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अब वर्ष 2028 में आएगा फल्गू मेला
अमर उजाला ब्यूरो/कैथल
Updated Thu, 24 Sep 2015 11:34 PM IST
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अपने पूर्वकों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान के लिए मशहूर फल्गू मेला इस बार के बाद 2028 में भरेगा। ऐसे में अगले मेले के इंतजार के लिए श्रद्धालुओं को 13 साल का इंतजार करना पड़ेगा। अभी तक यह मेला तीन से चार साल में भरता रहा है। इस बार 27 सितंबर से 12 अक्तूबर तक चलने वाले फल्गू मेले के लिए सभी तैयारियां कर ली गई हैं।
फल्गू मेला एक विशेष संयोग के आधार पर लगता है। जब भी अश्विन मास के श्राद्धों में सोमवार को अमावस्या आती है, तभी फल्गु मेला भरता है। फल्गू मेले में पूजा कराने वाले पंडित गोपाल शर्मा ने बताया कि फल्गु मेला 2001, 2005, 2008 एवं 2012 में भरा। अब तीन साल बाद इसका नंबर आया है। इसके बाद श्राद्धों में फल्गू मेले का संयोग वर्ष 2028 में होगा। इतनी लंबा इंतजार होने के चलते इस बार मेले में भारी भीड़ उमड़ने के आसार हैं। वर्ष 2028 के बाद 2032, 2035, 2039 एवं फिर 2049 में यह मेला भरेगा।
यह है मेले के पीछे की कवाहत
कहा जाता है कि त्रेता युग में महर्षि फल्क यहां तपस्या करते थे। उस समय गयाजी में एक गयासुर नामका दैत्य था। उसने यह ऐलान किया था कि जो कोई उन्हें युद्ध में हरा देगा। वह अपनी पुत्रियों का विवाह उसके साथ कर देगा। ऐलान के बाद महर्षि फल्क ने उन्हें युद्ध में पराजित कर दिया। कन्यादान के रूप में गयासुर ने वहां मिलने वाले पुण्य का महत्व महर्षि फल्क को दे दिया। इसके बाद से फरल गांव में फल्गु मेला भरता है। यहां मेले के समय पिंडदान कराने से पूर्वकाें को शांति मिलती है। पिंडदान कराने वाले को भी पुण्य की प्राप्ति होती है। ऐसी भी कहावत है कि महाभारत के युद्ध के बाद युधिष्ठिर ने अपने पितरों को मोक्ष की प्राप्ति के लिए यहां पिंडदान कराया था।
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12 अक्तूबर को होगा मुख्य स्नान
इस बार फल्गू मेला 27 सितंबर को शुरू हो रहा है। इसमें 12 अक्तूबर को सोमवती अमावस को मुख्य स्नान होगा। डीसी केएम पांडुरंग ने बताया कि मेला परिसर में विकास कार्य जारी है। मेला परिसर को सेक्टरों में बांटकर तमाम प्रबंध किए जा रहे हैं। यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को कोई परेशानी नहीं होने दी जाएगी।
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फल्गू मेला एक विशेष संयोग के आधार पर लगता है। जब भी अश्विन मास के श्राद्धों में सोमवार को अमावस्या आती है, तभी फल्गु मेला भरता है। फल्गू मेले में पूजा कराने वाले पंडित गोपाल शर्मा ने बताया कि फल्गु मेला 2001, 2005, 2008 एवं 2012 में भरा। अब तीन साल बाद इसका नंबर आया है। इसके बाद श्राद्धों में फल्गू मेले का संयोग वर्ष 2028 में होगा। इतनी लंबा इंतजार होने के चलते इस बार मेले में भारी भीड़ उमड़ने के आसार हैं। वर्ष 2028 के बाद 2032, 2035, 2039 एवं फिर 2049 में यह मेला भरेगा।
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यह है मेले के पीछे की कवाहत
कहा जाता है कि त्रेता युग में महर्षि फल्क यहां तपस्या करते थे। उस समय गयाजी में एक गयासुर नामका दैत्य था। उसने यह ऐलान किया था कि जो कोई उन्हें युद्ध में हरा देगा। वह अपनी पुत्रियों का विवाह उसके साथ कर देगा। ऐलान के बाद महर्षि फल्क ने उन्हें युद्ध में पराजित कर दिया। कन्यादान के रूप में गयासुर ने वहां मिलने वाले पुण्य का महत्व महर्षि फल्क को दे दिया। इसके बाद से फरल गांव में फल्गु मेला भरता है। यहां मेले के समय पिंडदान कराने से पूर्वकाें को शांति मिलती है। पिंडदान कराने वाले को भी पुण्य की प्राप्ति होती है। ऐसी भी कहावत है कि महाभारत के युद्ध के बाद युधिष्ठिर ने अपने पितरों को मोक्ष की प्राप्ति के लिए यहां पिंडदान कराया था।
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12 अक्तूबर को होगा मुख्य स्नान
इस बार फल्गू मेला 27 सितंबर को शुरू हो रहा है। इसमें 12 अक्तूबर को सोमवती अमावस को मुख्य स्नान होगा। डीसी केएम पांडुरंग ने बताया कि मेला परिसर में विकास कार्य जारी है। मेला परिसर को सेक्टरों में बांटकर तमाम प्रबंध किए जा रहे हैं। यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को कोई परेशानी नहीं होने दी जाएगी।