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गांव बात्ता के लोगों व बिजली कर्मचारियों का विवाद गहराया
ब्यूरो/अमर उजाला/कैथ्ाल
Updated Wed, 03 Feb 2016 11:35 PM IST
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गांव बात्ता में बिजली कर्मचारियों व ग्रामीणों के बीच पनपे विवाद को लेकर भारतीय किसान यूनियन भी मैदान में कूद पड़ी है। गांव बात्ता की राजपूत चौपाल में आयोजित बैठक में भाकियू के पदाधिकारियों ने सरकार व प्रशासन को चेतावनी दी है।
भाकियू नेता सतपाल दिल्लोंवाली ने कहा कि अगर प्रशासन ग्रामीणों के खिलाफ कार्यवाही करता है तो सबसे पहले गिरफ्तारी भाकियू के पदाधिकारी देंगे। उन्होंने कहा कि गांव बात्ता में बिजली विभाग के कर्मचारियों ने गलती की और केस बना दिया ग्रामीणों के खिलाफ।
उन्होंने कहा कि यदि गिरफ्तार करना है तो सबसे पहले उनको गिरफ्तार किया जाए। किसानों पर होने वाले प्रशासनिक अत्याचार किसी भी सूरत में बर्दाश्त नही होंगे। उन्होंने कहा कि हालांकि मामले में दोषी बिजली विभाग है उसके बावजूद भी वे समझौते हो तैयार हैं।
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दिल्लोंवाली ने कहा कि पिछले दो सालों से किसान हर सीजन में कर्ज में डूबता ही जा रहा है। सरकार को चाहिए तो यह था कि बिजली के बिलों की दर कम करे पर बिजली के बिलों को इतना बढ़ा दिया गया है कि मिडिल क्लास का आदमी उन बिलों को वहन कर ही नही सकता। जितने एक मध्यमवर्गी आदमी को वेतन मिलता है, उससे दो गुना बिजली का बिल आ रहा है।
फील्ड में कार्य करने वाले बिजली विभाग के कर्मचारियों के खून मुंह लग चुका है तथा वे लोग आम आदमी को लूट कर लाखों रुपये महीना कमा रहे हैं। जिला प्रधान रामसिंह खुराना ने कहा कि गांव बात्ता ने बिजली घर को करोड़ों रुपये की भूमि दान में दी थी इस आश्वासन पर कि गांव में शहरों की तर्ज 24 घंटे बिजली मिलेगी पर कोई फायदा नही हुआ।
उन्होंने कहा कि गांव से किए गए वायदे के अनुसार गांव में विभाग 24 घंटे बिजली उपलब्ध करवाए। चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज व ग्रामीणों के खिलाफ दर्ज किया गया मामला निरस्त नहीं किया तो समस्त गांव वासी प्रशासन के खिलाफ सड़कों पर उतर आऐंगे। आंदोलन की सारी जिम्मेवारी भी प्रशासन की ही होगी।
बैठक में जिलाध्यक्ष राम सिंह खुराना, सरपंच पवन शर्मा, सुरेश, नकली राणा, शमशेर सिंह, श्याम लाल, संजीव बात्ता, रणधीर फौजी, हवा सिंह, सुरेश खुराना, साहब सिंह सहित सैकड़ों ग्रामीण व भाकियू के कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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भाकियू नेता सतपाल दिल्लोंवाली ने कहा कि अगर प्रशासन ग्रामीणों के खिलाफ कार्यवाही करता है तो सबसे पहले गिरफ्तारी भाकियू के पदाधिकारी देंगे। उन्होंने कहा कि गांव बात्ता में बिजली विभाग के कर्मचारियों ने गलती की और केस बना दिया ग्रामीणों के खिलाफ।
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उन्होंने कहा कि यदि गिरफ्तार करना है तो सबसे पहले उनको गिरफ्तार किया जाए। किसानों पर होने वाले प्रशासनिक अत्याचार किसी भी सूरत में बर्दाश्त नही होंगे। उन्होंने कहा कि हालांकि मामले में दोषी बिजली विभाग है उसके बावजूद भी वे समझौते हो तैयार हैं।
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दिल्लोंवाली ने कहा कि पिछले दो सालों से किसान हर सीजन में कर्ज में डूबता ही जा रहा है। सरकार को चाहिए तो यह था कि बिजली के बिलों की दर कम करे पर बिजली के बिलों को इतना बढ़ा दिया गया है कि मिडिल क्लास का आदमी उन बिलों को वहन कर ही नही सकता। जितने एक मध्यमवर्गी आदमी को वेतन मिलता है, उससे दो गुना बिजली का बिल आ रहा है।
फील्ड में कार्य करने वाले बिजली विभाग के कर्मचारियों के खून मुंह लग चुका है तथा वे लोग आम आदमी को लूट कर लाखों रुपये महीना कमा रहे हैं। जिला प्रधान रामसिंह खुराना ने कहा कि गांव बात्ता ने बिजली घर को करोड़ों रुपये की भूमि दान में दी थी इस आश्वासन पर कि गांव में शहरों की तर्ज 24 घंटे बिजली मिलेगी पर कोई फायदा नही हुआ।
उन्होंने कहा कि गांव से किए गए वायदे के अनुसार गांव में विभाग 24 घंटे बिजली उपलब्ध करवाए। चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज व ग्रामीणों के खिलाफ दर्ज किया गया मामला निरस्त नहीं किया तो समस्त गांव वासी प्रशासन के खिलाफ सड़कों पर उतर आऐंगे। आंदोलन की सारी जिम्मेवारी भी प्रशासन की ही होगी।
बैठक में जिलाध्यक्ष राम सिंह खुराना, सरपंच पवन शर्मा, सुरेश, नकली राणा, शमशेर सिंह, श्याम लाल, संजीव बात्ता, रणधीर फौजी, हवा सिंह, सुरेश खुराना, साहब सिंह सहित सैकड़ों ग्रामीण व भाकियू के कार्यकर्ता मौजूद रहे।