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Kaithal News: निर्जला एकादशी व्रत 18 को, बन रहे सुखद संयोग
Mon, 17 Jun 2024 05:30 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Mon, 17 Jun 2024 05:30 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल/कलायत। हिंदू धर्म में निर्जला एकादशी व्रत का बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। उदना तिथि की वजह से इस बार 18 जून को निर्जला एकादशी का व्रत का पालन किया जाएगा। इस पर निर्जला एकादशी पर ज्योतिष के दृष्टिकोण से कई सुखद संयोग बन रहे हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो व्यक्ति एकादशी व्रत का पालन करता है उनके सभी कष्ट भगवान विष्णु दूर कर देते हैं। वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के दिन निर्जला एकादशी व्रत का पालन किया जाता है। निर्जला एकादशी व्रत को बहुत ही कठिन व्रत में गिना जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस दिन बिना अन्न और जल ग्रहण किए इस व्रत का पालन किया जाता है। कुछ लोगों के मन में निर्जला एकादशी की तिथि को लेकर संशय बना हुआ है।
इस विषय पर पंडित विशाल शांडिल्य ने बताया कि ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 17 जून सुबह 04: 45 पर शुरू होगी और समापन 18 जून सुबह 06: 24 पर होगा। पूजा-पाठ और व्रत इत्यादि की तिथि निर्धारित करने के लिए उदया तिथि का विशेष ध्यान रखा जाता है। ऐसे में निर्जला एकादशी व्रत 18 जून 2024 मंगलवार के दिन रखा जाएगा। व्रत का पारण 19 जून को सुबह 05:21 से सुबह 07:29 के बीच किया जाएगा।
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निर्जला एकादशी पर बन रहे सुखद संयोग ः शांडिल्य ने बताया कि इस बार एकादशी तिथि के दिन शिव, सिद्ध और त्रिपुष्कर योग का निर्माण हो रहा है। साथ ही इस विशेष दिन पर स्वाति नक्षत्र भी बन रहा है। उन्होंने बताया कि शिव योग रात्रि 09: 39 तक रहेगा और इसके बाद सिद्ध योग शुरू हो जाएगा। त्रिपुष्कर योग दोपहर 03: 55 से 19 जून सुबह 05: 20 तक रहेगा। इस दिन स्वाति नक्षत्र दोपहर 03: 55 तक रहेगा। उन्होंने बताया कि इस दिन जो व्यक्ति स्वयं निर्जल रहकर ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का जप करता है वह जन्म जन्मांतर के पापों से मुक्त होकर श्री हरि के धाम जाता है।
पर्व का महत्व
ज्येष्ठ माह में निर्जला एकादशी व्रत किया जाता है। इस व्रत को करने से सभी एकादशियों का फल प्राप्त होता है। एकादशी तिथि पर श्री हरि और मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने का विधान है। धार्मिक मान्यता है कि निर्जला एकादशी पर श्री हरि की उपासना करने से घर में खुशियों का आगमन होता है।
पंडित विशाल शांडिल्य ने बताया कि निर्जला एकादशी व्रत की गणना कठिन व्रत में की जाती है। इस दिन 24 घंटे के लिए बिना भोजन और जल ग्रहण किए इस व्रत का पालन किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति सफलतापूर्वक निर्जला एकादशी व्रत का पालन करता है उन्हें सभी 24 एकादशी व्रत का फल प्राप्त होता है। साथ ही इस विशेष दिन पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की उपासना करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और सभी प्रकार के कष्ट दूर हो जाते हैं।
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कैथल/कलायत। हिंदू धर्म में निर्जला एकादशी व्रत का बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। उदना तिथि की वजह से इस बार 18 जून को निर्जला एकादशी का व्रत का पालन किया जाएगा। इस पर निर्जला एकादशी पर ज्योतिष के दृष्टिकोण से कई सुखद संयोग बन रहे हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो व्यक्ति एकादशी व्रत का पालन करता है उनके सभी कष्ट भगवान विष्णु दूर कर देते हैं। वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के दिन निर्जला एकादशी व्रत का पालन किया जाता है। निर्जला एकादशी व्रत को बहुत ही कठिन व्रत में गिना जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस दिन बिना अन्न और जल ग्रहण किए इस व्रत का पालन किया जाता है। कुछ लोगों के मन में निर्जला एकादशी की तिथि को लेकर संशय बना हुआ है।
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इस विषय पर पंडित विशाल शांडिल्य ने बताया कि ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 17 जून सुबह 04: 45 पर शुरू होगी और समापन 18 जून सुबह 06: 24 पर होगा। पूजा-पाठ और व्रत इत्यादि की तिथि निर्धारित करने के लिए उदया तिथि का विशेष ध्यान रखा जाता है। ऐसे में निर्जला एकादशी व्रत 18 जून 2024 मंगलवार के दिन रखा जाएगा। व्रत का पारण 19 जून को सुबह 05:21 से सुबह 07:29 के बीच किया जाएगा।
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निर्जला एकादशी पर बन रहे सुखद संयोग ः शांडिल्य ने बताया कि इस बार एकादशी तिथि के दिन शिव, सिद्ध और त्रिपुष्कर योग का निर्माण हो रहा है। साथ ही इस विशेष दिन पर स्वाति नक्षत्र भी बन रहा है। उन्होंने बताया कि शिव योग रात्रि 09: 39 तक रहेगा और इसके बाद सिद्ध योग शुरू हो जाएगा। त्रिपुष्कर योग दोपहर 03: 55 से 19 जून सुबह 05: 20 तक रहेगा। इस दिन स्वाति नक्षत्र दोपहर 03: 55 तक रहेगा। उन्होंने बताया कि इस दिन जो व्यक्ति स्वयं निर्जल रहकर ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का जप करता है वह जन्म जन्मांतर के पापों से मुक्त होकर श्री हरि के धाम जाता है।
पर्व का महत्व
ज्येष्ठ माह में निर्जला एकादशी व्रत किया जाता है। इस व्रत को करने से सभी एकादशियों का फल प्राप्त होता है। एकादशी तिथि पर श्री हरि और मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने का विधान है। धार्मिक मान्यता है कि निर्जला एकादशी पर श्री हरि की उपासना करने से घर में खुशियों का आगमन होता है।
पंडित विशाल शांडिल्य ने बताया कि निर्जला एकादशी व्रत की गणना कठिन व्रत में की जाती है। इस दिन 24 घंटे के लिए बिना भोजन और जल ग्रहण किए इस व्रत का पालन किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति सफलतापूर्वक निर्जला एकादशी व्रत का पालन करता है उन्हें सभी 24 एकादशी व्रत का फल प्राप्त होता है। साथ ही इस विशेष दिन पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की उपासना करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और सभी प्रकार के कष्ट दूर हो जाते हैं।