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दो साल में 70 लाख का पार्क बदहाल
ब्यूरो/अमर उजाला/कैथ्ाल
Updated Sun, 29 Nov 2015 10:57 PM IST
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शहीद ऊधमसिंह पार्क इस समय अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। तीन माह से माली या चौकीदार न होने के कारण पार्क के पेड़-पौधे सूख गए हैं। कुर्सियां टूट गई हैं। फुटपाथ की टाइलें भी उखड़ना शुरू हो गई हैं। लावारिस पशु यहां घूमते रहते हैं, अगर समय रहते इसकी सुध नहीं ली गई तो यह पार्क एक चारागाह में तब्दील हो जाएगा।
यहां सुबह-शाम आने वाले शहरवासियों को बदबू, पीने के पानी की कमी सहित कई समस्याओं से जूझना पड़ता है।
शहर के हिंद सिनेमा से सीवन गेट की ओर के इलाके में पार्क की बड़ी कमी थी। जिसे देखते हुए पूर्व मंत्री रणदीप सिंह सुरजेवाला के कार्यकाल में एक अत्याधुनिक पार्क माता गेट पर बनाया गया था।
जहां शहीद ऊधम सिंह सहित अशफाक उल्ला खां सहित अन्य स्वतंत्रता सेनानियों की बड़े चित्रों सहित उनके बारे में परिचय देते हुए आकर्षक रचनाएं की गई थीं। पार्क में अत्याधुनिक लाइटें, स्टील के डस्टबिन, बैठने के लिए कुर्सियों सहित पीने के पानी की भी सुविधा थी। 28 सितंबर, 2013 में पूर्व मंत्री ने इसका उद्घाटन किया था, लेकिन महज दो साल में पार्क बदहाल हो चुका है।
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ये बोले शहर वासी
इस पार्क के बन जाने से यहां दर्जनों कॉलोनियों के लोगों को लाभ हुआ था। वे यहां लगातार सैर करने के लिए आ रहे हैं। तीन माह से यहां कोई चौकीदार अथवा माली के न होने के कारण सब कुछ उजाड़ हो गया है। पेड़-पौधे सूख गए हैं।
मंजूरानी
यहां पशु पार्क में घुसे रहते हैं। गाय, घोड़े एवं कुत्तों की शरणस्थली में यह पार्क तब्दील हो गया है। पेड़ पौधों की कोई देखभाल नहीं है। दो-तीन माह में ही हरी भरी घास सूख गई है।
सुनीता
शुरू से ही यहां योग करवाती आ रही हैं लेकिन अब गोबर व गंदगी के कारण बैठना भी दूभर हो गया है। पहले देखभाल के लिए कर्मचारी था। जो अब नहीं है। यह पार्क भगवान भरोसे है। घास बड़ी-बड़ी हो गई है जिस कारण यहां आने में डर लगने लगा है।
संतोष
कुर्सियां टूट गई हैं। सुबह के समय पानी की कमी के कारण ज्यादा परेशानी होती है। शौचालय की सुविधा नहीं है। लाखों रुपये खर्च करके लगाए गए पेड़-पौधे इस समय झाड़ियों में तब्दील हो गए हैं। पार्क की देखभाल की जानी चाहिए। ताकि इन कॉलोनियों के लोगों को आसपास पार्क न होने के कारण परेशान न होना पड़े।
ममता गांधी एवं नरेंद्र कुमार
पार्क में पशुओं के प्रवेश से ज्यादा नुकसान हो गया है। यहां फुटपाथ की टाइलें टूटने लगी हैं। लाइटें खराब हो गई हैं। अत्याधुनिक लाइटें फुटपाथ पर लगाई गई थीं जो खराब हैं। इनकी देखभाल की जानी चाहिए।
आशू कुमार
अंकल पानी कहां मिलेगा
पार्क में लोगों से बातचीत करने पहुंचे एक व्यक्ति से बच्चे विक्रम ने पूछा अंकल इसमें पानी नहीं आ रहा। पीने का पानी कहां मिलेगा? तो व्यक्ति ने जवाब दिया कि बेटा यहां पानी नहीं है। आप कहीं और जाकर पानी पी लें।
शहर की ही एक संस्था के लोगों ने कहा था कि वे इसकी देखभाल कर लेंगे। यदि वे इसकी देखभाल नहीं कर रहे हैं तो पता लगाया जाएगा। शीघ्र ही पार्क की सुध लेकर यहां जो भी खामियां हैं, उन्हें दूर करवाया जाएगा। यह शहर के बेहतरीन पार्कों में से एक है। इसका कायाकल्प कर दिया जाएगा।
एसके गोयल, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद
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यहां सुबह-शाम आने वाले शहरवासियों को बदबू, पीने के पानी की कमी सहित कई समस्याओं से जूझना पड़ता है।
शहर के हिंद सिनेमा से सीवन गेट की ओर के इलाके में पार्क की बड़ी कमी थी। जिसे देखते हुए पूर्व मंत्री रणदीप सिंह सुरजेवाला के कार्यकाल में एक अत्याधुनिक पार्क माता गेट पर बनाया गया था।
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जहां शहीद ऊधम सिंह सहित अशफाक उल्ला खां सहित अन्य स्वतंत्रता सेनानियों की बड़े चित्रों सहित उनके बारे में परिचय देते हुए आकर्षक रचनाएं की गई थीं। पार्क में अत्याधुनिक लाइटें, स्टील के डस्टबिन, बैठने के लिए कुर्सियों सहित पीने के पानी की भी सुविधा थी। 28 सितंबर, 2013 में पूर्व मंत्री ने इसका उद्घाटन किया था, लेकिन महज दो साल में पार्क बदहाल हो चुका है।
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ये बोले शहर वासी
इस पार्क के बन जाने से यहां दर्जनों कॉलोनियों के लोगों को लाभ हुआ था। वे यहां लगातार सैर करने के लिए आ रहे हैं। तीन माह से यहां कोई चौकीदार अथवा माली के न होने के कारण सब कुछ उजाड़ हो गया है। पेड़-पौधे सूख गए हैं।
मंजूरानी
यहां पशु पार्क में घुसे रहते हैं। गाय, घोड़े एवं कुत्तों की शरणस्थली में यह पार्क तब्दील हो गया है। पेड़ पौधों की कोई देखभाल नहीं है। दो-तीन माह में ही हरी भरी घास सूख गई है।
सुनीता
शुरू से ही यहां योग करवाती आ रही हैं लेकिन अब गोबर व गंदगी के कारण बैठना भी दूभर हो गया है। पहले देखभाल के लिए कर्मचारी था। जो अब नहीं है। यह पार्क भगवान भरोसे है। घास बड़ी-बड़ी हो गई है जिस कारण यहां आने में डर लगने लगा है।
संतोष
कुर्सियां टूट गई हैं। सुबह के समय पानी की कमी के कारण ज्यादा परेशानी होती है। शौचालय की सुविधा नहीं है। लाखों रुपये खर्च करके लगाए गए पेड़-पौधे इस समय झाड़ियों में तब्दील हो गए हैं। पार्क की देखभाल की जानी चाहिए। ताकि इन कॉलोनियों के लोगों को आसपास पार्क न होने के कारण परेशान न होना पड़े।
ममता गांधी एवं नरेंद्र कुमार
पार्क में पशुओं के प्रवेश से ज्यादा नुकसान हो गया है। यहां फुटपाथ की टाइलें टूटने लगी हैं। लाइटें खराब हो गई हैं। अत्याधुनिक लाइटें फुटपाथ पर लगाई गई थीं जो खराब हैं। इनकी देखभाल की जानी चाहिए।
आशू कुमार
अंकल पानी कहां मिलेगा
पार्क में लोगों से बातचीत करने पहुंचे एक व्यक्ति से बच्चे विक्रम ने पूछा अंकल इसमें पानी नहीं आ रहा। पीने का पानी कहां मिलेगा? तो व्यक्ति ने जवाब दिया कि बेटा यहां पानी नहीं है। आप कहीं और जाकर पानी पी लें।
शहर की ही एक संस्था के लोगों ने कहा था कि वे इसकी देखभाल कर लेंगे। यदि वे इसकी देखभाल नहीं कर रहे हैं तो पता लगाया जाएगा। शीघ्र ही पार्क की सुध लेकर यहां जो भी खामियां हैं, उन्हें दूर करवाया जाएगा। यह शहर के बेहतरीन पार्कों में से एक है। इसका कायाकल्प कर दिया जाएगा।
एसके गोयल, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद