहे।
कार्यक्रम के संयोजक आचार्यों ने बताया कि इस आयोजन को पिछले लगभग 69 वर्षों से प्रतिवर्ष आयोजित कर रहे हैं। तर्पण के उपरांत विधि पूर्वक सप्त ऋषि पूजा, यज्ञोपवीत पूजा तथा हवन यज्ञ किया गया, जिसमें सभी ने पूर्ण आहुति डालकर पुण्य कमाया। आचार्यों ने बताया कि यज्ञोपवीत धारण करने वाले व्यक्ति को यज्ञ में आहुति धर्म-कर्म अनुष्ठान करने का अधिकार प्राप्त होता है। यज्ञोपवीत धारण करने से गायत्री की दीक्षा मिलती है तथा गायत्री जप का फल प्राप्त होता है। श्रावणी कर्म इंसान के मन, वचन, काया से किए हुए पाप कर्मों का प्रायश्चित माना गया है। इस दौरान महाबीर, राजेंद्र शास्त्री, रमेश शास्त्री, आशुतोष, अनिरूद्ध, एकांत शास्त्री,, सतीश कौशल, सुदर्शन शास्त्री, संजय खुरड़ा, संजय बाहरी, कपिल, दुर्गा दत्त शर्मा ने तर्पण ऋषि पूजन में भाग लिया।
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राजौंद। श्रावणी पर्व मनुष्य को देव, ऋषि व पितृ दोष से मुक्ति दिलाता है व दोष निवारण के लिए तर्पण अनुष्ठान में शामिल होने मात्र से मनुष्य दोषों से मुक्त हो जाता हैं। यह शुद्ध विचार आचार्य जीवन प्रकाश हरित जी व आचार्य पंडित राम भगत हरित ने नगर के जींद रोड पर स्थित नहर के किनारे आयोजित तर्पण कार्यक्रम के दौरान कहे।
कार्यक्रम के संयोजक आचार्यों ने बताया कि इस आयोजन को पिछले लगभग 69 वर्षों से प्रतिवर्ष आयोजित कर रहे हैं। तर्पण के उपरांत विधि पूर्वक सप्त ऋषि पूजा, यज्ञोपवीत पूजा तथा हवन यज्ञ किया गया, जिसमें सभी ने पूर्ण आहुति डालकर पुण्य कमाया। आचार्यों ने बताया कि यज्ञोपवीत धारण करने वाले व्यक्ति को यज्ञ में आहुति धर्म-कर्म अनुष्ठान करने का अधिकार प्राप्त होता है। यज्ञोपवीत धारण करने से गायत्री की दीक्षा मिलती है तथा गायत्री जप का फल प्राप्त होता है। श्रावणी कर्म इंसान के मन, वचन, काया से किए हुए पाप कर्मों का प्रायश्चित माना गया है। इस दौरान महाबीर, राजेंद्र शास्त्री, रमेश शास्त्री, आशुतोष, अनिरूद्ध, एकांत शास्त्री,, सतीश कौशल, सुदर्शन शास्त्री, संजय खुरड़ा, संजय बाहरी, कपिल, दुर्गा दत्त शर्मा ने तर्पण ऋषि पूजन में भाग लिया।
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