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पाश्चात्य संस्कृति से युवाओं को बचाने की जरूरत : भगवान
Wed, 03 Apr 2024 01:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Wed, 03 Apr 2024 01:46 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
सीवन। राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में छात्र और शिक्षकों को जीवन में नैतिक शिक्षा का महत्व विषय पर कार्यक्रम आयोजित किया।
इसमें माउंट आबू राजस्थान से प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के ब्रह्माकुमार भगवान भाई मुख्य वक्ता रहे। भगवान भाई ने कहा कि सिनेमा, मोबाइल, इंटरनेट व टीवी के माध्यम से युवा पीढ़ी पर पाश्चात्य संस्कृति का आघात हो रहा है। इस आघात से युवा पीढ़ी को बचाने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि आज के बच्चे कल का भावी समाज हैं। अगर कल के भावी समाज को अच्छा देखना चाहते हो तो वर्तमान के युवाओं को नैतिक सद्गुणों की शिक्षा की आधार से चरित्रवान बनाए। तब समाज बेहतर बन सकता है।
गुणवान व चरित्रवान बच्चे देश की सच्ची संपत्ति हैं। कहा कि ऐसे गुणवान और चरित्रवान बच्चे देश और समाज के लिए कुछ रचनात्मक कार्य कर सकते हैं। उन्होंने भारतीय संस्कृति की याद दिलाते हुए कहा कि प्राचीन संस्कृति आध्यात्मिकता की रही, जिस कारण प्राचीन मानव भी वंदनीय और पूजनीय रहा।
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उन्होंने कहा कि नैतिक शिक्षा से ही मानव के व्यवहार में निखार लाता है। ब्रह्माकुमार भगवान भाई ने कहा कि वर्तमान समय में कुसंग, सिनेमा, व्यसन और फैशन से युवा पीढ़ी भटक रही है। आध्यात्मिक ज्ञान और नैतिक शिक्षा के द्वारा युवा पीढ़ी को नई दिशा मिल सकती है। उन्होंने बताया कि युवा पीढ़ी को कुछ रचनात्मक कार्य सिखाए, तब उनकी शक्ति सही उपयोग में ला सकेंगे। उन्होंने कहा कि हमारे मूल्य हमारी विरासत है। स्थानीय ब्रह्माकुमारी सेवा केंद्र की तरफ से बीके राजेश शर्मा ने भी अपने विचार रखे। प्रधानाचार्य सुदर्शन शर्मा ने ब्रह्माकुमारी के इस कार्यक्रम के लिए आभार व्यक्त किया। मंच संचालन बहादुर सिंह ने किया। इस मौके पर गिरधारी लाल, अनिल कुमार, दिलबाग सिंह, राजदीप, बीके रमेश चंद आदि मौजूद थे।
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सीवन। राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में छात्र और शिक्षकों को जीवन में नैतिक शिक्षा का महत्व विषय पर कार्यक्रम आयोजित किया।
इसमें माउंट आबू राजस्थान से प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के ब्रह्माकुमार भगवान भाई मुख्य वक्ता रहे। भगवान भाई ने कहा कि सिनेमा, मोबाइल, इंटरनेट व टीवी के माध्यम से युवा पीढ़ी पर पाश्चात्य संस्कृति का आघात हो रहा है। इस आघात से युवा पीढ़ी को बचाने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि आज के बच्चे कल का भावी समाज हैं। अगर कल के भावी समाज को अच्छा देखना चाहते हो तो वर्तमान के युवाओं को नैतिक सद्गुणों की शिक्षा की आधार से चरित्रवान बनाए। तब समाज बेहतर बन सकता है।
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गुणवान व चरित्रवान बच्चे देश की सच्ची संपत्ति हैं। कहा कि ऐसे गुणवान और चरित्रवान बच्चे देश और समाज के लिए कुछ रचनात्मक कार्य कर सकते हैं। उन्होंने भारतीय संस्कृति की याद दिलाते हुए कहा कि प्राचीन संस्कृति आध्यात्मिकता की रही, जिस कारण प्राचीन मानव भी वंदनीय और पूजनीय रहा।
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उन्होंने कहा कि नैतिक शिक्षा से ही मानव के व्यवहार में निखार लाता है। ब्रह्माकुमार भगवान भाई ने कहा कि वर्तमान समय में कुसंग, सिनेमा, व्यसन और फैशन से युवा पीढ़ी भटक रही है। आध्यात्मिक ज्ञान और नैतिक शिक्षा के द्वारा युवा पीढ़ी को नई दिशा मिल सकती है। उन्होंने बताया कि युवा पीढ़ी को कुछ रचनात्मक कार्य सिखाए, तब उनकी शक्ति सही उपयोग में ला सकेंगे। उन्होंने कहा कि हमारे मूल्य हमारी विरासत है। स्थानीय ब्रह्माकुमारी सेवा केंद्र की तरफ से बीके राजेश शर्मा ने भी अपने विचार रखे। प्रधानाचार्य सुदर्शन शर्मा ने ब्रह्माकुमारी के इस कार्यक्रम के लिए आभार व्यक्त किया। मंच संचालन बहादुर सिंह ने किया। इस मौके पर गिरधारी लाल, अनिल कुमार, दिलबाग सिंह, राजदीप, बीके रमेश चंद आदि मौजूद थे।