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मेहनत करेंगे, टूटेंगे नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला/कैथ्ाल
Updated Thu, 25 Feb 2016 11:54 PM IST
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मुझे किसी की सहायता नहीं चाहिए। 17 साल पहले मेहनत से यहां मिठाई की छोटी सी दुकान शुरू की थी। पूरा परिवार इसी दुकान के सहारे चलता है। पाई-पाई जोड़कर यहां तक पहुंचे थे, सब बर्बाद हो गया... लेकिन मुझे किसी की निजी सहायता की जरूरत नहीं है।
सरकार सहायता करे तो करे, लेकिन किसी की निजी सहायता नहीं लूंगा। यह कहना है गांव खानपुर निवासी धनी राम सैनी। अपनी क्षतिग्रस्त दुकान के बाहर बिखरे पड़े सामान के ऊपर बैठे धनी राम ने दृढ़ता यह बात कही। आंखों में आंसुओं का सैलाब थामने का प्रयास करते हुए अपनी बर्बादी की कहानी के बारे में पूछने पर धनी राम ने कहा कि 17
साल पहले वे हलवाई के कारीगर के तौर पर काम करते थे।
विवाह-शादियों में हलवाइयों के साथ जाकर दिहाड़ी करते थे। इसके बाद पाई-पाई जोड़ी। करनाल रोड पर रेलवे फाटक से पार दुकान बनाई। उस समय यहां बस्ती भी नहीं थीं लेकिन इंतजार किया। भूखे-प्यासे इसी दुकान के आसरे बैठे रहे। तीन बेटे हैं। वे भी इसी दुकान पर काम करते हैं। पूरे परिवार की रोजी-रोटी यही दुकान चलाती है। उपद्रव में दुकान में रखे सामान को न केवल नष्ट किया गया, बल्कि आगजनी से उसे राख कर दिया गया।
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17 साल की मेहनत की कमाई पल भर में चकनाचूर हो गई। मार्केट में कुछ लोगों ने राशि एकत्रित करके लेने को कहा है लेकिन मुझे ऐसी कोई सहायता नहीं चाहिए। सरकार सहायता करे तो करे। निजी सहायता नहीं लूंगा। पहले भी मेहनत का भगवान ने फल दिया था। बेटों को भी यही कहता हूं कि किसी के आगे हाथ पसारने के बजाय अपनी मेहनत से अपनी रोजी-रोटी कमाएं। हम फिर मेहनत करेंगे। फिर दुकान को जुटाने का प्रयास करेंगे। भला हो उन लोगों का, जिन्होंने यह सब किया है।
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सरकार सहायता करे तो करे, लेकिन किसी की निजी सहायता नहीं लूंगा। यह कहना है गांव खानपुर निवासी धनी राम सैनी। अपनी क्षतिग्रस्त दुकान के बाहर बिखरे पड़े सामान के ऊपर बैठे धनी राम ने दृढ़ता यह बात कही। आंखों में आंसुओं का सैलाब थामने का प्रयास करते हुए अपनी बर्बादी की कहानी के बारे में पूछने पर धनी राम ने कहा कि 17
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साल पहले वे हलवाई के कारीगर के तौर पर काम करते थे।
विवाह-शादियों में हलवाइयों के साथ जाकर दिहाड़ी करते थे। इसके बाद पाई-पाई जोड़ी। करनाल रोड पर रेलवे फाटक से पार दुकान बनाई। उस समय यहां बस्ती भी नहीं थीं लेकिन इंतजार किया। भूखे-प्यासे इसी दुकान के आसरे बैठे रहे। तीन बेटे हैं। वे भी इसी दुकान पर काम करते हैं। पूरे परिवार की रोजी-रोटी यही दुकान चलाती है। उपद्रव में दुकान में रखे सामान को न केवल नष्ट किया गया, बल्कि आगजनी से उसे राख कर दिया गया।
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17 साल की मेहनत की कमाई पल भर में चकनाचूर हो गई। मार्केट में कुछ लोगों ने राशि एकत्रित करके लेने को कहा है लेकिन मुझे ऐसी कोई सहायता नहीं चाहिए। सरकार सहायता करे तो करे। निजी सहायता नहीं लूंगा। पहले भी मेहनत का भगवान ने फल दिया था। बेटों को भी यही कहता हूं कि किसी के आगे हाथ पसारने के बजाय अपनी मेहनत से अपनी रोजी-रोटी कमाएं। हम फिर मेहनत करेंगे। फिर दुकान को जुटाने का प्रयास करेंगे। भला हो उन लोगों का, जिन्होंने यह सब किया है।